माधुरी दीक्षित की वो 3 विवादित फिल्में, जिन्हें बैन करने की उठी मांग, लेकिन रिलीज होते ही रच दिया इतिहास

बॉलीवुड की 'धक-धक गर्ल' यानी माधुरी दीक्षित ने अपने करियर में एक से बढ़कर एक सुपरहिट फिल्में दी हैं और अपनी बेहतरीन अदाकारी व डांस के दम पर दर्शकों के दिलों पर दशकों तक राज किया है। लेकिन माधुरी के इस शानदार और बेमिसाल फिल्मी सफर में कुछ ऐसे मोड़ भी आए, जब उन्हें भारी विवादों और बदनामी का सामना करना पड़ा। उनके करियर की 3 फिल्में ऐसी रहीं, जिन्हें सिनेमाघरों में रिलीज होने से रोकने के लिए भारी विरोध हुआ और यहां तक कि उन्हें बैन (Ban) करने तक की मांग उठने लगी थी। हालांकि, जब ये फिल्में बड़े पर्दे पर आईं, तो इन्होंने बॉक्स ऑफिस पर सारे रिकॉर्ड तोड़कर एक नया इतिहास रच दिया।
इस फिल्म के एक किसिंग सीन ने मचाया था जबरदस्त बवाल
माधुरी दीक्षित के करियर के शुरुआती दौर में साल 1988 में आई फिल्म 'दयावान' उनके जीवन का सबसे बड़ा विवाद बन गई थी। इस फिल्म में उनके साथ मुख्य भूमिका में अभिनेता विनोद खन्ना थे। फिल्म के एक गाने में माधुरी और विनोद खन्ना के बीच कुछ बेहद बोल्ड और इंटीमेट किसिंग सीन फिल्माए गए थे, जिसने उस दौर के समाज और दर्शकों को हैरान कर दिया था। इस सीन को लेकर माधुरी दीक्षित की काफी आलोचना हुई और फिल्म को भारतीय संस्कृति के खिलाफ बताते हुए बैन करने की मांग की गई। सालों बाद खुद माधुरी ने एक इंटरव्यू में स्वीकार किया था कि उन्हें उस सीन को करने का बेहद अफसोस था, लेकिन इस भारी बदनामी और विवाद के बावजूद फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर साबित हुई थी।
बोल्ड गानों और दोहरे अर्थ वाले बोलों पर जब सेंसर बोर्ड ने कड़ा रुख अपनाया
साल 1993 में रिलीज हुई निर्देशक सुभाष घई की कल्ट क्लासिक फिल्म 'खलनायक' ने माधुरी दीक्षित को लोकप्रियता के शिखर पर पहुंचा दिया, लेकिन इसके साथ ही यह फिल्म एक बड़े कानूनी और सामाजिक विवाद में भी फंस गई थी। फिल्म का एक गाना 'चोली के पीछे क्या है' रिलीज होते ही विवादों के घेरे में आ गया। कई सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों ने इस गाने के बोलों को अश्लील और दोहरे अर्थ (Double Meaning) वाला बताते हुए फिल्म पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। मामला कोर्ट तक भी पहुंचा, लेकिन जब फिल्म थिएटर्स में रिलीज हुई, तो संजय दत्त और माधुरी की इस फिल्म ने कमाई के नए कीर्तिमान स्थापित किए और यह गाना आज भी बॉलीवुड के सबसे आइकॉनिक गानों में गिना जाता है।
सामाजिक कुरीतियों पर चोट करने वाली इस फिल्म का ग्रामीण इलाकों में हुआ कड़ा विरोध
माधुरी दीक्षित के करियर की एक और बेहद दमदार और लीक से हटकर बनी फिल्म थी 'मृत्युदंड', जो साल 1997 में रिलीज हुई थी। प्रकाश झा के निर्देशन में बनी इस फिल्म में बिहार के ग्रामीण इलाकों में फैले पितृसत्तात्मक समाज, महिला उत्पीड़न और सामंतवाद की कड़वी सच्चाई को दिखाया गया था। फिल्म में माधुरी के दमदार और विद्रोही किरदार 'केतकी' के कुछ दृश्यों और संवादों को लेकर समाज के एक खास वर्ग ने तीखी आपत्ति जताई थी। फिल्म को समाज में नफरत फैलाने वाली बताकर कई जगहों पर इसके प्रदर्शन को रोकने की कोशिश की गई और बैन की मांग उठी। हालांकि, समीक्षकों और दर्शकों ने फिल्म को हाथों-हाथ लिया और माधुरी को उनकी बेहतरीन एक्टिंग के लिए कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से नवाजा गया।