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ब्रह्मोस, अस्त्र मिसाइल और EVM समेत 20 समझौतों पर मुहर, मल्लका स्ट्रेट में बढ़ी ड्रैगन की टेंशन

दक्षिण-पूर्वी एशिया के रणनीतिक समीकरणों को बदलने वाले एक बेहद महत्वपूर्ण रक्षा और कूटनीतिक घटनाक्रम में भारत और इंडोनेशिया के बीच ऐतिहासिक द्विपक्षीय साझेदारी स्थापित हुई है। दोनों देशों के बीच आयोजित हाई-लेवल समिट में ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, अस्त्र बियॉन्ड-विजुअल-रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल और भारत निर्मित इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) तकनीक के हस्तांतरण सहित कुल 20 बड़े समझौतों पर अंतिम मुहर लगा दी गई है। यह कदम न केवल भारत के 'एक्ट ईस्ट' विजन को नई गति देगा, बल्कि वैश्विक रक्षा निर्यात मार्केट में भारत को एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित करेगा।

मल्लका जलडमरूमध्य में भारत की धमक और रणनीतिक घेराबंदी

इस महाडील का सबसे संवेदनशील और रणनीतिक हिस्सा मल्लका स्ट्रेट (Strait of Malacca) से जुड़ा हुआ है। दुनिया के इस सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्ग पर भारत और इंडोनेशिया की नौसेनाओं के बीच साझा गश्त और लॉजिस्टिक्स सपोर्ट को लेकर विशेष सहमति बनी है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के बेहद करीब होने के कारण मल्लका जलडमरूमध्य में भारतीय नौसेना की यह बढ़ती सक्रियता सीधे तौर पर हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में चीन के बढ़ते दखल और उसकी 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' रणनीति को कड़ा जवाब है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इंडोनेशिया को ब्रह्मोस और अस्त्र जैसी मारक मिसाइलें मिलने से जकार्ता की समुद्री रक्षा क्षमताएं अभूतपूर्व रूप से मजबूत होंगी।

डिफेंस से लेकर डिजिटल डेमोक्रेसी तक: भारत की ईवीएम तकनीक अपनाएगा इंडोनेशिया

यह समझौता सिर्फ सैन्य साजो-सामान तक ही सीमित नहीं है, बल्कि भारत अब इंडोनेशिया को अपनी भरोसेमंद डिजिटल लोकतांत्रिक प्रणाली का हिस्सा भी बनाने जा रहा है। दुनिया के तीसरे सबसे बड़े लोकतंत्र इंडोनेशिया में पारदर्शी और सुचारू चुनाव कराने के लिए भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) द्वारा निर्मित भारतीय ईवीएम और वीवीपीएटी (VVPAT) तकनीक की आपूर्ति की जाएगी। इसके अलावा दोनों देशों के बीच डिजिटल पेमेंट आर्किटेक्चर (UPI जैसी प्रणाली), रिन्यूएबल एनर्जी और साइबर सुरक्षा के मोर्चे पर भी व्यापक समझौतों का आदान-प्रदान हुआ है, जो दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को एक नए मुकाम पर ले जाएगा।

आसियान क्षेत्र में रक्षा निर्यात की नई बुलंदियां और भू-राजनीतिक असर

फिलीपींस के बाद अब इंडोनेशिया के साथ ब्रह्मोस मिसाइल की यह डील भारत के घरेलू रक्षा उद्योग (Make in India in Defence) के लिए एक गेम-चेंजर साबित होने वाली है। जकार्ता और नई दिल्ली के बीच हुए इन 20 समझौतों से पूरे आसियान (ASEAN) क्षेत्र में भारत का भू-राजनीतिक और आर्थिक प्रभाव काफी गहरा हो गया है। सुमात्रा और जावा के तटीय इलाकों से लेकर मलक्का के मुहाने तक भारत की यह नई सुरक्षा घेराबंदी आने वाले दिनों में दक्षिण चीन सागर के विवादों पर भी गहरा असर डालेगी।

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