राम मंदिर दान चोरी विवाद: ‘मैं बाहर था तो इंतजार क्यों नहीं किया…’, चंपत राय का SIT को लिखा पत्र वायरल, बैंक पर फोड़ा ठीकरा

श्री राम जन्मभूमि मंदिर में दान पेटी से हुई चोरी के खुलासे के बाद से ही अयोध्या से लेकर दिल्ली तक हड़कंप मचा हुआ है। इस पूरे प्रकरण में अब तक खामोश रहे श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के निवर्तमान महासचिव चंपत राय ने आखिरकार अपनी चुप्पी तोड़ दी है। उनकी ओर से स्थिति स्पष्ट करने के लिए दो चिट्ठियां सामने आई हैं। पहला पत्र उन्होंने राम भक्तों को संबोधित करते हुए अपने आधिकारिक 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर साझा किया है। लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा उनके उस दूसरे पत्र की हो रही है, जो उन्होंने एसआईटी (SIT) को लिखा था और वह अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वायरल पत्र में चंपत राय ने बैंक की सुरक्षा व्यवस्था और एसआईटी की कार्यप्रणाली पर कई तीखे सवाल दागे हैं।
'मैं बाहर था तो मेरे हस्ताक्षर के लिए इंतजार क्यों नहीं किया गया?' सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एसआईटी को लिखे पत्र में चंपत राय ने सीधे तौर पर गणना प्रक्रिया के दिशा-निर्देशों (SOP) को खारिज कर दिया है। पत्र के मुताबिक, 6 फरवरी 2025 को दान की गिनती के लिए जो एसओपी तय की गई थी, उस पर ट्रस्ट के डॉ. अनिल मिश्र और एसबीआई अयोध्या के मुख्य प्रबंधक गोविंद मिश्र के साइन हैं। चंपत राय ने सख्त लहजे में लिखा है कि वह इस दस्तावेज से बिल्कुल भी सहमत नहीं हैं और इसे पूरी तरह अस्वीकार करते हैं। उन्होंने दावा किया कि इस गोपनीय पत्र की जानकारी उन्हें एक साल बाद 13 जून 2026 को अपने अकाउंट ऑफिस से मिली। उनका सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगस्त 2020 से लेकर अब तक के हर अनुबंध पर उनके हस्ताक्षर हैं, तो फिर इस अहम दस्तावेज पर उनके हस्ताक्षर क्यों नहीं लिए गए? अगर वह अयोध्या से बाहर थे, तो उनके लौटने की प्रतीक्षा क्यों नहीं की गई?
कुर्सी-मेज और जेब वाले कपड़ों ने की चोरी में मदद वायरल चिट्ठी में दान चोरी के लिए सीधे तौर पर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की कार्यप्रणाली को जिम्मेदार ठहराया गया है। चंपत राय ने पत्र में खुलासा किया है कि 9 फरवरी 2024 को बैंक के साथ एक एमओयू (MoU) साइन हुआ था, जिसके हर पन्ने पर उनके दस्तखत मौजूद हैं। इसके तहत सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाने थे, जैसे लोहे का दरवाजा और सीसीटीवी कैमरे। लेकिन बैंक ने जमीन पर बैठकर नोट गिनने की बजाय कुर्सी-मेज पर गणना करने का जो सुझाव दिया, वही चोरी का सबसे बड़ा कारण बन गया। जब चोरी की घटना सामने आई, तो मेज हटाकर वापस जमीन पर बैठकर गिनती शुरू करवा दी गई।
बैंक के चेस्ट रूम नियमों की उड़ी सरेआम धज्जियां चंपत राय ने बैंक के उच्च अधिकारियों पर भी निशाना साधते हुए कहा है कि देश के किसी भी बैंक के चेस्ट रूम (Chest Room) के कुछ सख्त नियम होते हैं। लेकिन एसबीआई ने इन नियमों का बिल्कुल भी पालन नहीं कराया। गणना कक्ष के अंदर जाने वाले कर्मचारियों को जो कपड़े दिए गए, उनमें जेब बनी हुई थी। इसके अलावा कक्ष में प्रवेश करते और बाहर निकलते समय विशेष तलाशी का नियम भी नजरअंदाज कर दिया गया। यह सब तब हुआ जब दिशा-निर्देशों में इन बातों का स्पष्ट उल्लेख था।
हाउसकीपिंग स्टाफ से कराई जा रही थी नोटों की गिनती! इस पत्र में भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी एक बेहद चौंकाने वाला दावा किया गया है। चंपत राय के अनुसार, बैंक ने नोटों की गिनती के लिए जिन युवकों का चयन किया था, उन्हें आधिकारिक तौर पर 'हाउस कीपिंग स्टाफ' के रूप में भर्ती किया गया था। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह तरीका उचित है? चंपत राय का मानना है कि इस पूरे मामले में बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों की भारी अनदेखी रही है और जल्दबाजी में बनाए गए दिशा-निर्देशों का बैंक ने खुद ही पालन नहीं करवाया, जिसका नतीजा दान की चोरी के रूप में सामने आया।