PM Modi Indonesia Visit: इंडोनेशिया के प्रंबानन मंदिर पहुंचे पीएम मोदी, 90% मुस्लिम आबादी वाले देश में दिखेगा ‘सर्वधर्म समभाव’ का अद्भुत नजारा

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समय दक्षिण-पूर्व एशियाई देश इंडोनेशिया के बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक आधिकारिक दौरे पर हैं। कूटनीतिक और सांस्कृतिक लिहाज से आज का दिन (8 जुलाई 2026) भारत और इंडोनेशिया के द्विपक्षीय संबंधों के लिए एक नया स्वर्णिम अध्याय लिखने जा रहा है। पीएम मोदी आज इंडोनेशिया के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति प्रोबोवो सुबियांतों (Prabowo Subianto) के साथ योग्याकार्ता में स्थित करीब 900 साल पुराने और दुनिया के सबसे भव्य हिंदू मंदिरों में शुमार 'प्रंबानन मंदिर' (Prambanan Temple) का दौरा करेंगे।
यह दौरा इसलिए भी पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है क्योंकि इंडोनेशिया वैश्विक स्तर पर सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी (करीब 90 प्रतिशत) वाला मुल्क है। ऐसे में वहां के राष्ट्रपति का भारतीय प्रधानमंत्री के साथ एक प्राचीन हिंदू मंदिर के दर्शन के लिए जाना दुनिया के सामने 'सर्वधर्म समभाव' और धार्मिक सह-अस्तित्व (Religious Co-existence) का एक बेजोड़ उदाहरण पेश करता है।
9वीं शताब्दी का दिव्य इतिहास: सनातन धर्म के 'त्रिदेवों' का प्रतीक
इतिहासकारों और पुरातत्वविदों के मुताबिक, प्रंबानन मंदिर का निर्माण मध्य जावा में 9वीं शताब्दी (लगभग 850 ईस्वी) के आसपास प्राचीन मातरम साम्राज्य (Mataram Kingdom) के हिंदू राजाओं ने करवाया था। स्थापत्य कला (Architecture) का यह अद्भुत चमत्कार मुख्य रूप से भगवान शिव को समर्पित है।
इस विशाल मंदिर परिसर के केंद्र में तीन मुख्य ऊंचे शिखर बने हैं, जिनमें भगवान शिव के साथ-साथ सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा और पालनहार भगवान विष्णु के भी भव्य मंदिर मौजूद हैं। यही वजह है कि इसे सनातन धर्म की 'त्रिमूर्ति' या त्रिदेवों का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है। कई एकड़ में फैले इस ऐतिहासिक परिसर में कभी 200 से अधिक छोटे-बड़े मंदिर हुआ करते थे, जिनमें से कई समय के साथ आए विनाशकारी भूकंपों और प्राकृतिक आपदाओं के कारण क्षतिग्रस्त हो गए, लेकिन मुख्य मंदिरों की भव्यता आज भी जस की तस बनी हुई है।
पत्थरों पर जीवंत है रामायण की गाथा और 'रामायण बैले' की परंपरा
प्रंबानन मंदिर की सबसे बड़ी और विस्मयकारी विशेषता इसकी दीवारों पर की गई बेहद बारीक और जीवंत नक्काशी है। मंदिर की पत्थरों से बनी दीवारों पर महान ग्रंथ रामायण और कृष्णलीला की पौराणिक कहानियों को दृश्यों के रूप में उकेरा गया है।
इंडोनेशिया की सांस्कृतिक पहचान का सबसे खूबसूरत हिस्सा भी इसी मंदिर से जुड़ा हुआ है। इस मंदिर परिसर के ओपन-एयर थिएटर में आज भी सदियों पुरानी परंपरा के तहत प्रसिद्ध 'रामायण बैले' (Ramayana Ballet) का भव्य मंचन किया जाता है। स्थानीय मुस्लिम कलाकार बेहद श्रद्धा और कलात्मकता के साथ पारंपरिक इंडोनेशियाई नृत्य (जावानीस डांस) और संगीत के जरिए भगवान श्री राम, माता सीता और हनुमान जी की पावन कथा को जीवंत करते हैं, जिसे देखने देश-विदेश से लाखों पर्यटक यहां आते हैं।
यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची और भूकंप की त्रासदी
इस प्राचीन धरोहर के ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूनेस्को (UNESCO) ने वर्ष 1991 में प्रंबानन मंदिर को 'विश्व धरोहर स्थल' (World Heritage Site) घोषित किया था। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसके संरक्षण और मूल स्वरूप को बनाए रखने के प्रयास तेज हुए। हालांकि, मई 2006 में जावा द्वीप पर आए एक अत्यंत तीव्र भूकंप के कारण इस मंदिर संरचना को भारी नुकसान पहुंचा था। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की देखरेख में कई वर्षों तक यहां कड़े पुनर्निर्माण और वैज्ञानिक संरक्षण का काम चलाया गया, जिसके बाद इसे दोबारा पूरी तरह पर्यटकों के लिए खोला जा सका।
पीएम मोदी के इस दौरे का वैश्विक संदेश और 'सभ्यतागत कूटनीति'
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस यात्रा को केवल एक सामान्य धार्मिक स्थल का दौरा कहना गलत होगा। भू-राजनीतिक (Geopolitical) नजरिए से इसके पीछे गहरे मायने छिपे हैं:
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वसुधैव कुटुंबकम का संदेश: वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में, जहां दुनिया के कई हिस्सों में धार्मिक और नस्लीय पहचान को लेकर गंभीर संघर्ष चल रहे हैं, वहां एक सबसे बड़े मुस्लिम राष्ट्र में हिंदू मंदिर का यह दौरा पूरी दुनिया को 'वसुधैव कुटुंबकम' (पूरी दुनिया एक परिवार है) का मजबूत संदेश देता है।
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सभ्यतागत कूटनीति (Civilizational Diplomacy): यह दौरा भारत और इंडोनेशिया के बीच 'सभ्यतागत कूटनीति' को नई दिशा देगा। दोनों देशों के बीच व्यापारिक और समुद्री संबंधों के साथ-साथ हजारों साल पुराने गहरे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंध हैं, जो भौगोलिक दूरियों के बाद भी दोनों मुल्कों को आपस में जोड़ते हैं।
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सॉफ्ट पावर का प्रदर्शन: यह यात्रा दुनिया को यह भी दिखाएगी कि प्राचीन भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्य किस तरह वैश्विक स्तर पर आज भी बेहद सम्मानित और सुरक्षित हैं, और किस तरह दो अलग-अलग धार्मिक संस्कृतियां एक-दूसरे की विरोधी नहीं बल्कि पूरक बनकर रह सकती हैं।