Corporate Layoffs Pain: 14 साल की कॉर्पोरेट नौकरी के बाद 56 की उम्र में बने डिलीवरी पार्टनर, सोशल मीडिया पर रो पड़े लोग

आजकल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लिंक्डइन (LinkedIn) पर नोएडा के रहने वाले 56 वर्षीय मनोज की एक बेहद भावुक कहानी तेजी से वायरल हो रही है। अपनी जिंदगी के 14 कीमती साल एक बड़ी कॉर्पोरेट कंपनी को देने के बाद मनोज को अचानक ले-ऑफ (नौकरी से निकालना) का शिकार होना पड़ा। आज वह अपना और अपने परिवार का पेट पालने के लिए सड़कों पर डिलीवरी पार्टनर के रूप में काम करने को मजबूर हैं। उनकी इस आपबीती ने भारतीय जॉब मार्केट में उम्रदराज लोगों के रोजगार और कॉर्पोरेट कंपनियों के रवैये पर एक गंभीर बहस छेड़ दी है।
एक नॉर्मल डिलीवरी और खुल गया 14 साल की नौकरी का दर्द
यह पूरी कहानी तब दुनिया के सामने आई जब सोशल आंत्रप्रेन्योर किरण वर्मा ने नोएडा में एक जरूरी दस्तावेज भेजने के लिए 'पॉर्टर' (Porter) ऐप से एक डिलीवरी पार्टनर बुक किया। किरण को लगा कि यह एक आम डिलीवरी होगी, लेकिन जब उनके सामने सफेद बालों वाले 56 साल के बुजुर्ग मनोज आए, तो वह हैरान रह गए। सीढ़ियां चढ़ने में असमर्थ मनोज के चेहरे पर एक अजीब सी बेबसी थी। बातचीत के दौरान मनोज ने मुस्कुराते हुए किरण से कहा, "बेटा, आज दिनभर कोई काम ही नहीं था, बस इसी ऑर्डर के इंतजार में बैठा था।"
टाटा एआईए में थे एडमिन, 2023 की मंदी में छिनी नौकरी
किरण वर्मा की लिंक्डइन पोस्ट के मुताबिक, मनोज ने बताया कि वह साल 2023 तक मशहूर कंपनी 'टाटा एआईए लाइफ इंश्योरेंस' (Tata AIA Life Insurance) के एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट में अच्छी पोस्ट पर कार्यरत थे। उन्होंने वहां लगातार 14 साल तक अपनी वफादार सेवाएं दी थीं। लेकिन 2023 में जब कॉर्पोरेट जगत में ले-ऑफ की आंधी आई, तो उन्हें अचानक बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। नौकरी जाने के बाद मनोज ने दर्जनों कंपनियों में इंटरव्यू दिए, लेकिन 56 साल की उम्र और उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के कारण किसी भी कंपनी ने उन्हें काम पर रखने में दिलचस्पी नहीं दिखाई।
"हम तो सब्जी के करी पत्ते जैसे हैं…" कॉर्पोरेट की कड़वी सच्चाई
जब किरण ने उनसे अचानक नौकरी जाने के अनुभव के बारे में पूछा, तो मनोज ने एक ऐसा उदाहरण दिया जो हर नौकरीपेशा इंसान के दिल को छू गया। मनोज ने पुराने और वफादार कर्मचारियों की तुलना करी पत्ते से करते हुए कहा, "बेटा, जब सब्जी बनाते हैं तो करी पत्ता स्वाद के लिए सबसे पहले डालते हैं, पर जब सब्जी पक कर तैयार हो जाती है और लोग उसे खाते हैं, तो सबसे पहले उस करी पत्ते को ही बाहर निकालकर फेंक देते हैं।" उनका इशारा साफ था कि कंपनियां अनुभवी लोगों का इस्तेमाल तो भरपूर करती हैं, लेकिन संकट आने पर सबसे पहले उन्हें ही दूध की मक्खी की तरह निकाल देती हैं।
सोशल मीडिया पर गिग इकॉनमी और एजिसम (Ageism) पर छिड़ी बहस
किरण वर्मा की यह पोस्ट देखते ही देखते लिंक्डइन पर वायरल हो गई, जिस पर हजारों प्रोफेशनल्स, एचआर और रिक्रूटर्स अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। इस मामले पर खुद 'पॉर्टर' कंपनी ने भी कमेंट कर अपने डिलीवरी पार्टनर मनोज के जज्बे और मेहनत की तारीफ की है। सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि यह कहानी भारत के जॉब मार्केट का सबसे क्रूर और असली चेहरा दिखाती है, जहाँ एक उम्र के बाद अनुभवी प्रोफेशनल्स के लिए कोई जगह नहीं बचती और मजबूरन उन्हें गिग इकॉनमी (Gig Economy) यानी डिलीवरी और ड्राइविंग जैसे कामों में पसीना बहाना पड़ता है।