खेल

संजू का मतलब ही बलि का बकरा है’: पार्थिव पटेल ने सिलेक्टर्स पर बोला बड़ा हमला, वैभव सूर्यवंशी को लेकर भी कही बड़ी बात

भारतीय क्रिकेट में चयनकर्ताओं (Selectors) के फैसलों पर हमेशा से बहस होती आई है, लेकिन इस बार पूर्व विकेटकीपर-बल्लेबाज पार्थिव पटेल ने जो कुछ कहा है, उसने खलबली मचा दी है। संजू सैमसन के साथ हो रहे कथित अन्याय पर पार्थिव ने सीधे तौर पर चयन समिति को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि टीम मैनेजमेंट की नजर में संजू का मतलब ही 'बलि का बकरा' बन गया है, जो किसी भी गलत फैसले का खामियाजा भुगतने के लिए तैयार रहता है। पार्थिव की इस बेबाक टिप्पणी ने सोशल मीडिया पर फैंस के गुस्से को और हवा दे दी है।

'संजू को बलि का बकरा बनाना बंद करें'

पार्थिव पटेल का मानना है कि संजू सैमसन को टीम में शामिल करने और फिर अचानक बाहर करने का कोई ठोस आधार नहीं होता। उन्होंने कहा कि संजू को बार-बार प्लेइंग इलेवन से बाहर करना उनके मनोबल को तोड़ रहा है। सिलेक्टर्स की आलोचना करते हुए पार्थिव ने पूछा कि आखिर किस आधार पर संजू को बार-बार ड्रॉप किया जाता है, जबकि अन्य खिलाड़ियों को लगातार मौके मिलते रहते हैं। पार्थिव ने इसे भारतीय क्रिकेट की एक पुरानी बीमारी करार दिया है, जहां टैलेंटेड खिलाड़ियों को सिर्फ एडजस्टमेंट के नाम पर दरकिनार कर दिया जाता है।

वैभव सूर्यवंशी पर भी बरसे पार्थिव

इस विवाद में पार्थिव ने युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि किसी भी युवा खिलाड़ी को टीम में शामिल करने से पहले यह देखना जरूरी है कि क्या वह उस स्तर के दबाव को झेलने के लिए तैयार है। पार्थिव ने संकेत दिया कि बिना किसी मजबूत घरेलू प्रदर्शन के या जल्दीबाजी में किए गए चयन न केवल खिलाड़ी का भविष्य खराब करते हैं, बल्कि टीम के संतुलन पर भी भारी पड़ते हैं। उन्होंने चयनकर्ताओं को नसीहत दी कि युवाओं को लाने का उत्साह ठीक है, लेकिन उसका सही समय और सही तरीका होना बेहद जरूरी है।

सिलेक्टर्स की कार्यप्रणाली पर उठ रहे बड़े सवाल

पार्थिव पटेल की यह टिप्पणी सीधे तौर पर सिलेक्टर्स की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है। भारतीय टीम में पारदर्शिता और चयन की नीति को लेकर जो सवाल उठ रहे हैं, वे इस बात की ओर इशारा करते हैं कि बोर्ड के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है। फैंस भी अब पार्थिव के समर्थन में उतर आए हैं और सोशल मीडिया पर सिलेक्टर्स के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। देखना यह है कि क्या पार्थिव की इस तीखी आलोचना के बाद बीसीसीआई या सिलेक्शन कमेटी की ओर से कोई प्रतिक्रिया आती है, या फिर संजू सैमसन का यह सफर इसी तरह संघर्षों भरा चलता रहेगा।

Back to top button