समंदर में फंसा 2000 LGBTQ+ यात्रियों से भरा क्रूज! तुर्किए के बाद मिस्र ने भी एंट्री देने से किया इनकार

ग्रीस की राजधानी एथेंस से लेकर इटली के ऐतिहासिक शहर वेनिस तक की 10 दिवसीय यात्रा पर निकला एक आलीशान क्रूज शिप इस वक्त गहरे अंतरराष्ट्रीय विवाद और संकट में घिर गया है। लगभग 2000 समलैंगिक (LGBTQ+) यात्रियों को लेकर जा रहे 'स्कारलेट लेडी' (Scarlet Lady) नामक इस विशालकाय जहाज को दो प्रमुख तटीय देशों ने अपने यहां शरण देने और बंदरगाह पर लंगर डालने की इजाजत देने से पूरी तरह इनकार कर दिया है। पहले तुर्किए (Turkey) सरकार ने सामाजिक मूल्यों की दुहाई देकर इस क्रूज को रोका और अब मिस्र (Egypt) ने भी अपने क्षेत्र में यात्रियों के कदम रखने पर पाबंदी लगा दी है। इसके बाद से यह क्रूज शिप बीच समंदर में किसी सुरक्षित ठिकाने और वैकल्पिक बंदरगाह की तलाश में दर-दर भटकने को मजबूर है।
एथेंस से वेनिस का सफर बना मुसीबत: मशहूर ब्रॉडवे स्टार पैटी लुपोन ने बयां किया दर्द
सीएनएन (CNN) की एक विशेष रिपोर्ट के अनुसार, इस हाई-प्रोफाइल क्रूज यात्रा पर ब्रॉडवे की बेहद लोकप्रिय और पुरस्कार विजेता कलाकार पैटी लुपोन (Patti LuPone) भी अपनी टीम के साथ सवार हैं। तुर्किए और मिस्र द्वारा लगाए गए इस अचानक प्रतिबंध पर उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए अपनी तीव्र नाराजगी और दुख व्यक्त किया है। पैटी लुपोन ने क्रूज के भीतर से लाइव अपडेट साझा करते हुए बताया कि तुर्किए में प्रवेश न मिलने से दिल टूटने के बाद पूरा क्रूज स्टाफ और यात्री मिस्र की तरफ उम्मीद लगाए बढ़ रहे थे। लेकिन अगली ही सुबह केबिन में एक आधिकारिक घोषणा की गई कि मिस्र के अधिकारियों ने भी अलेक्जेंड्रिया बंदरगाह पर जहाज को रुकने की अनुमति देने से मना कर दिया है। फिलहाल यात्रियों को यह भी स्पष्ट नहीं है कि समंदर में उनका अगला पड़ाव कहां होने वाला है।
चार्टर कंपनी अटलांटिस इवेंट्स हैरान: सीईओ बोले—पिछली बार काहिरा में नहीं हुई थी कोई परेशानी
इस विशिष्ट यात्रा का खाका तैयार करने वाली वैश्विक इवेंट मैनेजमेंट कंपनी 'अटलांटिस इवेंट्स' (Atlantis Events) ने मिस्र के इस औचक फैसले पर गहरी हैरानी और निराशा जताई है। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) रिच कैंपबेल ने एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि वे इस प्रशासनिक निषेध से पूरी तरह स्तब्ध हैं, क्योंकि इससे पहले जब उनका क्रूज काहिरा और अलेक्जेंड्रिया पहुंचा था, तब स्थानीय प्रशासन की ओर से कोई बाधा उत्पन्न नहीं की गई थी। कैंपबेल ने कहा कि अटलांटिस और वर्जिन वॉयजेज ने अलेक्जेंड्रिया में अपने पूर्व-निर्धारित सांस्कृतिक कार्यक्रमों को आयोजित करने की हर संभव कोशिश की, लेकिन इसे सुरक्षा और नियमों का हवाला देकर अंतिम समय पर रोक दिया गया, जो पूरे वैश्विक एलजीबीटीक्यू+ समुदाय के लिए बेहद निराशाजनक है।
क्या है 'स्कारलेट लेडी' का पूरा विवाद? 'वर्जिन वॉयजेज' के लक्जरी क्रूज पर क्यों भड़के देश
वास्तव में, यह पूरा विवाद सांस्कृतिक और वैधानिक प्राथमिकताओं से जुड़ा है। 'स्कारलेट लेडी' क्रूज का संचालन वैश्विक स्तर पर प्रसिद्ध 'वर्जिन वॉयजेज' (Virgin Voyages) द्वारा किया जाता है। दुनिया भर में बड़े पैमाने पर LGBTQ+ पर्यटन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करने वाली ट्रेवल फर्म अटलांटिस इवेंट्स ने इस क्रूज को 10 दिनों के लिए चार्टर किया था। तय शिड्यूल के मुताबिक, जहाज को तुर्किए के दो बड़े और व्यस्त बंदरगाहों (Aydın Kuşadası) पर रुकना था। लेकिन जैसे ही तुर्किए प्रशासन को इस विशिष्ट चार्टर ग्रुप की जानकारी मिली, उन्होंने तुरंत इसे अपनी सीमा से बाहर रखने का फरमान जारी कर दिया। मिस्र के अधिकारियों ने अभी तक कोई लिखित सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन क्रूज के कैप्टन को सीधे तौर पर नो-एंट्री का संदेश दे दिया गया है।
तुर्किए सरकार का आधिकारिक रुख: 'यह हमारी जनता और सामाजिक ताने-बाने के खिलाफ'
तुर्किए के आयडिन प्रांत के गवर्नर कार्यालय (Aydın Valiliği) ने सोशल मीडिया पर एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर अपना रुख पूरी तरह साफ कर दिया है। तुर्किए के प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि यह क्रूज एक ऐसे विशेष समूह द्वारा किराए पर लिया गया है, जिसका व्यवहार और सामाजिक आचरण तुर्किए समाज की मूल संरचना, पारंपरिक पारिवारिक ढाँचे और नैतिक मूल्यों से बिल्कुल मेल नहीं खाता है। जैसे ही इस जहाज के कुशादासी बंदरगाह पर आने की खबर फैली, स्थानीय जनता और संगठनों के बीच गहरी चिंता और विरोध के स्वर उभरने लगे थे, जिसके कारण कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए इसे प्रतिबंधित किया गया।
अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि मिस्र और तुर्किए दोनों ही देशों में समलैंगिकता को लेकर बेहद कड़े और रूढ़िवादी कानून लागू हैं, जिसके कारण यह स्थिति पैदा हुई है। इससे पहले मार्च में भी तुर्किए के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगान ने राजधानी में होने वाली वार्षिक प्राइड परेड पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था, और विरोध करने वाले दर्जनों प्रदर्शनकारियों को जेल में डाल दिया गया था।