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सफर में उल्टी आना कोई बीमारी नहीं बल्कि दिमाग का भ्रम है! एक्सपर्ट्स से जानें मोशन सिकनेस का असली कारण और इसे रोकने के 9 आसान तरीके

Motion Sickness Causes and Prevention: अक्सर लोगों को लगता है कि सफर के दौरान उल्टी आना, जी मिचलाना या सिर घूमना किसी गंभीर बीमारी का संकेत है. लेकिन चिकित्सा विज्ञान और न्यूरोलॉजी एक्सपर्ट्स के अनुसार, यह कोई बीमारी नहीं बल्कि हमारे शरीर के अंगों के बीच तालमेल की कमी का परिणाम है, जिसे मेडिकल भाषा में मोशन सिकनेस (Motion Sickness) कहा जाता है. आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया का हर तीसरा व्यक्ति कभी न कभी इस असहज स्थिति से प्रभावित होता है. चाहे आप कार, बस, ट्रेन में हों या फिर हवाई और समुद्री यात्रा पर—यह समस्या किसी के साथ भी हो सकती है.

क्यों आता है चक्कर? समझिए इसके पीछे का वैज्ञानिक कारण

जब हम किसी चलते हुए वाहन में होते हैं, तो हमारे शरीर के अलग-अलग हिस्से दिमाग को विरोधाभासी संकेत (Conflicting Signals) भेजने लगते हैं:

  • कान का बैलेंस सिस्टम: हमारे कान के अंदर मौजूद वेस्टिबुलर सिस्टम (संतुलन तंत्र) दिमाग को बताता है कि शरीर गति में है.

  • आँखों का संदेश: वहीं दूसरी ओर, हमारी आँखें (जो अक्सर गाड़ी के अंदर की स्थिर चीज़ों या मोबाइल को देखती हैं) दिमाग को बताती हैं कि हम स्थिर बैठे हैं.

इन अलग-अलग और उलझाने वाले संकेतों के कारण हमारा दिमाग पूरी तरह भ्रमित हो जाता है और शरीर के संतुलन तंत्र में हलचल मच जाती है, जिससे अचानक सिरदर्द, घबराहट और उल्टी होने लगती है.

एक्सपर्ट्स की राय: दिमाग को क्यों लगता है कि शरीर में ‘जहर’ फैल गया है?

डॉ. मोहसिन वली (सीनियर कंसल्टेंट, सर गंगाराम अस्पताल):

"जब आप चलती गाड़ी में नीचे देखते हैं या कोई किताब पढ़ते हैं, तो आँखें और कान दिमाग को अलग-अलग संदेश भेजते हैं. इस उलझन से दिमाग को लगता है कि आपने गलती से कोई जहरीली चीज़ खा ली है. इस काल्पनिक जहर के असर को खत्म करने और शरीर को सुरक्षित रखने के लिए दिमाग तुरंत उल्टी करने का निर्देश देता है, ताकि वह तत्व बाहर निकल सके."

डॉ. मंजरी त्रिपाठी (न्यूरोलॉजी विशेषज्ञ, एम्स):

"मोशन सिकनेस का सीधा संबंध हमारे कान के अंदर मौजूद वेस्टिबुलर सिस्टम से है. जब सफर के दौरान कान, आँखें और शरीर के सेंसर (रिसेप्टर्स) दिमाग को अलग-अलग जानकारी भेजते हैं, तो तालमेल की इस कमी से दिमाग के खास हिस्से (ब्रेन स्टेम और हाइपोथैलेमस) उत्तेजित हो जाते हैं. इसी वजह से चक्कर और मतली महसूस होती है."

सफर में उल्टी और चक्कर रोकने के लिए क्या करें और क्या न करें?

यदि आप भी सफर के दौरान इस समस्या से परेशान रहते हैं, तो इन 9 जरूरी बातों और सावधानियों का ध्यान रखकर अपनी यात्रा को सुखद बना सकते हैं:

  1. क्षितिज (Horizon) की ओर देखें: गाड़ी में नीचे देखने के बजाय खिड़की से बाहर दूर सामने की ओर देखें. ऐसा करने से आँखों और कानों को एक जैसे संकेत मिलते हैं, जिससे दिमाग का भ्रम दूर होता है.

  2. सीट का सही चुनाव: हमेशा वाहन में सामने की ओर मुंह करके बैठें. कार या बस में आगे की सीट (फ्रंट सीट) चुनना सबसे बेस्ट होता है क्योंकि वहाँ से बाहर का नज़ारा साफ़ दिखता है.

  3. मोबाइल और किताब से दूरी: चलती गाड़ी में फोन चलाने, लैपटॉप पर काम करने या किताब पढ़ने से पूरी तरह बचें. यह आँखों और दिमाग के तालमेल को बिगाड़ देता है.

  4. भोजन का संतुलन: सफर पर निकलने से ठीक पहले बहुत भारी, तीखा या तैलीय (Oily) खाना न खाएं. हालांकि, बिल्कुल खाली पेट भी न रहें; हल्का नाश्ता या स्नैक्स लेना फायदेमंद रहता है.

  5. शरीर को स्थिर रखें: यात्रा के दौरान कोशिश करें कि आपके सिर, कंधे और कमर की हलचल कम से कम हो. अपनी पोजीशन को स्थिर बनाए रखें.

  6. सुखद संगीत का सहारा: सफर में अपना मनपसंद और हल्का संगीत सुनें. रिसर्च के अनुसार, अच्छा संगीत ध्यान भटकाने में मदद करता है और मतली की भावना को कम करता है.

  7. सोने की कोशिश न करें: चलती गाड़ी में जबरदस्ती सोने की कोशिश से बचें, क्योंकि सोते समय शरीर का संतुलन बिगड़ने पर अचानक उल्टी की संभावना बढ़ सकती है.

  8. धूम्रपान से परहेज: सफर के दौरान या उससे ठीक पहले सिगरेट या किसी भी तरह का धूम्रपान (निकोटीन) न करें, इससे तबीयत और ज्यादा बिगड़ सकती है.

  9. डॉक्टर की सलाह और दवा: यदि आपको मोशन सिकनेस की बहुत ज्यादा गंभीर समस्या है, तो यात्रा शुरू करने से आधे घंटे पहले डॉक्टर द्वारा सुझाई गई उल्टी रोकने की सुरक्षित दवा (Anti-emetic) जरूर ले लें.

 

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