Ayodhya Ram Mandir Update: चढ़ावे की चोरी के बाद अयोध्या राम मंदिर में बदला दान का ट्रेंड; दान पेटियों से गायब हुए सोने-चांदी के गहने

उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित भव्य राम मंदिर के प्रति देश-दुनिया के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और भक्ति अटूट है। लेकिन हाल ही में मंदिर परिसर में चढ़ावे की चोरी का सनसनीखेज मामला सामने आने के बाद अब भक्तों के रुख में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की जागरूकता और सावधानी काफी बढ़ गई है। नतीजतन, मंदिर की दान पेटियों (Donation Boxes) में अब सोने-चांदी के आभूषण और कीमती सिक्के न के बराबर दिखाई दे रहे हैं।
चढ़ावा गिनने की प्रक्रिया में शामिल मंदिर के एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर इस पूरे घटनाक्रम और स्टाफ की बदलती परिस्थितियों को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।
जागरूक हुए भक्त, बदला दान करने का तरीका
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, चंदा चोरी की घटना उजागर होने के बाद ऐसा नहीं है कि श्रद्धालुओं ने आस्था के वशीभूत होकर दान देना बंद कर दिया है, बल्कि उनके दान करने का तरीका पूरी तरह बदल गया है।
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सोने-चांदी के चढ़ावे में भारी कमी: पहले भक्त बड़ी ही भावुकता और श्रद्धा के साथ दान पेटियों में सोने के हार, अंगूठियां और चांदी के कीमती सिक्के डाल दिया करते थे। छंटाई (Sorting) प्रक्रिया के दौरान जब पेटियां खाली की जाती थीं, तो इन्हें एक अलग बॉक्स में सुरक्षित रखा जाता था।
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चोरी का मुख्य जरिया: सूत्रों का दावा है कि गिनती और छंटाई के इसी चरण के दौरान आरोपी कर्मचारी बड़ी चालाकी से गहनों पर हाथ साफ कर देते थे। लेकिन अब चोरी की बात सार्वजनिक होने के बाद भक्तों ने दान पेटियों में कीमती सामान डालना बंद कर दिया है। हालांकि, सीधे आधिकारिक काउंटरों पर रसीद कटवाकर किए जाने वाले दान का आंकड़ा अलग हो सकता है।
23 कर्मचारियों के इस्तीफे के बाद 13 कर्मियों पर बढ़ा काम का बोझ
राम मंदिर में केवल दान का ट्रेंड ही नहीं बदला है, बल्कि वहां काम करने वाले कर्मचारियों की आंतरिक स्थिति भी काफी तनावपूर्ण बनी हुई है।
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कर्मचारियों की कमी: मंदिर से एक साथ 23 कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने के बाद से अभी तक कोई नई भर्ती (New Hiring) नहीं की गई है।
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बढ़े काम के घंटे: पहले जहां काम को 6-6 घंटे की दो अलग-अलग शिफ्टों में बांटा गया था, वहीं अब बाकी बचे केवल 13 कर्मचारियों को सुबह 10 बजे से शाम 7 बजे की एक ही लंबी शिफ्ट में बुलाया जा रहा है।
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वेतन में कोई बढ़ोतरी नहीं: काम का दबाव और घंटे दोगुने होने के बावजूद कर्मचारियों की सैलरी बढ़ाने को लेकर प्रबंधन में कोई चर्चा नहीं हुई है।
'थर्ड-पार्टी हायरिंग' और श्रमिकों के शोषण के आरोप
नौकरी छोड़ने वाले एक पूर्व कर्मचारी के अनुसार, यहां हालात थर्ड-पार्टी वेंडर के जरिए श्रमिकों के शोषण जैसे बने हुए हैं। कर्मचारियों को कोई साप्ताहिक या आधिकारिक छुट्टी नहीं मिलती है और वेतन भी केवल उन्हीं दिनों का काटा जाता है जब उन्होंने वास्तव में बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज कराई हो।
यहां काम करने वाले कई युवा छात्र हैं जो पार्ट-टाइम काम के साथ अपनी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी कर रहे हैं। दिहाड़ी (Daily Wage) के स्तर पर फुल-टाइम काम का अत्यधिक दबाव होने के कारण युवाओं के लिए यहां टिकना मुश्किल हो रहा है, जिससे मंदिर में स्टाफ टर्नओवर (Staff Turnover) यानी नौकरी छोड़ने की दर हमेशा ऊंची रहती है।
'राष्ट्रपति शासन' जैसी पाबंदियां और समाज के चुभते सवाल
चढ़ावा गिनने की टीम में शामिल एक वर्तमान कर्मचारी ने कार्यस्थल के माहौल की तुलना 'राष्ट्रपति शासन' से करते हुए कहा कि वहां की सख्त पाबंदियों और सुरक्षा जांच के बाद भी मानसिक शांति नहीं मिलती।
चोरी का मामला सामने आने के बाद से जब ये कर्मचारी अपने घर लौटते हैं, तो परिवार के सदस्य, रिश्तेदार और पड़ोसी भी उन्हें शक की निगाह से देखते हैं और तरह-तरह के चुभते हुए सवाल पूछते हैं। यहाँ तक कि आरोपी के पुराने साथियों ने भी बदनामी के डर से अब इन कर्मचारियों से पूरी तरह दूरी बना ली है, जिससे वे भारी सामाजिक और मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं।