कब से शुरू हो रहा है आस्था का महापर्व सावन? नोट कर लें पहले दिन की तारीख और जलाभिषेक का सबसे शुभ मुहूर्त

हिंदू धर्म में सबसे पवित्र और देवों के देव महादेव की आराधना के विशेष महीने 'सावन' (Shravan Month) को लेकर शिव भक्तों का इंतजार अब खत्म होने वाला है। वर्ष 2026 में सावन के महीने की शुरुआत बेहद अद्भुत और शुभ संयोगों के साथ हो रही है। इस साल सावन का पहला दिन भगवान शिव की कृपा पाने के लिए बेहद खास माना जा रहा है। अगर आप भी इस पावन महीने में भोलेनाथ का जलाभिषेक करने और कांवड़ यात्रा की तैयारी कर रहे हैं, तो आपके लिए पहले दिन की सही तारीख और पूजा का सटीक समय जानना बेहद जरूरी है।
किस तारीख से शुरू हो रहा है सावन 2026 का पावन महीना?
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष सावन (श्रावण) का महीना 31 जुलाई 2026, दिन शुक्रवार से शुरू हो रहा है। पूर्णिमांत कैलेंडर का पालन करने वाले उत्तर भारत के राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर में शिव भक्त इसी दिन से सावन के पवित्र नियमों और व्रतों की शुरुआत करेंगे। सावन के पहले ही दिन से शिवालयों में 'बम-बम भोले' और 'हर-हर महादेव' के जयकारे गूंजने लगेंगे। इस बार सावन का महीना बेहद खास रहने वाला है क्योंकि इसमें कई दुर्लभ योग बन रहे हैं जो भक्तों की हर मनोकामना पूरी करेंगे।
नोट कर लें पहले दिन जलाभिषेक का सबसे शुभ समय और मुहूर्त
सावन के पहले दिन यानी 31 जुलाई को भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए सुबह का समय सबसे उत्तम माना गया है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस दिन सुबह 05:42 बजे से लेकर सुबह 08:24 बजे तक पूजा और जल अर्पण करने का सबसे पहला और श्रेष्ठ मुहूर्त रहेगा। इसके बाद दोपहर में चर और लाभ के चौघड़िया मुहूर्त में भी शिव आराधना की जा सकती है। यदि आप शाम के समय पूजा करना चाहते हैं, तो प्रदोष काल में शाम 06:52 बजे से रात 08:58 बजे के बीच महादेव और माता पार्वती की संयुक्त पूजा करने से जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।
कैसे करें सावन के पहले दिन भोलेनाथ की पूजा?
सावन के पहले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर साफ कपड़े धारण करें। इसके बाद अपने नजदीकी शिव मंदिर में जाएं या घर के मंदिर में ही शिवलिंग के सामने व्रत का संकल्प लें। शिवजी को जल, गंगाजल, कच्चा दूध, दही, शहद और घी से पंचामृत स्नान कराएं। इसके बाद महादेव के सबसे प्रिय बेलपत्र, भांग, धतूरा, शमी के पत्ते, श्वेत फूल और चंदन का तिलक लगाएं। पूजा के अंत में शिव चालीसा का पाठ करें और घी के दीपक से आरती उतारें। ध्यान रहे कि शिवलिंग पर कभी भी तुलसी की पत्ती, केतकी का फूल और सिंदूर न चढ़ाएं।
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सावन की शुरुआत को देखते हुए वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर, उज्जैन के महाकालेश्वर, झारखंड के बैद्यनाथ धाम और देवघर सहित देश भर के सभी प्रमुख शिवालयों में प्रशासन ने सुरक्षा और वीआईपी दर्शन के कड़े इंतजाम पूरे कर लिए हैं। स्थानीय प्रशासन और मंदिर समितियों ने कांवड़ियों के मार्ग और पेयजल की व्यवस्था को दुरुस्त कर दिया है ताकि उत्तर प्रदेश, बिहार और उत्तराखंड के रूटों पर श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। एआई सर्च और आधुनिक जनरेटिव इंजन (GEO) के मुताबिक, इस बार सावन के दौरान डिजिटल दर्शन और लाइव आरती की खोज में भारी उछाल आने की उम्मीद है।