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Monsoon UTI Prevention & Symptoms: बरसात में यूरिन इंफेक्शन (UTI) को न करें हल्के में लेने की भूल, लापरवाही से किडनी तक पहुंच सकता है संक्रमण; जानें कारण और बचाव!

बरसात का सुहावना मौसम अपने साथ जितनी राहत लेकर आता है, उतनी ही स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां भी खड़ी करता है। मानसून के इस दौर में होने वाली एक बेहद सामान्य समस्या यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन यानी यूटीआई (UTI – Urine Infection) को कई बार लोग नजरअंदाज कर देते हैं, जो आगे चलकर बहुत भारी पड़ सकता है।

शुरुआत में यह समस्या पेशाब करते समय हल्की जलन, बार-बार टॉयलेट जाने की इच्छा होना या पेट के निचले हिस्से में दर्द तक ही सीमित लगती है। लेकिन यदि समय रहते इसका सही डॉक्टरी इलाज न कराया जाए, तो यह साधारण सा दिखने वाला संक्रमण ब्लैडर से ऊपर उठकर सीधे आपकी किडनी (Kidney Infection) को गंभीर रूप से डैमेज कर सकता है। खासकर कम उम्र की बच्चियों और महिलाओं के मामले में इस बीमारी को लेकर विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है। आइए देश के बड़े डॉक्टरों और विशेषज्ञों से समझते हैं कि मानसून में यूटीआई क्यों बढ़ जाता है, इसके लक्षण क्या हैं और इससे कैसे बचा जा सकता है:

बरसात के मौसम में क्यों बढ़ जाते हैं UTI के मामले? (Key Causes)

अक्सर लोग मानते हैं कि बारिश के पानी में भीगने से यूरिन इंफेक्शन होता है, जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है। डॉक्टरों के अनुसार, संक्रमण की असली वजह इस मौसम में पनपने वाली कुछ आदतें और परिस्थितियां हैं:

  • लंबे समय तक गीले कपड़े पहनना: डॉ. मनीषा अरोड़ा (डायरेक्टर इंटरनल मेडिसिन, सीके बिरला हॉस्पिटल) के मुताबिक, मानसून के दौरान बारिश में भीगने के बाद या पसीने की वजह से लंबे समय तक गीले कपड़ों या अंडरगारमेंट्स में रहना बैक्टीरिया के पनपने के लिए सबसे अनुकूल माहौल (नमी और गर्माहट) बनाता है।

  • कम पानी पीने की आदत: डॉ. सी. एस. मिथ्रयी (सीनियर कंसल्टेंट, ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी) का कहना है कि बारिश के मौसम में तापमान थोड़ा कम होने से लोगों को प्यास कम लगती है। पानी कम पीने के कारण शरीर में पेशाब (Urine) कम बनता है। नतीजतन, यूरिनरी ट्रैक्ट में मौजूद बैक्टीरिया फ्लश आउट नहीं हो पाते और वहीं टिककर अपनी संख्या बढ़ाने लगते हैं।

  • मुख्य जिम्मेदार बैक्टीरिया: डॉ. विक्रम कालरा (प्रिंसिपल डायरेक्टर, नेफ्रोलॉजी एवं किडनी ट्रांसप्लांट, आकाश हेल्थकेयर) के अनुसार, अधिकांश यूटीआई मामलों के लिए ई. कोलाई (E. coli) नामक बैक्टीरिया मुख्य रूप से जिम्मेदार होता है, जो गंदगी और नमी के कारण तेजी से शरीर में प्रवेश कर जाता है।

शुरुआती लक्षणों से लेकर किडनी इंफेक्शन तक का सफर (UTI Symptoms)

यूटीआई के लक्षणों को दो चरणों में समझा जा सकता है। पहला शुरुआती संक्रमण और दूसरा गंभीर स्थिति जब इंफेक्शन किडनी तक पहुंच जाता है:

शुरुआती सामान्य लक्षण:

  • पेशाब करते समय तेज जलन या दर्द होना।

  • बार-बार पेशाब आने का अहसास होना, लेकिन खुलकर न आना।

  • यूरिन से अत्यधिक तीखी बदबू आना।

  • यूरिन का रंग धुंधला (Cloudy) होना या कभी-कभी उसमें खून के अंश (Hematuria) दिखना।

  • पेट के निचले हिस्से या पेल्विक एरिया में लगातार हल्का दर्द रहना।

किडनी में संक्रमण फैलने के गंभीर लक्षण:

यदि लापरवाही के कारण इंफेक्शन किडनी तक पहुंच जाता है, तो शरीर ये अलार्म बजाने लगता है:

  • अचानक तेज बुखार आना और शरीर का कांपना (ठंड लगना)।

  • पीठ के निचले हिस्से या कमर में एक तरफ असहनीय तेज दर्द होना।

  • लगातार मतली (जी मिचलाना) या उल्टियां होना।

  • अत्यधिक कमजोरी, चक्कर आना और थकान महसूस होना।

इन्हें है सबसे ज्यादा खतरा:

गर्भवती महिलाओं (Pregnant Women), डायबिटीज के मरीजों, बुजुर्गों और जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) कमजोर है, उन्हें यूरिन इंफेक्शन के लक्षण दिखते ही तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए, क्योंकि इनमें जटिलताएं बहुत तेजी से बढ़ती हैं।

सही समय पर जांच और इलाज है जरूरी

डॉक्टरों के अनुसार, अच्छी बात यह है कि शुरुआती अवस्था में अधिकांश यूटीआई का इलाज बेहद आसान और सटीक होता है।

  • लैब टेस्ट: संक्रमण की पुष्टि के लिए डॉक्टर सबसे पहले यूरिन रूटीन टेस्ट (Urine Routine) और यूरिन कल्चर (Urine Culture) टेस्ट करवाने की सलाह देते हैं। कल्चर टेस्ट से यह पता चलता है कि इंफेक्शन किस विशिष्ट बैक्टीरिया की वजह से हुआ है।

  • एंटीबायोटिक्स: टेस्ट रिपोर्ट के आधार पर डॉक्टर कुछ दिनों का एंटीबायोटिक (Antibiotics) कोर्स प्रिसक्राइब करते हैं। ध्यान रहे कि खुद से कोई भी दवा या पेनकिलर लेने की गलती बिल्कुल न करें और डॉक्टर द्वारा दिए गए एंटीबायोटिक के कोर्स को बीच में अधूरा न छोड़ें।

मानसून में यूटीआई से सुरक्षित रहने के 5 अचूक उपाय (Prevention Tips)

यदि आप बरसात के इस मौसम में यूरिन इंफेक्शन की परेशानी से कोसों दूर रहना चाहते हैं, तो इन 5 बातों का कड़ाई से पालन करें:

  1. भरपूर पानी पिएं (Hydration): प्यास न लगने पर भी दिनभर में कम से कम 8 से 10 गिलास (2-3 लीटर) पानी जरूर पिएं। जितना ज्यादा यूरिन पास होगा, बैक्टीरिया उतनी ही आसानी से शरीर से बाहर निकल जाएंगे।

  2. गीले कपड़ों को तुरंत बदलें: यदि आप बारिश में भीग गए हैं या वर्कआउट के कारण कपड़े पसीने से गीले हो गए हैं, तो बिना देर किए तुरंत नहाकर सूखे और साफ सूती (Cotton) कपड़े पहनें।

  3. पर्सनल हाइजीन का ध्यान रखें: वॉशरुम का इस्तेमाल करने के बाद हमेशा आगे से पीछे की ओर (Front to Back) सफाई करें, ताकि मल मार्ग के बैक्टीरिया यूरिनरी ट्रैक्ट तक न पहुंच सकें। सार्वजनिक शौचालयों का उपयोग करते समय अत्यधिक सावधानी बरतें।

  4. पेशाब को रोककर न रखें: जब भी टॉयलेट जाने की इच्छा हो, उसे दबाएं नहीं। लंबे समय तक यूरिन को ब्लैडर में रोककर रखने से बैक्टीरिया को बढ़ने का पूरा समय मिल जाता है।

  5. क्रैनबेरी जूस का सेवन: डॉक्टरों की सलाह पर आप क्रैनबेरी जूस (Cranberry Juice) या इसके सप्लीमेंट्स ले सकते हैं। क्रैनबेरी में मौजूद तत्व बैक्टीरिया को ब्लैडर की दीवारों पर चिपकने से रोकते हैं।

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