अग्नेश्वर महादेव मंदिर: एक गर्भगृह और दो शिवलिंगों का अद्भुत रहस्य

सावन के पावन महीने में भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक का विशेष महत्व होता है। इस वर्ष सावन 30 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान अगर आप किसी अति दुर्लभ और चमत्कारिक धाम के दर्शन की योजना बना रहे हैं, तो राजस्थान का एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू आपका मन मोह लेगा। यहां देलवाड़ा से लगभग 7 किलोमीटर दूर अरावली पर्वतमाला की सुरम्य और शांत वादियों के बीच स्थित है प्राचीन अग्नेश्वर महादेव मंदिर। इस मंदिर की सबसे बड़ी और अनोखी विशेषता यह है कि इसके मुख्य गर्भगृह में आमने-सामने दो शिवलिंग स्थापित हैं। केवल इतना ही नहीं, दोनों शिवलिंगों के साथ दो-दो शिव परिवार की दिव्य प्रतिमाएं भी विराजमान हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह अनूठी व्यवस्था शिव और शक्ति के परम मिलन एवं विशेष स्वरूप का प्रतीक मानी जाती है, जो इसे देश के सबसे विशिष्ट मंदिरों की श्रेणी में लाती है।
स्कंद पुराण में दर्ज है महिमा, महर्षि विश्वामित्र की रही तपोभूमि
अग्नेश्वर महादेव मंदिर की दिव्यता का उल्लेख पौराणिक ग्रंथ स्कंद पुराण में भी विस्तार से मिलता है। पौराणिक कथाओं और मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीराम के पूज्य गुरु महर्षि विश्वामित्र और आयुर्वेद के प्रवर्तक भगवान धन्वंतरि ने इसी पावन स्थल पर कठोर तपस्या की थी। ऋषि परंपरा से जुड़ी इस महान धरोहर के कारण यह धाम केवल आम शिवभक्तों के लिए ही नहीं, बल्कि सनातन आस्था और साधना में विश्वास रखने वालों के लिए भी बहुत बड़ा केंद्र है।
चमत्कारी जलकुंड का पानी गंगा जैसा पवित्र, चर्म रोगों से मुक्ति की मान्यता
मंदिर परिसर में बना एक ऐतिहासिक और पावन जलकुंड श्रद्धालुओं के लिए सबसे बड़े कौतूहल और श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं का कहना है कि इस कुंड से चाहे जितना भी पानी निकाल लिया जाए, इसका जल कभी कम या सूखा नहीं होता। इसे एक दिव्य चमत्कार माना जाता है। मान्यता यह भी है कि इस कुंड का जल मां गंगा के जल के समान ही पवित्र है। दूर-दूर से आने वाले भक्त इस जल को पात्रों में भरकर अपने घर ले जाते हैं। ऐसी अटूट आस्था है कि इस जल में स्नान करने या श्रद्धापूर्वक इसका आचमन करने से त्वचा संबंधी कई प्रकार के विकारों और चर्म रोगों में राहत मिलती है।
सावन के महीने में उमड़ता है आस्था का सैलाब
सावन का महीना शुरू होते ही पूरे अग्नेश्वर महादेव मंदिर प्रांगण में एक अलौकिक आध्यात्मिक ऊर्जा और रौनक देखने को मिलती है। देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले श्रद्धालु यहां भगवान आशुतोष का जलाभिषेक करते हैं, विशेष रुद्राभिषेक का आयोजन करवाते हैं और अपने जीवन में सुख, शांति, समृद्धि तथा निरोगी काया की मनोकामनाएं मांगते हैं।