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शिक्षा मंत्रालय संभालते ही फुल एक्शन में प्रह्लाद जोशी! संडे को भी अफसरों की बुलाई हाई-लेवल बैठक

देश की राजनीति और शिक्षा जगत में इस समय हलचल तेज हो गई है क्योंकि नए शिक्षा मंत्री के रूप में कार्यभार संभालते ही प्रह्लाद जोशी ने ताबड़तोड़ फैसले लेने शुरू कर दिए हैं। छुट्टी का दिन होने के बावजूद, यानी रविवार को भी उन्होंने मंत्रालय के तमाम बड़े अधिकारियों और वरिष्ठ नौकरशाहों की एक इमरजेंसी हाई-लेवल बैठक बुलाई है। इस अचानक बुलाई गई बैठक के बाद से ही पूरे देश के छात्र-छात्राओं, अभिभावकों और शिक्षण संस्थानों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार अब देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET को लेकर कोई बहुत बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव करने जा रही है।

कार्यभार संभालते ही प्रह्लाद जोशी ने दिखाए कड़े तेवर

केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल और नई जिम्मेदारियों के मिलने के बाद प्रह्लाद जोशी ने बिना एक भी दिन गंवाए अपने मंत्रालय का कामकाज संभाल लिया है। कार्यभार संभालने के तुरंत बाद उनका यह तेवर साफ संकेत दे रहा है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और लंबित पड़ी व्यवस्थाओं को पटरी पर लाना उनकी प्राथमिकता में सबसे ऊपर है। रविवार के दिन बुलाई गई इस उच्च स्तरीय बैठक में देश की शिक्षा नीति, परीक्षाओं की पारदर्शिता और पिछले समय में उठे सवालों पर विस्तार से चर्चा होने की उम्मीद जताई जा रही है, ताकि छात्रों के भविष्य के साथ कोई खिलवाड़ न हो सके।

क्या NEET परीक्षा पैटर्न में होगा बड़ा बदलाव?

देशभर के लाखों मेडिकल Aspirants के मन में इस समय सबसे बड़ा सवाल यही चल रहा है कि क्या सरकार NEET परीक्षा प्रणाली, इसके आयोजन के तरीके या काउंसलिंग प्रक्रिया में कोई क्रांतिकारी बदलाव करने वाली है। पिछले कुछ सत्रों में NEET परीक्षा को लेकर हुई विभिन्न गड़बड़ियों, पेपर लीक के मामलों और छात्रों के विरोध प्रदर्शनों के बाद से ही पूरी व्यवस्था सवालों के घेरे में रही है। ऐसे में प्रह्लाद जोशी द्वारा अचानक बुलाई गई इस समीक्षा बैठक को इसी दिशा में एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है, जिससे परीक्षा की शुचिता और विश्वसनीयता को फिर से बहाल किया जा सके।

छात्रों और अभिभावकों को है सख्त और पारदर्शी फैसलों का इंतजार

एजुकेशन सेक्टर के जानकारों का मानना है कि नए मंत्री के सामने सबसे बड़ी चुनौती छात्रों का भरोसा जीतना और परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह से फूल-प्रूफ बनाना है। इस संडे मीटिंग में अधिकारियों के साथ मंथन के बाद जल्द ही कुछ बड़े दिशा-निर्देश या नए सुधार सामने आ सकते हैं। देश के करोड़ों छात्र अब यह उम्मीद लगाए बैठे हैं कि सरकार उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए कोई ठोस नीतिगत फैसला लेगी, जिससे प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली की गुंजाइश हमेशा के लिए खत्म हो सके।

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