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खाड़ी देशों में फिर मंडराया युद्ध का खतरा, हूती विद्रोहियों ने सऊदी के तेल ठिकानों पर बोला हमला

मध्य पूर्व यानी खाड़ी के देशों में एक बार फिर से तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है, जिससे पूरे इलाके में बड़े पैमाने पर युद्ध छिड़ने का खतरा मंडराने लगा है। शनिवार को घटी दो बड़ी और अहम घटनाओं ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। एक तरफ जहां ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के बेहद अहम तेल ठिकानों को निशाना बनाया है, वहीं दूसरी तरफ कैस्पियन सागर में एक ईरानी कमर्शियल जहाज पर हुए हमले को लेकर ईरान और यूक्रेन आमने-सामने आ गए हैं। इस स्थिति के चलते वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी गंभीर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

सऊदी अरब के तेल ठिकानों पर हूती विद्रोहियों का बड़ा हमला

शनिवार को यमन के ईरान समर्थित हूती गुट ने सऊदी अरब की धरती पर स्थित दो प्रमुख तेल ठिकानों पर ताबड़तोड़ हमले किए। हूती संगठन के प्रवक्ता की ओर से जारी किए गए बयानों के अनुसार, सऊदी अरब के जिजान और यानबू शहरों में स्थित अरामको कंपनी की रिफाइनरियों और तेल भंडारण केंद्रों को इस हमले में खासतौर पर निशाना बनाया गया। सोशल मीडिया और सामने आए वीडियो फुटेज में जिजान रिफाइनरी से आसमान में काले धुएं का भारी गुबार उठता हुआ साफ तौर पर देखा गया।

ग्रीक सुरक्षा से जुड़े सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, यानबू शहर की तरफ दागी गई दो खतरनाक बैलिस्टिक मिसाइलों को अमेरिकी पैट्रियट डिफेंस सिस्टम की मदद से हवा में ही सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया गया। आपको बता दें कि यानबू सऊदी अरब का लाल सागर के तट पर स्थित सबसे महत्वपूर्ण तेल बंदरगाह है। मौजूदा समय में जब होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, तब सऊदी अरब के लिए तेल निर्यात करने का यह सबसे मुख्य और सुरक्षित रास्ता माना जाता है। इसके अलावा, जिजान रिफाइनरी की कुल क्षमता प्रतिदिन चार लाख बैरल तेल के उत्पादन की है, ऐसे में इस पर हुआ यह हमला आर्थिक और रणनीतिक दोनों लिहाज से बहुत बड़ा झटका है।

यमन में फिर से सुलग उठा गृह युद्ध का संकट

हूती विद्रोहियों के इन हमलों के तुरंत बाद सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने भी आक्रामक रुख अपनाते हुए कड़ा जवाब दिया है। गठबंधन सेना ने यमन के मारिब, अल-जौफ और होदेदाह इलाकों में स्थित हूती विद्रोहियों के कई प्रमुख ठिकानों पर भीषण बमबारी की है। यमन के स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि इस सैन्य कार्रवाई के बाद दोनों ही पक्षों ने एक बार फिर से युद्ध के मोर्चों पर भारी संख्या में सेना जुटाना शुरू कर दिया है।

गौरतलब है कि साल 2022 से काफी हद तक थमा हुआ यमन का गृह युद्ध इस महीने एक बार फिर से भड़कता हुआ नजर आ रहा है। हूती विद्रोहियों ने पिछले ही हफ्ते सऊदी अरब की नौसैनिक नाकेबंदी की आधिकारिक घोषणा की थी और इसके ठीक बाद गुरुवार को लाल सागर के रास्ते से गुजर रहे सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों पर भी हमला कर दिया था। इन लगातार बढ़ती घटनाओं से इस बात की पूरी आशंका जताई जा रही है कि यमन का यह पुराना संघर्ष एक बार फिर से बड़े युद्ध का रूप ले सकता है।

ईरान और यूक्रेन के बीच बढ़ा तनाव, कैस्पियन सागर में जहाज पर हमला

सऊदी अरब पर हुए हमलों के साथ-साथ खाड़ी क्षेत्र में एक और बड़े भू-राजनीतिक विवाद ने जन्म ले लिया है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने यूक्रेन पर कैस्पियन सागर के भीतर एक ईरानी कमर्शियल जहाज को टारगेट करने और उस पर हमला करने का गंभीर आरोप लगाया है। ईरानी मंत्रालय के आधिकारिक बयान के मुताबिक, इस खतरनाक हमले के दौरान हुए जोरदार विस्फोट में जहाज पर सवार एक नाविक की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि एक अन्य सदस्य गंभीर रूप से घायल हो गया है।

इस घटना के विरोध में ईरान ने तेहरान स्थित यूक्रेन के शीर्ष राजनयिक को तलब किया और इस पूरी कार्रवाई को एक खुला दुश्मनी भरा और आपराधिक कृत्य करार दिया। दूसरी ओर, इस विवाद को हवा तब और मिल गई जब यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कैस्पियन सागर में हुए लंबी दूरी के हमलों की खुली तारीफ की थी। राष्ट्रपति जेलेंस्की ने अपने बयान में यह भी आरोप लगाया था कि रूस मध्य पूर्व क्षेत्र से जुड़ी सामरिक और सैटेलाइट की खुफिया जानकारियां लगातार ईरान के साथ साझा कर रहा है।

अमेरिका की सक्रियता और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर मंडराता खतरा

इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिकी सेना भी खाड़ी के समंदर में पूरी तरह से सक्रिय हो गई है। हाल ही में अमेरिकी नौसेना ने ओमान की खाड़ी में एक ऐसे संदिग्ध जहाज को रोका है, जिसने हूती विद्रोहियों द्वारा घोषित की गई नाकेबंदी को तोड़ने का दुस्साहस किया था। अंतरराष्ट्रीय रक्षा और ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य के बाद लाल सागर का यह व्यापारिक और नौवहन मार्ग भी इसी तरह बाधित होता रहा, तो आने वाले दिनों में इसका सीधा और बहुत बुरा असर पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति तथा कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ेगा।

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