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विदेश मंत्रालय का बड़ा खुलासा: 2023 से 2025 के बीच हजारों भारतीयों की विदेश में मौत, सऊदी और UAE में सबसे ज्यादा मामले

भारत दुनिया के उन प्रमुख देशों में शामिल है, जहां से लाखों युवा और कुशल श्रमिक बेहतर रोजगार, कारोबार और अपने परिवार के उज्ज्वल भविष्य की तलाश में हर साल विदेश जाते हैं। खासकर खाड़ी (गल्फ) देशों, अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोप में भारतीय प्रवासियों की एक बड़ी आबादी बसती है। हालांकि, इस आर्थिक समृद्धि और चमकते अवसरों के पीछे एक दर्दनाक सच्चाई भी छिपी है। विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा संसद (लोकसभा) में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, साल 2023 से 2025 के बीच विदेशों में हजारों भारतीय नागरिकों की जान गई है।

सरकार की इस समीक्षा रिपोर्ट में सामने आया है कि प्रवासियों की मौतों में सबसे बड़ा कारण प्राकृतिक वजहें (Natural Causes) हैं, लेकिन कार्यस्थल पर हादसे (Workplace Accidents), आत्महत्याएं, आपराधिक घटनाएं और अन्य परिस्थितियां भी गंभीर चिंता का विषय बनी हुई हैं।

किन देशों में दर्ज हुईं सबसे ज्यादा मौतें?

विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, जिन देशों में भारतीय प्रवासियों की संख्या सबसे अधिक है, वहीं मौतों के आंकड़े भी सबसे ज्यादा दर्ज किए गए हैं:

  1. सऊदी अरब (Saudi Arabia): सूची में सबसे ऊपर है, जहां 2023 से 2025 के बीच कुल 7,981 भारतीयों की मौत हुई। इनमें 6,376 प्राकृतिक मौतें, 182 कार्यस्थल हादसे, 354 आत्महत्याएं, 29 आपराधिक घटनाएं और 1,040 अन्य कारण शामिल हैं।

  2. संयुक्त अरब अमीरात (UAE): दूसरे स्थान पर रहे यूएई में कुल 7,458 भारतीयों ने जान गंवाई। इनमें 5,702 प्राकृतिक मौतें, 128 कार्यस्थल दुर्घटनाएं, 511 आत्महत्याएं, 25 अपराध से जुड़ी मौतें और 1,092 अन्य कारण रहे।

  3. अमेरिका (USA): अमेरिका में कुल 2,850 भारतीय नागरिकों की मौत दर्ज हुई, जिनमें 2,340 प्राकृतिक वजहों से, 46 कार्यस्थल हादसों में, 62 आत्महत्या के कारण और 37 अपराध की वजह से थीं।

  4. अन्य प्रमुख देश: कुवैत में 2,191, ओमान में 1,498, मलेशिया में 1,437 और इटली में 1,057 भारतीय नागरिकों की मृत्यु दर्ज की गई।

इसके अलावा शीर्ष 20 देशों में कतर, बहरीन, सिंगापुर, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, फिलीपींस, जर्मनी, स्पेन, दक्षिण अफ्रीका, चीन, नाइजीरिया और थाईलैंड जैसे देश भी शामिल हैं।

प्राकृतिक मौतों और हादसों के पीछे क्या हैं मुख्य कारण?

  • स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं: खाड़ी देशों में अत्यधिक चिलचिलाती गर्मी, लंबे कामकाजी घंटे, शारीरिक परिश्रम, हृदय रोग (Heart Attacks), मधुमेह और लगातार तनाव की वजह से बड़ी संख्या में प्राकृतिक मौतें दर्ज की जाती हैं।

  • जोखिम भरे कार्यस्थल: निर्माण क्षेत्र (Construction), तेल व गैस रिफाइनरी और औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले नीले कॉलर (Blue-collar) श्रमिकों को सुरक्षा मानकों की कमी के चलते हादसों का सामना करना पड़ता है।

  • मानसिक तनाव और अकेलापन: अपनों से दूरी, भारी कर्ज, कम वेतन, ठेकेदारों/नियोक्ताओं का दबाव और सामाजिक अलगाव के कारण कई श्रमिक डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं, जो कई मामलों में आत्महत्या जैसी दुखद घटनाओं की वजह बनता है।

प्रवासियों की सुरक्षा के लिए सरकार की मुख्य व्यवस्थाएं

लोकसभा में विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि विदेशों में रहने वाले भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लिए कई स्थायी प्रणालियां शुरू की गई हैं:

  • प्रवासी भारतीय सहायता केंद्र (PBSK): दिल्ली, दुबई, रियाद और जेद्दा जैसे प्रमुख स्थानों पर सहायता केंद्र संचालित किए जा रहे हैं, जो दूतावासों के साथ मिलकर चौबीसों घंटे प्रवासियों को कानूनी और मानसिक परामर्श (Counseling) देते हैं।

  • ऑनलाइन शिकायत पोर्टल: शिकायतों के तुरंत समाधान के लिए MADAD, CPGRAMS और e-Migrate जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म उपलब्ध हैं।

  • बीमा और वित्तीय सहायता: 'प्रवासी भारतीय बीमा योजना' (PBBY) के तहत ईसीआर (ECR) कामगारों को दुर्घटना में मृत्यु या स्थायी दिव्यांगता पर 10 लाख रुपये तक का बीमा कवर मिलता है। इसके अलावा इंडियन कम्युनिटी वेलफेयर फंड (ICWF) के जरिए संकटग्रस्त भारतीयों को कानूनी और चिकित्सा सहायता दी जाती है।

  • शव भारत लाने की त्वरित प्रक्रिया: स्वास्थ्य मंत्रालय का eCARe पोर्टल विदेशों से पार्थिव शरीर को भारत लाने की मंजूरी देने की प्रक्रिया को पेपरलेस बनाता है, जिससे 48 घंटे के भीतर सभी जरूरी मंजूरियां दी जा सकें।

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