उत्तर प्रदेश

UP Paper Leak History: 1992 के नकल अध्यादेश से सख्त कानून तक; उत्तर प्रदेश में कैसे पनपी ‘नकल संस्कृति’ और कैसे बदला परीक्षा का पूरा ढर्रा

वर्तमान समय में जब देश भर में पेपर लीक और परीक्षाओं में धांधली को लेकर कठोर नीतियां और कड़े प्रशासनिक फैसले लिए जा रहे हैं, तब उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य के युवाओं के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर इस 'नकल संस्कृति' की शुरुआत कहां से हुई? कैसे एक समय में नकल को संस्थागत संरक्षण मिला और किस तरह यह प्रदेश के लाखों मेधावी छात्रों के सपनों पर आघात पहुंचाता रहा। उत्तर प्रदेश का जिक्र इसलिए भी अहम है क्योंकि यहां का बहुसंख्यक युवा वर्ग अपनी आजीविका और उज्ज्वल भविष्य के लिए सरकारी नौकरियों व प्रतियोगी परीक्षाओं पर आश्रित है। जब किसी युवा की वर्षों की मेहनत पर पेपर लीक का साया पड़ता है, तो हताशा स्वाभाविक है।

राज्य के पूर्व पुलिस महानिदेशक और राज्यसभा सांसद बृज लाल के दृष्टिकोण और ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार, बीते तीन दशकों में उत्तर प्रदेश की परीक्षा प्रणाली ने दो बिल्कुल विपरीत राजनीतिक और प्रशासनिक दौर देखे हैं। एक दौर समाजवादी पार्टी के शासनकाल का रहा, जहां ढिलाई और नीतियों के कारण नकल माफिया एक समानांतर सत्ता बन बैठा। वहीं दूसरा दौर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल का है, जहां कानून की कड़ाकेदार छड़ी से माफिया तंत्र पर सीधा प्रहार किया गया।

1992 का 'नकल अध्यादेश' और स्व-केंद्र नीति का घातक दौर

उत्तर प्रदेश में नकल माफिया की नींव और इसके फलने-फूलने के इतिहास को समझने के लिए हमें साल 1992 में जाना होगा। तत्कालीन सरकार द्वारा राज्य में परीक्षाओं की पवित्रता बनाए रखने के लिए सख्त 'नकल अध्यादेश' लागू किया गया था। हालांकि, इसके बाद सत्ता में आई मुलायम सिंह यादव की सरकार के दौरान इस कानून को व्यावहारिक स्तर पर पूरी तरह से निष्प्रभावी और लचर बना दिया गया।

इसी दौर में 'स्व-केंद्र' (सेल्फ-सेंटर) की नीति को भी बढ़ावा दिया गया, जिसके तहत छात्र-छात्राओं को अपने ही स्कूल या कॉलेज में परीक्षा देने की सुविधा मिली। देखने में यह निर्णय भले ही एक सामान्य प्रशासनिक सुविधा प्रतीत होता था, लेकिन इसने राज्य में एक संगठित 'नकल माफिया' को जन्म दे दिया। इसी ढील का नतीजा था कि वर्ष 2004 में यूपी बोर्ड की इंटरमीडिएट परीक्षा का परिणाम अस्वाभाविक रूप से बेतहाशा बढ़ गया। मेधावी छात्र पीछे छूटते चले गए और व्यवस्थागत ढील के बल पर जालसाजों की जेबें भरती रहीं, जिसने राज्य की शैक्षणिक साख को गहरा धक्का पहुंचाया।

2012 से 2017: भर्ती बोर्डों पर धांधली के आरोप और पेपर लीक का दौर

साल 2012 से 2017 के बीच जब अखिलेश यादव के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी की सरकार बनी, तब युवाओं को परीक्षा प्रणाली में सुधार की उम्मीद थी। हालांकि, यह दौर राज्य के लगभग हर बड़े भर्ती बोर्ड के लिए विवादों से भरा साबित हुआ। मेडिकल प्रवेश परीक्षा का प्रश्नपत्र सरकारी ट्रेजरी से लीक होने के कारण पूरी परीक्षा रद्द करनी पड़ी। वहीं, राज्य की सबसे प्रतिष्ठित प्रशासनिक सेवा (UPPSC) का पर्चा सोशल मीडिया पर सार्वजनिक हो गया, जिससे लाखों अभ्यर्थियों को सड़क पर उतरना पड़ा।

इसके अतिरिक्त, ग्राम विकास अधिकारी (VDO) भर्ती में स्टिंग ऑपरेशन के जरिए रिश्वतखोरी के बड़े खुलासे हुए, जिसमें सत्ताधारी दल के करीबी लोगों की भूमिका पर सवाल उठे। इस दौर में कैबिनेट मंत्री रहे आजम खान द्वारा अपने विभागों की भर्तियां खुद कराने और उसमें एक विशेष वर्ग को प्राथमिकता देने के गंभीर आरोप लगे। लोक सेवा आयोग में एक विशिष्ट जाति और वर्ग के असंतुलित चयन को लेकर उच्च न्यायालय में जनहित याचिका तक दायर की गई। पुलिस और पीएसी सिपाही भर्ती में फर्जीवाड़े और राजनीतिक सिफारिशों के प्रमाण मिलने के बाद मामला वर्षों तक अदालती कार्यवाहियों में अटका रहा।

योगी सरकार का नीतिगत बदलाव: ₹1 करोड़ जुर्माना और आजीवन कारावास

साल 2017 में सत्ता परिवर्तन के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने परीक्षा प्रणाली में व्याप्त इस अराजकता को खत्म करने के लिए कठोर कानूनी और प्रशासनिक रास्ते चुने। सरकार ने 'उत्तर प्रदेश लोक सेवा (प्रतियोगी परीक्षा) अनुचित साधनों की रोकथाम अधिनियम' यानी सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया।

इस कानून के तहत पेपर लीक कराने या अनुचित साधनों का प्रयोग कराने वालों के लिए आजीवन कारावास और 1 करोड़ रुपये तक के भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया। साथ ही, दोषी पाई जाने वाली परीक्षा एजेंसियों की संपत्तियों की कुर्की और परीक्षा के पूरे खर्च की भरपाई उनसे ही वसूलने का कड़ा नियम बनाया गया। प्रशासनिक स्तर पर सीसीटीवी सर्विलांस, बेहद संवेदनशील परीक्षा केंद्रों का चयन और प्रश्नपत्रों की सुरक्षा के लिए बहु-स्तरीय व्यवस्था लागू की गई, जिसके सकारात्मक परिणाम हाल की परीक्षाओं में देखने को मिले हैं।

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