दिल्ली से कोलकाता सिर्फ 12 घंटे में! जानिए कैसे विंध्य और वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे बदलेंगे देश का नक्शा

उत्तर प्रदेश से होकर गुजरने वाले दो बेहद महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स—वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे और विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे—देश के उत्तर और पूर्वी हिस्सों के बीच आवागमन का पूरा नक्शा बदलने की तैयारी में हैं। इन दोनों एक्सप्रेसवे के पूरी तरह तैयार हो जाने के बाद देश की राजधानी दिल्ली से पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता तक एक निर्बाध, आधुनिक और हाई-स्पीड एक्सप्रेसवे नेटवर्क स्थापित हो जाएगा। वर्तमान में पारंपरिक सड़क मार्गों या ट्रेनों के जरिए दिल्ली से कोलकाता पहुंचने में 17 से लेकर 24 घंटे तक का लंबा समय लग जाता है। लेकिन इस नए एक्सप्रेसवे नेटवर्क के चालू होते ही यह थका देने वाला सफर घटकर महज 12 से 13 घंटे का रह जाएगा।
डीएनडी फ्लाईओवर से कोलकाता तक: ऐसे आपस में जुड़ेंगे देश के सबसे बड़े एक्सप्रेसवे
यह विशाल कॉरिडोर किसी एक सड़क से नहीं, बल्कि देश के कई शीर्ष एक्सप्रेसवे को आपस में जोड़कर तैयार किया जा रहा है। इस सुपर-फास्ट रूट की शुरुआत दिल्ली के डीएनडी (DND) फ्लाईओवर से होगी। यहां से गाड़ियां यमुना एक्सप्रेसवे में प्रवेश करेंगी, जो आगे आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे, विंध्य एक्सप्रेसवे और फिर विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे से सीधे कनेक्ट होगी। इस मजबूत और सीमलेस इंटरकनेक्टिविटी का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि यात्री बिना किसी जाम या रुकावट के दिल्ली से वाराणसी का सफर केवल 6 से 7 घंटे में पूरा कर सकेंगे, जबकि वाराणसी से कोलकाता का सफर मात्र 6 घंटे में तय हो जाएगा।
₹35,000 करोड़ की लागत से बन रहा 610 KM लंबा प्रोजेक्ट, कैमूर में बनेगी 5 किमी लंबी सुरंग
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा बनाए जा रहे लगभग 610 किलोमीटर लंबे और छह लेन (6-Lane) वाले इस ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट पर करीब ₹35,000 करोड़ की लागत आने का अनुमान है। इस महाकाय प्रोजेक्ट को वर्ष 2027 से 2028 तक पूरी तरह से जनता के लिए खोलने का लक्ष्य रखा गया है। यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले से शुरू होकर बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के कई प्रमुख व्यावसायिक जिलों से होकर गुजरेगा। इस रूट के निर्माण में आने वाली भौगोलिक बाधाओं को पार करने के लिए बिहार में कैमूर की कठिन पहाड़ियों के बीच 5 किलोमीटर लंबी आधुनिक सुरंग (Tunnel) का निर्माण किया जा रहा है, जो भारतीय इंजीनियरिंग का एक अद्भुत नमूना बनेगी।
पूर्वी बंदरगाहों तक पहुंचेगा माल, व्यापार और यूपी के एक्सप्रेसवे ग्रिड को मिलेगी नई रफ्तार
इस एक्सप्रेसवे ग्रिड के शुरू होने से न केवल आम यात्रियों के समय और ईंधन की बचत होगी, बल्कि उत्तर भारत के औद्योगिक केंद्रों से पूर्वी भारत के बंदरगाहों तक माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स का समय भी सीधा आधा हो जाएगा। इससे अंतरराष्ट्रीय और अंतरराज्यीय व्यापारिक गतिविधियों को जबर्दस्त बढ़ावा मिलेगा। इसके अतिरिक्त, उत्तर प्रदेश के भीतर भी आगरा-लखनऊ, पूर्वांचल और गंगा एक्सप्रेसवे के आपस में एक-दूसरे से जुड़ने से राज्य के भीतर एक मजबूत नेटवर्क ग्रिड तैयार हो रहा है। इससे यूपी के तमाम जिले आपस में बेहतरीन तरीके से कनेक्ट हो जाएंगे, जिससे प्रदेश के समग्र आर्थिक विकास को नई ऊंचाई मिलेगी।