आरक्षण से लेकर E20 तक: CJP की ऐतिहासिक सफलता के बाद मोदी सरकार के सामने खुला नया ‘पैंडोरा बॉक्स’

भारतीय राजनीति में इन दिनों जेन-जी और सोशल मीडिया के तेवर पूरी तरह से बदलते हुए नजर आ रहे हैं। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में नीट पेपर लीक और अन्य मुद्दों पर हुए सफल आंदोलनों के बाद देश की सियासत में एक नया भूचाल आ गया है। इस आंदोलन की सफलता ने राजनीतिक गलियारों में यह साबित कर दिया है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म और एकजुट युवा शक्ति अब सत्ता के फैसलों को सीधे तौर पर प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। हालांकि, इस बड़ी सफलता के बाद अब केंद्र सरकार के सामने एक के बाद एक कई नए मोर्चे खुलते दिखाई दे रहे हैं, जिससे आने वाले समय में राजनीतिक मुश्किलें और अधिक बढ़ सकती हैं।
CJP की सफलता और जंतर-मंतर पर उमड़ी भीड़ का असर
पिछले कुछ समय से देश की राजनीति का केंद्र युवा और उनके रोजगार से जुड़े मुद्दे बन चुके हैं। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले अभिजीत दीपके के समर्थन में उठे युवाओं के स्वर और जंतर-मंतर पर जुटाए गए जनसमर्थन ने इतिहास रच दिया है। पिछले एक दशक में ऐसा पहली बार देखने को मिला जब सड़क पर उतरी उग्र भीड़ के दबाव में आकर सरकार को अपने एक कद्दावर मंत्री का इस्तीफा तक लेना पड़ गया। इस अभूतपूर्व सफलता के बाद अब इंटरनेट की दुनिया में नए-नेक आंदोलनों और राजनीतिक संगठनों के खड़े होने का सिलसिला तेजी से शुरू हो गया है, जो सीधे तौर पर सरकार के लिए नीतिगत चुनौतियां पेश कर रहा है।
'रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन' की एंट्री और जनरल कैटेगरी के सवाल
सीजेपी की इस धमाकेदार सफलता से प्रेरित होकर सोशल मीडिया पर अब 'रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन' (RHA) नामक नया पेज तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे बहुत कम समय में इंस्टाग्राम पर लाखों लोगों का भारी समर्थन मिल चुका है। इस आंदोलन से जुड़े लोगों का मुख्य तर्क यह है कि नीट परीक्षा के तनाव और दबाव के चलते आत्महत्या करने वाले छात्रों में एक बड़ा हिस्सा जनरल कैटेगरी से ताल्लुक रखता है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे छात्रों के वीडियो और भावुक सवाल अब देश में एक बार फिर से आरक्षण व्यवस्था और उसकी पेचीदगियों पर तीखी बहस छेड़ चुके हैं, जिससे राजनीतिक दलों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
आरक्षण की 'हाईटेंशन लाइन' और आनंद रंगनाथन का सुधार फॉर्मूला
भारतीय राजनीति में आरक्षण के मुद्दे को छूना किसी भी राजनीतिक दल के लिए आसान नहीं रहा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने इसे लंदन की ट्रेन प्रणाली का उदाहरण देते हुए एक ऐसी हाईटेंशन लाइन बताया था जिसे छूने मात्र से राजनीतिक मौत निश्चित हो जाती है। वहीं दूसरी तरफ, जाने-माने पैनलिस्ट आनंद रंगनाथन ने एक पॉडकास्ट के दौरान यह स्पष्ट किया कि वह आरक्षण के विरोधी नहीं हैं, बल्कि मौजूदा व्यवस्था में क्रांतिकारी सुधारों के प्रबल समर्थक हैं। उनके अनुसार आरक्षण का लाभ पीढ़ी-दर-पीढ़ी एक ही परिवार को मिलने के बजाय परिवार के किसी एक ही व्यक्ति को मिलना चाहिए, ताकि उसी वर्ग के अन्य गरीब और वंचित परिवारों को भी आगे बढ़ने का वास्तविक अवसर मिल सके।
उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले बीजेपी के कोर वोटर की नाराजगी का खतरा
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और हालिया छात्र आंदोलनों के बाद ऐसा माना जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी का एक बड़ा कोर वोटबैंक पार्टी से छिटक सकता है। खासकर उत्तर प्रदेश जैसे सबसे बड़े राज्य में, जहां की पूरी राजनीति मुख्य रूप से जातिगत समीकरणों के इर्द-गिर्द घूमती है, वहां इस तरह के ऑनलाइन और ऑफलाइन आंदोलन बीजेपी के लिए बड़ी चिंता का विषय बन सकते हैं। यूजीसी के मुद्दों और अन्य स्थानीय प्रकरणों के चलते पार्टी को आने वाले विधानसभा चुनावों में नुकसान की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है, क्योंकि युवा वर्ग अब हर नीति पर सरकार से सीधा जवाब मांग रहा है।
इथेनॉल ब्लेंडिंग (E20) और नितिन गडकरी के सामने नई मुश्किलें
पेपर लीक के मुद्दे के बाद अब देश में पेट्रोल-डीजल में इथेनॉल ब्लेंडिंग यानी E20 का मुद्दा भी जोर पकड़ने लगा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा संकट और ईरान में जारी संघर्ष के बीच भारत सरकार लगातार ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों की तलाश कर रही है। हालांकि, वाहन चालकों और ऑटो यूनियनों के लगातार विरोध के चलते यह योजना अब विवादों के घेरे में आ गई है। कभी खुलकर इथेनॉल की वकालत करने वाले केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी भी अब इस बढ़ते विरोध के कारण असहज स्थिति में नजर आ रहे हैं। CJP की सफलता से प्रेरित होकर अब कई ट्रांसपोर्ट संगठन और विपक्षी चेहरे सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति तैयार कर रहे हैं, जिससे आने वाले दिनों में यह मामला और अधिक तूल पकड़ सकता है।