संसद में मनुस्मृति पर खरगे के बयान से भूचाल: जेपी नड्डा और सुधांशु त्रिवेदी ने किया पलटवार, जानें पूरा मामला

संसद के उच्च सदन राज्यसभा में एंटी पेपर लीक बिल यानी 'लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026' पर चर्चा के दौरान उस समय भारी राजनीतिक बवाल मच गया, जब नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मनुस्मृति और आरएसएस की विचारधारा को लेकर तीखा हमला बोला। खरगे के इस बयान के बाद सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली, जहां केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने उनके बयानों को समाज में अशांति फैलाने वाला और तथ्यों से परे करार दिया है।
एंटी पेपर लीक बिल और शिक्षा व्यवस्था पर खरगे के तीखे सवाल
राज्यसभा में चर्चा के दौरान हिस्सा लेते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार पर युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि देश में पिछले 10 वर्षों के दौरान कुल 152 पेपर लीक की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, लेकिन इसके बावजूद एक भी मुख्य दोषी को सजा नहीं मिल पाई है। खरगे ने सरकार और जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस नाकामी के कारण देश के करोड़ों युवाओं का भविष्य अंधकारमय हो गया है। इसके साथ ही उन्होंने देश में समयबद्ध वार्षिक परीक्षा कैलेंडर लागू करने की जोरदार मांग की ताकि छात्रों की अनिश्चितता को दूर किया जा सके।
शिक्षा पर खर्च और मनुस्मृति को लेकर सदन में घमासान
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए मल्लिकार्जुन खरगे ने देश की शिक्षा नीति और बजट आवंटन पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि भारत में जीडीपी का कम से कम 6 प्रतिशत हिस्सा शिक्षा क्षेत्र पर खर्च किया जाना चाहिए, जबकि वर्तमान में केवल 3 प्रतिशत के आसपास ही खर्च हो रहा है। खरगे ने आरोप लगाया कि कम बजट के कारण सरकारी शिक्षण संस्थानों की हालत बदतर हो रही है और शिक्षा तेजी से प्राइवेट हाथों में जा रही है, जिससे गरीब और दलित वर्ग के बच्चे उच्च शिक्षा से वंचित हो रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने विवादित टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकार की नीतियां मनुस्मृति वाली उस पुरानी सोच की याद दिलाती हैं जिसमें शिक्षा पर कुछ ही लोगों का विशेषाधिकार माना जाता था।
आरएसएस के सिलेबस और कथित श्लोक के जिक्र पर भड़का सत्ता पक्ष
खरगे ने आगे आरोप लगाया कि देश के विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में कथित तौर पर आरएसएस के लोग भरे जा रहे हैं और पाठ्यक्रम में आपत्तिजनक बदलाव किए जा रहे हैं। उन्होंने मनुस्मृति के कुछ तथाकथित प्रावधानों का हिंदी अनुवाद सदन में पढ़ा, जिसके बाद सत्ता पक्ष की ओर से कड़ा विरोध दर्ज कराया गया। इस बयान के तुरंत बाद सदन में भारी हंगामा शुरू हो गया, जिससे कार्यवाही का माहौल काफी गर्मा गया।
जेपी नड्डा और सुधांशु त्रिवेदी का कड़ा पलटवार
विपक्ष के नेता के बयानों पर कड़ी आपत्ति जताते हुए सदन के नेता और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि मल्लिकार्जुन खरगे के द्वारा दिए गए बयान पूरी तरह से तथ्यों से परे हैं और इनसे समाज में अशांति पैदा हो सकती है। नड्डा ने चुनौती देते हुए कहा कि नेता विपक्ष को सदन में मनुस्मृति की मूल प्रति पेश करनी चाहिए। सभापति ने भी खरगे से अपने बयानों को प्रमाणित करने को कहा और यह भी स्पष्ट किया कि मनुस्मृति से जुड़े जिन अंशों का उल्लेख किया गया है, उन्हें रिकॉर्ड से हटाया जाएगा। इसके बाद बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने विभिन्न ऐतिहासिक किताबों, कलकत्ता हाई कोर्ट के संदर्भों और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के लेखन का हवाला देते हुए कांग्रेस के दावों को खारिज किया और इस बयान को राजनीति से प्रेरित बताया।