विदेश

जापान में महाप्रलय का खतरा! टोक्यो से अलग देश की दूसरी राजधानी बनाने की तैयारी, संसद में पास हुआ नया कानून

दशकों से भीषण भूकंपों और प्राकृतिक आपदाओं के साये में जी रहे जापान ने भविष्य के किसी बड़े खतरे से निपटने के लिए एक ऐतिहासिक और कड़ा कदम उठाया है। जापान सरकार ने देश की मौजूदा राजधानी टोक्यो के अलावा एक 'बैकअप कैपिटल' यानी दूसरी वैकल्पिक राजधानी स्थापित करने की आधिकारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए जापानी संसद ने जुलाई में एक नया कानून भी पारित कर दिया है, ताकि आपातकाल के दौरान देश की सत्ता और व्यवस्था को सुरक्षित रखा जा सके। हालांकि, इस फैसले को लेकर देश की राजनीति में तीखा विरोध और घमासान भी शुरू हो गया है।

क्यों पड़ी जापान को दूसरी राजधानी बनाने की जरूरत?

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस नए कानून को लाने का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि भविष्य में किसी भीषण भूकंप की वजह से टोक्यो पूरी तरह तबाह हो जाता है, तब भी देश की शासन व्यवस्था और प्रशासनिक कामकाज में कोई रुकावट न आए। वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगले 30 वर्षों के भीतर टोक्यो महानगर क्षेत्र में रिक्टर स्केल पर 7 या उससे अधिक तीव्रता का एक महाप्रलयकारी भूकंप आ सकता है। यदि ऐसा होता है, तो जापान का प्रधानमंत्री कार्यालय, संसद भवन, तमाम केंद्रीय मंत्रालय और देश के मुख्य आर्थिक संस्थान एक ही झटके में पूरी तरह ठप हो सकते हैं।

टोक्यो पर है देश की अर्थव्यवस्था और आबादी का सबसे बड़ा बोझ

वर्तमान समय में पूरे जापान देश का आर्थिक और प्रशासनिक भार अकेले टोक्यो पर टिका हुआ है। देश की 30 प्रतिशत से अधिक आबादी इसी क्षेत्र में निवास करती है, जबकि जापान की कुल जीडीपी का लगभग पांचवां हिस्सा अकेले टोक्यो से ही आता है। इसके अलावा, देश की 50 प्रतिशत से ज्यादा शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनियां भी यहीं से संचालित होती हैं। सरकार का मानना है कि दूसरी राजधानी बन जाने से न केवल देश को प्राकृतिक आपदाओं के वक्त सुरक्षा कवच मिलेगा, बल्कि टोक्यो के बाहर के अन्य क्षेत्रीय शहरों में भी रोजगार, निवेश और समग्र विकास तेजी से पहुंचेगा।

कौन-से शहर हैं बैकअप कैपिटल की रेस में शामिल?

जापानी संसद द्वारा पारित किए गए नए कानून में अभी किसी एक निश्चित शहर का नाम फाइनल नहीं किया गया है। इसके बजाय देश के विभिन्न राज्यों को इसके लिए आवेदन करने की पूरी छूट दी गई है, हालांकि इस पर अंतिम मुहर प्रधानमंत्री द्वारा लगाई जाएगी। इस रेस में आईची, ओसाका, फुकुओका, होक्काइडो और मियागी जैसे प्रमुख राज्यों के नाम सबसे आगे चल रहे हैं। सरकार की तरफ से यह शर्त रखी गई है कि चुने जाने वाले वैकल्पिक शहर में टोक्यो के साथ एक ही समय में भूकंप आने का जोखिम न्यूनतम होना चाहिए और वहां प्रशासनिक व आर्थिक बुनियादी ढांचा पहले से ही मजबूत स्थिति में होना चाहिए।

क्यों छिड़ गया है जापान की राजनीति में सियासी संग्राम?

भले ही राष्ट्रीय सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के दृष्टिकोण से यह योजना बेहद जरूरी लग रही हो, लेकिन जापान के राजनीतिक गलियारों में इस पर भारी घमासान मचा हुआ है। विपक्षी दलों का कड़ा आरोप है कि यह बिल प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची की गठबंधन सरकार की सहयोगी पार्टी 'जापान इनोवेशन पार्टी' को राजनीतिक लाभ पहुंचाने के लिए लाया गया है, क्योंकि ओसाका इस पार्टी का पारंपरिक गढ़ माना जाता है। इसके साथ ही, आलोचकों का कहना है कि सरकार ने अभी तक इस विशाल परियोजना की कुल लागत और भविष्य के आर्थिक फायदों का कोई स्पष्ट आंकड़ा जनता के सामने नहीं रखा है, जिससे देश के सरकारी खजाने पर भारी वित्तीय बोझ पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

Back to top button