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Odisha PG Medical Paper Leak: सख्त कानून भी बेअसर! अब ओडिशा में MS-MD का पेपर WhatsApp पर हुआ लीक, जानिए किस कॉलेज से जुड़ा है इसका तार

देश में मेडिकल प्रवेश और डिग्री परीक्षाओं की शुचिता पर लगातार उठ रहे सवालों के बीच एक और बेहद परेशान करने वाली खबर सामने आई है। राष्ट्रीय स्तर पर नीट-यूजी (NEET-UG) पेपर लीक के बड़े विवाद के बाद केंद्र और राज्य सरकारों ने प्रतियोगी परीक्षाओं में अनुचित साधनों और धांधली को रोकने के लिए 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2026' जैसे कड़े कानून लागू किए थे। कड़े नियमों और जेल की सख्त सजा के प्रावधानों के बावजूद, अब ओडिशा से पीजी मेडिकल जैसी संवेदनशील परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने का सनसनीखेज मामला सामने आ गया है। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि केवल कानून बनाने भर से पेपर लीक करने वाले गिरोहों के हौसले पस्त नहीं हो रहे हैं, बल्कि परीक्षा कराने वाले तंत्र में मौजूद कमियों का फायदा उठाकर वे लगातार व्यवस्था को चुनौती दे रहे हैं।

27 जुलाई की सुबह 9:58 बजे व्हाट्सएप पर तैरने लगे प्रश्नपत्र के पन्ने

यह पूरा मामला 27 जुलाई 2026 को उस समय उजागर हुआ, जब ओडिशा यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (OUHS) द्वारा आयोजित वर्ष 2023-26 बैच के एमएस और एमडी (MS/MD) छात्रों की जनरल सर्जरी (द्वितीय थ्योरी) विषय की परीक्षा चल रही थी। परीक्षार्थी केंद्रों के भीतर अपने सवालों के जवाब लिख रहे थे, ठीक उसी समय यानी सुबह लगभग 9:58 बजे परीक्षा के असली प्रश्नपत्र की स्पष्ट तस्वीरें व्हाट्सएप ग्रुपों पर वायरल होने लगीं। जब तक परीक्षा हॉल के भीतर मौजूद पर्यवेक्षकों को भनक लगती, तब तक प्रश्नपत्र के उत्तर बाहर कई लोगों के पास पहुँच चुके थे। एक उच्चस्तरीय मेडिकल परीक्षा का पर्चा इस तरह सरेआम सोशल मीडिया पर घूमना सुरक्षा इंतजामों और गोपनीयता के दावों की धज्जियां उड़ाने जैसा है।

भुवनेश्वर के छात्र ने किया भंडाफोड़: बहरामपुर के एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज से जुड़े तार

इस बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किसी जांच एजेंसी ने नहीं, बल्कि एक जागरूक छात्र की सतर्कता की वजह से हुआ। भुवनेश्वर स्थित एक निजी मेडिकल कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र ने सबसे पहले इस गड़बड़ी को पकड़ा और तुरंत विश्वविद्यालय के शीर्ष अधिकारियों को इसकी सूचना दी। छात्र ने बताया कि ब्रह्मपुर (बहरामपुर) के प्रतिष्ठित एमकेसीजी (MKCG) मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के एक छात्र से जुड़े एक विशेष व्हाट्सएप ग्रुप में परीक्षा शुरू होने के दौरान ही पूरे प्रश्नपत्र की तस्वीरें पोस्ट की गई थीं। शिकायतकर्ता द्वारा साक्ष्य प्रस्तुत किए जाने के बाद ओयूएचएस (OUHS) प्रशासन में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में उच्च अधिकारियों की बैठक बुलाई गई।

विश्वविद्यालय ने दिए उच्च स्तरीय जांच के आदेश: रद्द हो सकती है परीक्षा

मामले की गंभीरता को देखते हुए ओडिशा यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज के कुलपति और परीक्षा नियंत्रक ने तुरंत कार्रवाई की बात कही है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने पूरे घटनाक्रम की बारीकी से जांच करने के लिए एक उच्चस्तरीय आंतरिक जांच समिति (Inquiry Committee) का गठन कर दिया है। यह समिति इस बात की पड़ताल कर रही है कि परीक्षा केंद्र के अंदर मोबाइल फोन या कैमरा डिवाइस कैसे पहुँची और किस स्तर पर गोपनीयता का उल्लंघन हुआ। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों पर केवल अनुशासनात्मक कार्रवाई ही नहीं की जाएगी, बल्कि उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। इसके साथ ही प्रभावित विषय की परीक्षा को रद्द करने पर भी विचार किया जा रहा है।

नए एंटी-पेपर लीक कानून 2026 की परीक्षा: क्या हो पाएगी सख्त कार्रवाई?

हाल ही में पारित सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) कानून 2026 के तहत किसी भी सार्वजनिक या राज्यस्तरीय परीक्षा में पेपर लीक करने, डिजिटल माध्यमों से प्रश्नपत्र बाहर भेजने या सामूहिक नकल कराने पर 3 से 10 साल तक की जेल और 1 करोड़ रुपये तक के भारी-भरकम जुर्माने का प्रावधान है। ओडिशा में घटित यह घटना इस नए कानून के लागू होने के बाद पहला बड़ा मेडिकल परीक्षा लीक मामला माना जा रहा है। अब देखने वाली बात यह होगी कि जांच एजेंसियां इस मामले में व्हाट्सएप ग्रुप के एडमिन, तस्वीरें खींचने वाले आरोपी और इसमें शामिल गिरोह तक कितनी तेजी से पहुँच पाती हैं और नए कड़े कानून के तहत क्या नजीर पेश करने वाली कार्रवाई की जाती है।

भावी डॉक्टरों की साख और मरीजों की सुरक्षा पर मंडराता खतरा

पीजी मेडिकल (MS/MD) की पढ़ाई करने वाले छात्र भविष्य में बड़े सर्जन और विशेषज्ञ डॉक्टर बनते हैं। ऐसे में अगर इन परीक्षाओं में भी पर्चे लीक होने लगेंगे और गलत तरीके से लोग डिग्रियां हासिल करेंगे, तो इसका सीधा असर देश की स्वास्थ्य व्यवस्था और मरीजों की जान पर पड़ेगा। विशेषज्ञों और वरिष्ठ डॉक्टरों ने इस घटना पर गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा है कि मेडिकल जैसे अति-संवेदनशील क्षेत्र में किसी भी तरह का समझौता देश के नागरिकों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने जैसा है। छात्र संगठनों ने पूरे मामले की निष्पक्षता से जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कठोरतम कदम उठाने की मांग की है।

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