PoK में चली गोली तो पूरे पाकिस्तान में भड़की भयंकर बगावत, शहबाज-मुनीर के खिलाफ सड़कों पर उतरा जनसैलाब

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) से इस वक्त की बेहद विस्फोटक और बड़ी खबर सामने आ रही है। PoK में प्रदर्शनकारियों पर हुई अचानक गोलीबारी के बाद वहां की जनता का गुस्सा फूट पड़ा है और यह विरोध प्रदर्शन अब एक पूर्ण बगावत का रूप ले चुका है। इस घटना के बाद न केवल मुजफ्फराबाद बल्कि पाकिस्तान के कई प्रमुख शहरों में लोग प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर के खिलाफ खुलेआम सड़कों पर उतर आए हैं। हालात इस कदर बेकाबू हो चुके हैं कि पाकिस्तानी हुकूमत और सेना के आला अफसरों के हाथ-पांव फूल गए हैं।
क्यों भड़का PoK की जनता का गुस्सा और किस बात पर हुआ बवाल?
दरअसल, PoK के नागरिक पिछले काफी समय से भारी महंगाई, आटे की किल्लत, बिजली के भारी-भरकम बिलों और बुनियादी अधिकारों के हनन को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जता रहे थे। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने इस शांतिपूर्ण आंदोलन को कुचलने के लिए बल प्रयोग किया और प्रदर्शनकारियों पर सीधी फायरिंग कर दी। गोलीबारी में कई स्थानीय नागरिकों के घायल होने और हताहत होने की खबर जैसे ही फैली, मुजफ्फराबाद, मीरपुर और पुंछ समेत पूरे इलाके में लोग हिंसक हो उठे और उन्होंने पाकिस्तानी चौकियों को घेर लिया।
शहबाज शरीफ और जनरल मुनीर के खिलाफ क्यों गूंज रहे हैं आजादी के नारे
इस खूनी झड़प के बाद प्रदर्शनकारियों का गुस्सा सीधे तौर पर पाकिस्तान की कठपुतली सरकार और रावलपिंडी में बैठे सैन्य आकाओं पर फूट रहा है। प्रदर्शनकारी 'शाहबाज शरीफ इस्तीफा दो' और 'पाकिस्तानी सेना वापस जाओ' के गगनभेदी नारे लगा रहे हैं। लोगों का आरोप है कि जनरल असीम मुनीर के इशारे पर पाकिस्तानी सेना PoK के प्राकृतिक संसाधनों को लूट रही है और यहां के नागरिकों को गुलामों की तरह रखा जा रहा है। बगावत की आंच अब इतनी तेज हो चुकी है कि स्थानीय पुलिस भी जनता के गुस्से के आगे बेबस नजर आ रही है।
क्या पाकिस्तान के हाथ से निकल जाएगा PoK और क्या होगा इसका अंजाम?
वैश्विक और रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि PoK में भड़की यह चिंगारी पाकिस्तान के वजूद के लिए बड़ा खतरा बन सकती है। कंगाली और कर्ज के दलदल में डूबा पाकिस्तान पहले से ही आंतरिक कलह से जूझ रहा है और अब PoK में इस जनविद्रोह ने उसकी मुश्किलें सौ गुना बढ़ा दी हैं। मानवाधिकार संगठनों ने भी पाकिस्तानी सेना द्वारा नागरिकों पर किए जा रहे जुल्मों की कड़ी निंदा की है। अगर इस्लामाबाद ने तुरंत सेना को पीछे नहीं हटाया, तो यह बगावत पाकिस्तान के विभाजन की एक नई पटकथा लिख सकती है।