धर्म

सावन अमावस्या पर लगेगा साल का दुर्लभ सूर्य ग्रहण, जानें स्नान-दान और सूतक काल के नियम

सावन महीने का धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से विशेष महत्व होता है, और जब इस पवित्र माह में अमावस्या के दिन कोई बड़ी खगोलीय घटना घटित हो, तो उसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है। साल 2026 में सावन अमावस्या के पावन अवसर पर एक दुर्लभ सूर्य ग्रहण (Surya Grahan 2026) लगने जा रहा है। इस खगोलीय घटना को लेकर देश भर के श्रद्धालुओं और ज्योतिष प्रेमियों के मन में यह सवाल है कि ऐसी स्थिति में सावन अमावस्या पर स्नान, दान, पितृ तर्पण और पूजा-पाठ के नियम कैसे निभाए जाएंगे।

कब और कैसे लगेगा सावन अमावस्या का यह सूर्य ग्रहण

वैदिक पंचांग और खगोलीय गणना के अनुसार, यह विशेष सूर्य ग्रहण श्रावण मास की अमावस्या तिथि के दिन पड़ेगा। इस दौरान सूर्य और चंद्रमा की स्थिति के कारण आसमान में एक अद्भुत नजारा देखने को मिलेगा। चूंकि यह ग्रहण एक खगोलीय घटना के साथ-साथ धार्मिक नियमों से भी जुड़ा है, इसलिए इसके सूतक काल (Sutak Kaal) के नियमों को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्य ग्रहण शुरू होने से कुछ घंटे पहले सूतक काल प्रभावी हो जाता है, जिसके दौरान कई तरह के निषेध कार्य माने जाते हैं।

स्नान, दान और पितृ तर्पण पर क्या पड़ेगा असर

सावन अमावस्या के दिन पितरों की शांति के लिए तर्पण, पिंडदान और पवित्र नदियों में स्नान-दान का विशेष विधान है। ऐसे में सवाल उठता है कि ग्रहण काल के दौरान क्या ये धार्मिक अनुष्ठान किए जा सकते हैं या नहीं। ज्योतिषीय जानकारों का मानना है कि ग्रहण के सूतक काल और ग्रहण अवधि के दौरान मूर्ति स्पर्श, पूजा-पाठ और भोजन पकाने या खाने की मनाही होती है। हालांकि, ग्रहण समाप्त होने के बाद और पूरे विधि-विधान से शुद्धि करने के बाद दान-पुण्य और स्नान करना अत्यधिक फलदायी माना जाता है। इस दिन पवित्र नदियों के तट पर या घर पर ही गंगाजल डालकर स्नान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।

सूतक काल के दौरान गर्भवती महिलाएं और आम लोग रखें ये सावधानियां

सूर्य ग्रहण के दौरान नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव अधिक माना जाता है, इसलिए सूतक काल शुरू होने से लेकर ग्रहण के मोक्ष (समाप्ति) तक विशेष नियमों का पालन करना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को इस दौरान विशेष सावधानी बरतने और घर के अंदर रहने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा भोजन में तुलसी के पत्ते डालकर रखना, भगवान का मानसिक जाप करना और ग्रहण खत्म होने के बाद पूरे घर की शुद्धि करके नया भोजन ग्रहण करना शास्त्रों में अनिवार्य बताया गया है।

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