उत्तर प्रदेश

Ram Mandir Donation Audit: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एसआईटी का बड़ा एक्शन! ट्रस्ट के बैंक खातों और लॉकरों की जांच शुरू

अयोध्या समाचार: अयोध्या के भव्य और दिव्य राम मंदिर में रामलला के चरणों में अर्पित होने वाले चढ़ावे और दान राशि में हुई वित्तीय हेराफेरी के मामले में जांच एजेंसियों ने बड़ी और निर्णायक कार्रवाई शुरू कर दी है। सुप्रीम कोर्ट के कड़े निर्देशों के बाद गठित नई विशेष अन्वेषण टीम (SIT) ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सभी बैंक खातों, बही-खातों (Ledgers) और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की अयोध्या शाखा में रखे कीमती लॉकरों की गहन जांच तथा भौतिक सत्यापन (Physical Verification) का काम तेज कर दिया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए बैंक लॉकर में रखे सोने-चांदी की ईंटों, बहुमूल्य रत्नों और आभूषणों की विस्तृत वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी कराई गई है।

देशभर के करोड़ों राम भक्तों की आस्था से जुड़े इस संवेदनशील मामले में पहली बार इतने व्यापक स्तर पर सरकारी तंत्र और फॉरेंसिक ऑडिटर्स की टीम संयुक्त रूप से कागजी अभिलेखों और बैंक में जमा संपत्ति का मिलान कर रही है। इस कार्रवाई से अयोध्या से लेकर शासन-प्रशासन तक हड़कंप मच गया है।

स्टेट बैंक के लॉकर खोले गए: सोने-चांदी का भौतिक मिलान और वीडियोग्राफी

राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में गठित नई एसआईटी की कमान लखनऊ रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IG) किरण एस., अयोध्या रेंज के पुलिस उपमहानिरीक्षक (DIG) सोमेन बर्मा और अयोध्या के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) गौरव ग्रोवर संभाल रहे हैं। जांच टीम के साथ फॉरेंसिक ऑडिटर्स और वित्तीय मामलों के विशेषज्ञ भी तैनात किए गए हैं। एसआईटी के साथ समन्वय स्थापित करते हुए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन ने भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा में जाकर देर रात तक ट्रस्ट के लॉकरों का निरीक्षण किया।

लॉकर जांच की इस प्रक्रिया में बैंक अधिकारियों, वित्तीय विशेषज्ञों और ट्रस्ट के अधिकृत फोटोग्राफरों की मौजूदगी में हर एक कीमती धातु और आभूषण की सूची तैयार की गई। श्रद्धालुओं द्वारा समर्पित की गई सोने-चांदी की ईंटों, मुकुट, छत्र और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं का वजन कर उनकी तस्वीरों का मिलान टीसीएस (TCS) कंप्यूटर सिस्टम द्वारा जारी रसीदों और मुख्य रजिस्टर की प्रविष्टियों से किया जा रहा है। यदि किसी भी स्तर पर जमा संपत्ति और कागजी रिकॉर्ड में विसंगति पाई जाती है, तो उसे जांच का मुख्य आधार बनाया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख और नई एसआईटी का गठन

राम मंदिर परिसर के दान पात्रों और गणना कक्ष में हुई चोरी का यह सनसनीखेज मामला जून माह में उजागर हुआ था। प्राथमिक जांच में सीसीटीवी फुटेज के आधार पर यह पाया गया था कि दान गणना में शामिल कुछ बैंक कर्मचारी और सुपरवाइजर नोटों की गड्डियों व चढ़ावे के कीमती सामान को छिपाकर बाहर ले जा रहे थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को पहली एसआईटी गठित की थी, जिसने 23 जून को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी और 25 जून को इस मामले में औपचारिक प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई।

इसके बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में जनहित याचिका (PIL) दाखिल कर सीबीआई जांच और कैग (CAG) ऑडिट की मांग की गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट के मार्गदर्शन में जांच का दायरा बढ़ाते हुए वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नेतृत्व में नई एसआईटी का पुनर्गठन किया गया, ताकि ट्रस्ट की स्थापना से लेकर अब तक के पूरे दान संग्रह का फॉरेंसिक और फिजिकल ऑडिट किया जा सके।

आठ मुख्य आरोपी गिरफ्तार, मनी ट्रेल और संपत्ति जब्ती की कार्रवाई

पुलिस और एसआईटी द्वारा अब तक की गई कार्रवाई में आठ प्रमुख आरोपियों—अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। इनमें से कई आरोपी निजी और सरकारी बैंकों के कर्मचारी तथा नोट गिनने की प्रक्रिया में तैनात कर्मी थे।

जांच एजेंसी ने आरोपियों के घरों और परिसरों पर छापेमारी कर बड़ी मात्रा में नकदी, सोने-चांदी के आभूषण, महंगी जमीनों की रजिस्ट्री के कागजात और विभिन्न बैंकों की पासबुक जब्त की हैं। पुलिस फॉरेंसिक टीम आरोपियों के मोबाइल फोन से डिलीट किए गए व्हाट्सएप चैट और डेटा को रिकवर कर रही है, जिससे यह पता लगाया जा सके कि इस पूरे रैकेट के तार किन-किन बड़े चेहरों और बाहरी बिचौलियों से जुड़े हुए हैं। फॉरेंसिक टीम यह भी पता लगा रही है कि आरोपियों की आय से अधिक संपत्ति का सीधा संबंध मंदिर के चढ़ावे की चोरी से है या नहीं।

सुरक्षा व्यवस्था और दान गणना प्रक्रिया में बड़े खामियों का खुलासा

एसआईटी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में इस बात का स्पष्ट उल्लेख किया गया था कि मंदिर परिसर में दान पत्रों (हुंडियों) से नकदी एकत्र करने और उसकी गणना करने की मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का सख्ती से पालन नहीं किया जा रहा था। पहले दान पेटियों की गिनती के समय सुरक्षा जांच के सख्त नियम थे, लेकिन समय के साथ सुपरवाइजरी लापरवाही के कारण प्राइवेट सिक्योरिटी की चेकिंग और कर्मचारियों के परिधान (Uniform) बदलने जैसे सुरक्षा प्रोटोकॉल ढीले पड़ गए थे।

इसी लापरवाही का फायदा उठाकर कई महीनों तक चढ़ावे की राशि और कीमती धातुओं को चोरी किया जाता रहा। अब एसआईटी के सुझावों के आधार पर ट्रस्ट ने सुरक्षा और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कई नए नियम लागू करने का निर्णय लिया है। अब मंदिर परिसर में नकदी चढ़ाने के लिए दान पात्रों की संख्या सीमित की जाएगी और ऑनलाइन क्यूआर (QR) कोड पेमेंट तथा सीधे डिजिटल ट्रांसफर को बढ़ावा दिया जाएगा।

ट्रस्ट के बही-खातों और आपातकालीन बैठकों पर टिकीं देश की निगाहें

राम मंदिर चढ़ावा चोरी के इस महापाप ने पूरे देश के सनातन धर्मशास्त्रियों, श्रद्धालुओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं को झकझोर कर रख दिया है। इस पूरे प्रकरण के सामने आने के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अंदर भी प्रशासनिक बदलावों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। ट्रस्ट के पदाधिकारियों और प्रबंधकों की भूमिका की भी जांच की जा रही है कि आखिर इतने लंबे समय तक ऑडिट रिपोर्ट्स और सीसीटीवी फुटेज की निगरानी में अनदेखी क्यों हुई।

एसआईटी का स्पष्ट कहना है कि बैंक खातों, एफडी (FD), लॉकरों और मंदिर के मुख्य कोष का संपूर्ण मिलान पूरा होते ही एक विस्तृत जांच रिपोर्ट राज्य सरकार और अदालत के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। जब तक फॉरेंसिक ऑडिट और फिजिकल वेरिफिकेशन का काम पूरा नहीं हो जाता, तब तक बैंक खातों से लेकर लॉकरों तक की पल-पल की निगरानी जारी रहेगी।

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