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Heatwave and Lightning Declared Natural Calamity: लू और बिजली गिरना अब अधिसूचित ‘प्राकृतिक आपदा’, संसद में लगी मुहर; केंद्र सरकार से पीड़ित परिवारों को मिलेगा आर्थिक मुआवजा

नई दिल्ली: देश में हर साल भीषण गर्मी की वजह से चलने वाली 'लू' (Heatwave) और मानसून के दौरान 'आकाशीय बिजली' (Lightning Strikes) गिरने से होने वाली मौतों और जान-माल के नुकसान को लेकर केंद्र सरकार ने ऐतिहासिक फैसला लिया है। 4 अगस्त 2026 को संसद के उच्च सदन (राज्यसभा) में दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF) और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF) के नए दिशानिर्देशों के तहत अब लू और बिजली गिरने की घटनाओं को औपचारिक रूप से अधिसूचित 'प्राकृतिक आपदाओं' (Nationally Notified Disasters) की सूची में शामिल कर लिया गया है। 16वें वित्त आयोग (2026-31) की सिफारिशों के आधार पर उठाए गए इस कदम के बाद अब प्रभावित व्यक्तियों और पीड़ित परिवारों को सीधे सरकारी आपदा कोष से मुआवजा और आर्थिक सहायता मिल सकेगी।

इससे पहले बाढ़, चक्रवात, भूकंप, सूखा, भूस्खलन और ओलावृष्टि जैसी घटनाओं को ही अधिसूचित आपदाओं में गिना जाता था, जबकि लू और बिजली गिरने से होने वाले नुकसान पर मुआवजा देना पूरी तरह राज्य सरकारों की विवेकाधीन शक्तियों पर निर्भर था।

16वें वित्त आयोग की सिफारिश: क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला?

भारत में जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के कारण पिछले कुछ वर्षों में अत्यधिक गर्म दिनों और आकाशीय बिजली की घटनाओं में अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज की गई है। 16वें वित्त आयोग ने केंद्र सरकार को सौंपी अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया था कि लू और बिजली गिरना अब देश में सबसे अधिक जान लेने वाली मौसमी घटनाओं में शामिल हो चुके हैं।

आयोग की सिफारिशों को स्वीकार करते हुए सरकार ने इन दोनों घटनाओं को राष्ट्रीय आपदा राहत ढांचे (Disaster Relief Framework) का हिस्सा बना दिया है। इसके तहत राज्य सरकारों को अपने कुल आपदा कोष (SDRF) का उपयोग सीधे इन आपदाओं से निपटने, त्वरित चिकित्सा व्यवस्था करने, जागरूकता फैलाने और पीड़ित परिवारों को आर्थिक राहत देने में करने की पूर्ण कानूनी अनुमति मिल गई है।

किसे और कितना मिलेगा आर्थिक मुआवजा: जानें पूरी गाइडलाइन्स

नए दिशानिर्देशों के लागू होने के बाद अब पीड़ित परिवारों को सरकारी प्रक्रिया के तहत मुआवजा मिलना आसान और सुगम हो जाएगा:

आपदा की श्रेणी मुआवजा और राहत राशि (मानक SDRF/NDRF नियम)
जनहानि (मृत्यु होने पर) मृतक के निकटतम आश्रित (वारिस) को 4 लाख रुपये की अनुग्रह राशि (Ex-gratia)।
गंभीर रूप से घायल होने पर 40% से 60% विकलांगता पर 59,000 रुपये और 60% से अधिक पर 2 लाख रुपये सहायता।
अस्पताल में भर्ती (गंभीर स्थिति) 1 हफ्ते से अधिक समय तक इलाज चलने पर 16,000 रुपये तक की आर्थिक मदद।
मवेशी/पशुहानि (दुधारू पशु) गाय, भैंस की मौत पर 37,500 रुपये तक और गैर-दुधारू पशुओं पर 32,000 रुपये तक मुआवजा।
फसल का नुकसान 33% से अधिक फसल नष्ट होने पर सिंचित व असिंचित भूमि के आधार पर निर्धारित मुआवजा।

मुआवजा पाने के लिए जरूरी दस्तावेज और आवेदन की प्रक्रिया

लू लगने से मौत (Sunstroke Death) या आकाशीय बिजली गिरने की घटना के बाद परिजनों को मुआवजा प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित प्रक्रिया पूरी करनी होगी:

  • प्राथमिकी और पोस्टमार्टम रिपोर्ट: बिजली गिरने या लू से मौत के मामले में पुलिस रिपोर्ट (FIR/पंचनामा) और सरकारी अस्पताल की पोस्टमार्टम रिपोर्ट अनिवार्य होगी, जिससे मृत्यु का स्पष्ट कारण प्रमाणित हो सके।

  • राजस्व अधिकारी की रिपोर्ट: स्थानीय पटवारी या लेखपाल मौके का मुआयना कर अपनी सत्यापन रिपोर्ट (Verification Report) तैयार करेगा।

  • आवश्यक दस्तावेज: मृतक और वारिस का आधार कार्ड, मृत्यु प्रमाण पत्र, बैंक पासबुक और वारिस (उत्तराधिकारी) प्रमाण पत्र तहसील या ब्लॉक कार्यालय में जमा करना होगा।

  • खाते में सीधी राशि (DBT): सत्यापन के 30 से 60 दिनों के भीतर मुआवजा राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में ट्रांसफर (Direct Benefit Transfer) कर दी जाएगी।

सरकार के इस कदम से खासकर ग्रामीण इलाकों के किसानों, खेत मजदूरों और बाहर काम करने वाले गरीब तबके को बहुत बड़ी राहत मिलेगी, जो हर साल मौसम के इस कुदरती कहर का सबसे ज्यादा शिकार होते हैं।

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