सावन में लगेगा साल का आखिरी सूर्यग्रहण, उज्जैन के आचार्य से जानिए क्या शिव पूजा और रुद्राभिषेक पर लगेगी कोई रोक

पवित्र सावन का महीना चल रहा है और चारों तरफ भगवान शिव के जयकारों के साथ शिवालय गूंज रहे हैं। इसी बीच ज्योतिष जगत से एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है कि सावन के इस पावन महीने में इस साल का अंतिम सूर्यग्रहण लगने जा रहा है। सावन जैसे अति पवित्र और धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण मास में सूर्यग्रहण के योग बनने के बाद से देश भर के शिव भक्तों के मन में तरह-तरह की शंकाएं और सवाल उठने लगे हैं। खासकर लोगों के मन में यह बड़ा सवाल बना हुआ है कि क्या इस ग्रहण के दौरान भगवान शिव की पूजा-अर्चना, जलाभिषेक और रुद्राभिषेक पर कोई रोक लगेगी या नहीं।
कब और कितने बजे लगेगा साल का यह आखिरी सूर्यग्रहण
खगोल विज्ञान और पंचांग गणना के अनुसार, साल का यह दूसरा और अंतिम सूर्यग्रहण सावन माह के एक विशेष संयोग के दौरान लगने जा रहा है। इस दौरान सूतक काल के नियमों का पालन करना भी अनिवार्य माना जाता है। हालांकि, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह ग्रहण भारत में दृश्यमान (Visible) है या नहीं। यदि सूर्यग्रहण भारत में दिखाई नहीं देता है, तो इसका सूतक काल और धार्मिक प्रभाव यहां मान्य नहीं होगा, जिससे भक्तों को पूजा-पाठ में किसी भी प्रकार की बाधा का सामना नहीं करना पड़ेगा।
उज्जैन के आचार्यों की शिव भक्तों को खास सलाह
धार्मिक नगरी उज्जैन के प्रख्यात आचार्यों और ज्योतिषविदों का कहना है कि यदि सूर्यग्रहण भारत में नजर नहीं आता है, तो सावन मास में भगवान शिव की आराधना, महामृत्युंजय जाप और रुद्राभिषेक पर किसी भी तरह की रोक नहीं लगेगी। सावन का हर एक दिन शिव जी को समर्पित होता है, ऐसे में भक्त बिना किसी संकोच के विधि-विधान से अपने आराध्य की पूजा जारी रख सकते हैं। हालांकि, यदि सूतक काल प्रभावी होता है, तो मंदिरों के कपाट बंद रहते हैं और ग्रहण समाप्त होने के बाद शुद्धि के पश्चात ही अनुष्ठान किए जाते हैं।
धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व
सावन में सूर्यग्रहण का पड़ना ज्योतिषीय दृष्टिकोण से एक बड़ी खगोलीय घटना मानी जा रही है। जानकारों का मानना है कि ग्रहण काल के दौरान मंत्र जाप करना और दान-पुण्य करना अत्यंत फलदायी होता है। उज्जैन के विद्वानों ने स्पष्ट किया है कि भोलेनाथ के भक्तों को भ्रमित होने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है, वे अपनी नियमित पूजा और सावन के सोमवार का व्रत पूरी श्रद्धा के साथ जारी रख सकते हैं, क्योंकि भगवान की भक्ति पर किसी भी प्रकार के प्राकृतिक या खगोलीय बदलाव का नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता है यदि नियमों का सही पालन किया जाए।