ममता सरकार पर सीएजी (CAG) रिपोर्ट का बड़ा खुलासा, आदिवासियों के हक का करोड़ों का मुआवजा नहीं मिलने से मचा हड़कंप

देश के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की एक बेहद चौंकाने वाली और विस्फोटक रिपोर्ट सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में भारी भूचाल आ गया है। पश्चिम बंगाल की पूर्व ममता बनर्जी सरकार के कार्यकाल से जुड़ी इस सीएजी रिपोर्ट में आदिवासियों के कल्याण और उनके अधिकारों को लेकर बहुत गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में विभिन्न विकास परियोजनाओं और भूमि अधिग्रहण के दौरान विस्थापित हुए गरीब आदिवासियों को उनके हिस्से का करोड़ों रुपये का मुआवजा आज तक नहीं मिल पाया है। हाशिए पर जीवन जीने वाले इन आदिवासी परिवारों को न्याय और आर्थिक सहायता से वंचित रखे जाने के इस खुलासे के बाद से सरकारी महकमों की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल उठ रहे हैं, और यह मामला अब देश भर की सुर्खियों में छाया हुआ है।
सीएजी रिपोर्ट में हुआ आदिवासियों के अधिकारों के हनन का पर्दाफाश
भारत के सर्वोच्च ऑडिट संस्थान सीएजी (CAG) द्वारा पेश की गई इस नवीनतम रिपोर्ट में पश्चिम बंगाल के विभिन्न जिलों में चलाई गई सरकारी और औद्योगिक परियोजनाओं के दस्तावेजों की बेहद बारीकी से जांच की गई है। इस रिपोर्ट के अनुसार, जिन आदिवासी इलाकों में उद्योग, खदानें या अन्य बुनियादी ढांचे खड़े किए गए, वहां की मूल निवासी जनजातियों की जमीनों का अधिग्रहण तो बड़े पैमाने पर कर लिया गया, लेकिन उसके बदले मिलने वाले कानूनी और वित्तीय मुआवजे की राशि वास्तविक हकदारों तक कभी पहुंची ही नहीं। प्रशासनिक लालफीताशाही और उदासीनता के कारण गरीब आदिवासी अपने ही घरों और जमीनों से बेदखल होकर दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हो गए, जबकि कागजों में सब कुछ दुरुस्त दिखाया जाता रहा।
कैसे करोड़ों रुपये के मुआवजे से वंचित रहे गए गरीब आदिवासी लोग
सीएजी की जांच में यह बात खुलकर सामने आई है कि मुआवजे के वितरण में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं और भ्रष्टाचार हुआ है। जिन लोगों के पास जमीन के पुख्ता कागजात थे या जो अपनी आवाज उठाने में असमर्थ थे, उनके हिस्से का पैसा बिचौलियों या सरकारी तंत्र की लापरवाही की भेंट चढ़ गया। आदिवासियों को मुआवजे के वितरण के लिए जो विशेष पैकेज या पुनर्वास योजनाएं बनाई गई थीं, उनका क्रियान्वयन जमीन पर बेहद लाचार हालत में मिला। पारदर्शिता और जवाबदेही के अभाव के कारण करोड़ों रुपये के फंड का या तो दुरुपयोग हुआ या वे सरकारी खातों में ही फाइलों के बीच दबकर रह गए, जिससे आदिवासी समाज खुद को पूरी तरह ठगा हुआ महसूस कर रहा है।
राजनीतिक उठापटक और इंसाफ की उठ रही है बुलंद मांग
सीएजी रिपोर्ट के इन सनसनीखेज खुलासों के सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने ममता सरकार और स्थानीय प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। देश भर के आदिवासी संगठनों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इस गंभीर मामले की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच कराने और पीड़ित आदिवासियों को उनका एक-एक पाई मुआवजा ब्याज सहित तुरंत दिलवाने की जोरदार मांग की है। यह रिपोर्ट एक बार फिर इस कड़वी सच्चाई को उजागर करती है कि कैसे विकास के नाम पर समाज के सबसे कमजोर और शोषित वर्ग के अधिकारों को दरकिनार कर दिया जाता है, जिससे आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति का पारा और अधिक चढ़ने वाला है।