वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप से पहले क्या था एशिया का अपना टेस्ट वर्ल्ड कप? जिसमें सचिन-द्रविड़ की धाकड़ टीम भी नहीं जीत पाई थी खिताब

आज के दौर में जब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) द्वारा आयोजित वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) को टेस्ट क्रिकेट का सबसे बड़ा ताज माना जाता है, तो बहुत कम लोग यह जानते हैं कि एक समय ऐसा भी था जब एशियाई देशों के बीच महामुकाबले के लिए एक अलग ही टूर्नामेंट खेला जाता था। इसे 'एशियन टेस्ट चैंपियनशिप' (Asian Test Championship) कहा जाता था, जिसे एक तरह से उस दौर का एशिया का अपना 'टेस्ट वर्ल्ड कप' माना जा सकता है। इस अनूठी और रोमांचक प्रतियोगिता में भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका और बांग्लादेश जैसी एशियाई महाद्वीप की दिग्गज क्रिकेट टीमें आपस में भिड़ती थीं, ताकि यह तय हो सके कि एशियाई पिचों का असली सुल्तान कौन है। हालांकि, दिलचस्प बात यह है कि सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, सौरव गांगुली और अनिल कुंबले जैसे विश्वस्तरीय दिग्गजों से सजी भारतीय टीम इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में एक बार भी चैंपियन बनने का गौरव हासिल नहीं कर पाई थी, जो आज भी क्रिकेट इतिहास के पन्नों में एक बड़ा सवाल बना हुआ है।
क्या था एशियन टेस्ट चैंपियनशिप का फॉर्मेट और क्यों शुरू हुआ था यह टूर्नामेंट?
नब्बे के दशक के आखिरी सालों में एशियाई क्रिकेट परिषदों और बोर्ड्स के मन में यह विचार आया कि द्विपक्षीय सीरीज के अलावा एक ऐसा बहुराष्ट्रीय टेस्ट टूर्नामेंट होना चाहिए जो टेस्ट क्रिकेट के रोमांच को महाद्वीप में और अधिक बढ़ावा दे सके। इसी सोच के तहत साल 1999 में पहली एशियन टेस्ट चैंपियनशिप की शुरुआत की गई, जिसमें भारत, पाकिस्तान और श्रीलंका ने हिस्सा लिया था, जबकि बाद के संस्करणों में बांग्लादेश की टीम भी इसमें शामिल हो गई थी। इस प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक रेड बॉल क्रिकेट को एशियाई देशों के बीच अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना और टेस्ट फॉर्मेट में महाद्वीपीय वर्चस्व की जंग को मैदान पर उतारना था। हालांकि, लॉजिस्टिक्स की समस्याओं, व्यस्त अंतरराष्ट्रीय शेड्यूल और राजनीतिक तनावों के चलते यह टूर्नामेंट लंबे समय तक अपनी निरंतरता नहीं बचा सका और इतिहास के पन्नों में सिमट कर रह गया।
जब सचिन और राहुल द्रविड़ की टीम भी इस प्रतिष्ठित ट्रॉफी को जीतने से रह गई चूकी
उस दौर में जब भारतीय टेस्ट टीम दुनिया की सबसे खतरनाक और संतुलित टीमों में गिनी जाती थी, तब भी एशियन टेस्ट चैंपियनशिप का खिताब जीतना भारत के लिए एक अधूरा सपना ही बनकर रह गया। साल 1999 के पहले संस्करण में भारत ने फाइनल तक का सफर तय किया था, जहां कोलकाता के ईडन गार्डन्स में उनका मुकाबला चिर-प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान से हुआ था, लेकिन शोएब अख्तर की तूफानी गेंदबाजी और इंजमाम-उल-हक की पारियों के आगे भारतीय टीम को हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद भी जब-जब यह टूर्नामेंट खेला गया, भारतीय टीम अपनी पूरी ताकत झोंकने के बावजूद कभी भी विजेता का ताज नहीं पहन सकी, और श्रीलंका या पाकिस्तान जैसी टीमों ने बाजी मार ली। आज जब फैंस WTC के दौर में टेस्ट क्रिकेट की बात करते हैं, तो एशिया की इस पुरानी और रोमांचक प्रतियोगिता की यादें क्रिकेट प्रेमियों के जेहन में ताजा हो जाती हैं।