बेंगलुरु वोटर लिस्ट से कटेंगे लाखों नाम? SIR प्रक्रिया में 66 लाख से अधिक मतदाता शिफ्ट और 16 लाख से ज्यादा पाए गए मृत

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु समेत पूरे राज्य में चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) अभियान ने मतदाताओं के बीच हलचल बढ़ा दी है। भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय द्वारा राज्यभर के 5.54 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं की घर-घर जाकर गहन जांच की जा रही है। इस जांच का मुख्य उद्देश्य राज्य की मतदाता सूची को पूरी तरह से पारदर्शी, अद्यतन और त्रुटिरहित बनाना है। हालांकि, सत्यापन के आंकड़े सामने आने के बाद बेंगलुरु शहर और राज्य के अन्य हिस्सों में चिंता बढ़ गई है, क्योंकि लाखों मतदाताओं के नाम प्रारूप मतदाता सूची से बाहर होने की कगार पर पहुंच गए हैं। मुख्य चुनाव अधिकारी वी. अंबुकुमार के अनुसार, सत्यापन प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे मतदाता पाए गए हैं जो अपने पुराने पते पर नहीं रह रहे हैं या जिनका निधन हो चुका है।
ASDDO कैटेगरी में फंसे लाखों मतदाता: जानिए क्या हैं आंकड़े
चुनाव आयोग के बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) द्वारा किए गए डोर-टू-डोर सत्यापन में मतदाताओं को मुख्य रूप से एएसडीडीओ (ASDDO – Absent, Shifted, Dead, Duplicate, and Others) यानी अनुपस्थित, स्थायी रूप से स्थानांतरित, मृतक, दोहरे नाम वाले और अन्य श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है। पूरे कर्नाटक राज्य में 1.11 करोड़ से अधिक मतदाताओं (लगभग 20 प्रतिशत) को एएसडीडीओ या अनमैप्ड श्रेणी में चिह्नित किया गया है। वहीं, यदि केवल ग्रेटर बेंगलुरु क्षेत्र की बात की जाए, तो यहां स्थिति और भी चौकाने वाली है। बेंगलुरु की कुल 1.03 करोड़ पंजीकृत मतदाता आबादी में से लगभग 49.42 लाख मतदाता (यानी करीब 47.5 प्रतिशत) एएसडीडीओ श्रेणी में आ गए हैं। राज्यभर के आंकड़ों का विश्लेषण करें तो 66 लाख से अधिक मतदाता ऐसे पाए गए हैं जो अपना पुराना निवास स्थान छोड़कर कहीं और शिफ्ट हो चुके हैं, जबकि 16 लाख से अधिक मतदाता ऐसे दर्ज हैं जिनकी मृत्यु हो चुकी है। इसके अलावा लाखों की संख्या में अनुपस्थित और दोहरे पंजीकरण वाले मामले भी सामने आए हैं।
ग्रेटर बेंगलुरु के 10 विधानसभा क्षेत्रों में आधे से ज्यादा वोटरों का अस्तित्व अधर में
बेंगलुरु के प्रशासनिक क्षेत्रों में मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान शहरी गतिशीलता (अर्बन माइग्रेशन) का बड़ा असर देखने को मिला है। शहर के 28 विधानसभा क्षेत्रों में से 10 से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों में 50 प्रतिशत से ज्यादा मतदाताओं के नाम हटाने या नोटिस भेजने की नौबत आ गई है। बोम्मनहल्ली विधानसभा क्षेत्र में सर्वाधिक 57.08 प्रतिशत मतदाताओं को एएसडीडीओ श्रेणी में डाला गया है। इसी तरह विजयनगर में 53.66 प्रतिशत, दासरहल्ली में 53.55 प्रतिशत, बीटीएम लेआउट में 53.43 प्रतिशत और सीवी रमन नगर में 53.25 प्रतिशत मतदाता इस समीक्षा के दायरे में आ चुके हैं। इसके अलावा बेंगलुरु दक्षिण में 3.84 लाख और महादेवपुरा में 3.13 लाख मतदाताओं के नाम प्रारूप सूची से बाहर किए जाने की स्थिति में हैं। येलहांका विधानसभा क्षेत्र में सबसे कम 38.01 प्रतिशत मतदाताओं पर असर पड़ा है, लेकिन फिर भी यह आंकड़ा 1.81 लाख से अधिक है। आईटी हब और तेजी से विकसित होते आवासीय इलाकों में लोगों के बार-बार घर बदलने के कारण यह संख्या इतनी बढ़ी है।
कैसे हुई सत्यापन प्रक्रिया और बूथ लेवल अधिकारियों की कार्यशैली
इस वृहद अभियान को अंजाम देने के लिए चुनाव आयोग ने राज्यभर में 59 हजार से अधिक बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) को तैनात किया है। ये अधिकारी घर-घर जाकर मतदाताओं और उनके परिजनों का भौतिक सत्यापन कर रहे हैं। जिन मामलों में मतदाता मृत पाए गए, वहां परिजनों से मृत्यु प्रमाणपत्र एकत्र किए गए या पड़ोसियों के बयान दर्ज कर पंचनामा (महज़र) तैयार किया गया। वहीं जो लोग स्थायी रूप से किसी अन्य शहर, राज्य या दूसरे विधानसभा क्षेत्र में शिफ्ट हो चुके हैं, उनके पड़ोसियों के बयान के आधार पर रिपोर्ट दर्ज की गई है। इसके अलावा, कई इलाकों में 2002 की ऐतिहासिक मतदाता सूची से डेटा का मिलान (मैपिंग) न हो पाने के कारण भी लाखों प्रविष्टियां 'अनमैप्ड' रह गई हैं। इस पूरी प्रक्रिया में मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों (BLAs) को भी शामिल किया गया है ताकि किसी भी योग्य नागरिक का नाम गलती से न कट सके।
गलत नाम दर्ज होने पर क्या करें? जानिए चुनाव आयोग की सुधार प्रक्रिया
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि केवल एएसडीडीओ श्रेणी में नाम आने का मतलब यह नहीं है कि मतदाता का मताधिकार स्वतः ही समाप्त हो गया है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने नागरिकों को राहत देते हुए बताया कि यदि किसी योग्य नागरिक का नाम गलती से अनुपस्थित या शिफ्टेड श्रेणी में दर्ज हो गया है, तो वे इसे तुरंत दुरुस्त करा सकते हैं। राज्य चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर विधानसभा वार और पोलिंग बूथ वार एएसडीडीओ सूची देखी जा सकती है। नागरिक अपने बूथ लेवल अधिकारी (BLO) से संपर्क करके अपनी प्रविष्टि का सत्यापन कर सकते हैं। आयोग ने यह भी आश्वासन दिया है कि राजनीतिक दलों के साथ साझा की गई सूचियों की समीक्षा के बाद ही 17 अगस्त को ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी, जिससे पात्र लोगों को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलेगा।
8 अगस्त तक का समय और फॉर्म 6 के जरिए नाम जोड़ने का मौका
जो मतदाता अपना पुराना ठिकाना बदल चुके हैं और अब नए पते पर निवास कर रहे हैं, उनके पास मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने के लिए चुनाव आयोग ने विशेष व्यवस्था की है। यदि कोई नागरिक नए पते पर शिफ्ट हुआ है या 1 अक्टूबर 2026 तक 18 वर्ष की आयु पूरी कर रहा है, तो वह 'फॉर्म 6' (Form 6) भरकर अपना नाम नए निर्वाचन क्षेत्र में जुड़वा सकता है। एनआरआई मतदाताओं के लिए 'फॉर्म 6A' की सुविधा उपलब्ध है। आयोग ने 8 अगस्त तक शत-प्रतिशत सत्यापन और डिजिटाइजेशन पूरा करने का लक्ष्य रखा है। इसके बाद 17 अगस्त को प्रकाशित होने वाली ड्राफ्ट सूची के बाद भी 15 सितंबर या दावों व आपत्तियों की निर्धारित अवधि तक आवेदन किए जा सकेंगे। प्रक्रिया के तहत 11 मान्यता प्राप्त पहचान दस्तावेजों (जैसे पासपोर्ट, आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, बैंक पासबुक आदि) में से कोई भी एक दस्तावेज प्रस्तुत करके नागरिक अपने मताधिकार को सुरक्षित रख सकते हैं।