विदेश

शहबाज-मुनीर के सऊदी पहुंचते ही मची खलबली: हूती विद्रोहियों ने दागे ड्रोन और मिसाइल

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की जोड़ी जब भी किसी विदेशी दौरे पर निकलती है, तो कोई न कोई सनसनीखेज वाकया जरूर सामने आता है। ताजा मामला सऊदी अरब का है, जहां इन दोनों पाकिस्तानी दिग्गजों के कदम रखते ही एक बड़ा हमला हो गया। यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के आसमान को दहलाते हुए ताबड़तोड़ ड्रोन और मिसाइलें दाग दीं। इस अचानक हुए खौफनाक हमले ने जहां एक तरफ खाड़ी देश की सुरक्षा व्यवस्था को अलर्ट पर ला दिया, वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान की ओर से बड़े-बड़े दावों के साथ की जा रही रणनीतिक और डिफेंस डील्स की हवा पूरी तरह से निकल गई।

सऊदी अरब की धरती पर कैसे मचा हड़कंप और क्या था हूतियों का निशाना?

पाकिस्तान के हुक्मरान इस उम्मीद के साथ सऊदी अरब पहुंचे थे कि वे वहां से भारी-भरकम आर्थिक मदद और महत्वपूर्ण रक्षा समझौते हासिल कर लेंगे, लेकिन ऐन वक्त पर हुए इस मिसाइल और ड्रोन हमले ने पूरे दौरे के रंग में भंग डाल दिया। जैसे ही हूती विद्रोहियों ने सऊदी ठिकानों को निशाना बनाकर हमले किए, वैसे ही मेहमान बनकर पहुंचे पाकिस्तानी नेतृत्व की सुरक्षा और कूटनीतिक बैठकों पर संकट के बादल मंडराने लगे। इस अप्रत्याशित हमले ने यह साबित कर दिया कि मध्य-पूर्व के भू-राजनीतिक समीकरण कितने संवेदनशील हैं और पाकिस्तान जिस बड़े पैमाने पर डिफेंस पार्टनरशिप के सपने देख रहा था, जमीनी हकीकत उससे कोसों दूर है।

पाकिस्तान की कूटनीति और आर्थिक खोखलेपन की खुली पोल

इस पूरी घटना के बाद से अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि पाकिस्तान की विदेश नीति और रक्षा कूटनीति का स्तर किस कदर गिर चुका है। एक तरफ जहां पाकिस्तान अपने देश के भीतर गंभीर आर्थिक बदहाली और भुखमरी से जूझ रहा है, वहीं दूसरी तरफ विदेशों में जाकर भी उसके नेताओं को इस तरह की अफरातफरी और सुरक्षा संकट का सामना करना पड़ रहा है। सऊदी अरब में हुए इस ड्रोन हमले ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि पाकिस्तान के हुक्मरान चाहे जितने भी दावे कर लें, लेकिन वैश्विक मंच पर उनकी साख और प्रभाव लगातार कमजोर होता जा रहा है।

 

Back to top button