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अमेरिकी हमले के बाद भी ईरान ने खोला शांति का दरवाजा, पेज़ेश्कियान ने रखी बड़ी शर्त: जानें मध्य पूर्व संकट पर तेहरान का रुख

मध्य पूर्व में अमेरिका और इज़राइल के साथ जारी भीषण सैन्य संघर्ष के बावजूद ईरान ने कूटनीतिक समाधान की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया है। हाल ही में हुए अमेरिकी हमलों के बाद ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने दुनिया के सामने तेहरान का रुख स्पष्ट करते हुए शांति का रास्ता खुला रखने की बात कही है। राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान ने आधिकारिक बयानों और वैश्विक नेताओं के साथ बातचीत में जोर देकर कहा कि ईरान किसी भी दबाव या जबरन आत्मसमर्पण के आगे नहीं झुकेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि अमेरिका और उसके सहयोगी क्षेत्र में स्थायी शांति चाहते हैं, तो उन्हें ईरान के संप्रभु अधिकारों का सम्मान करना होगा और भविष्य में किसी भी सैन्य आक्रामकता को रोकने के लिए ठोस शर्तें माननी होंगी।

शांति वार्ता के लिए राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान की तीन प्रमुख शर्तें

ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने युद्ध समाप्त करने और शांति वार्ता शुरू करने के लिए तीन मुख्य शर्तें रखी हैं। पहली शर्त के तहत अमेरिका और पश्चिमी देशों को ईरान के वैध राष्ट्रीय एवं व्यापारिक अधिकारों को औपचारिक रूप से मान्यता देनी होगी। दूसरी प्रमुख शर्त में अमेरिकी और इजराइली हमलों के कारण ईरान को हुए भारी ढांचागत व आर्थिक नुकसान के लिए उचित मुआवजे (Reparations) के भुगतान की मांग शामिल है। इसके अलावा, तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण शर्त भविष्य में ईरान की संप्रभुता पर किसी भी प्रकार की सैन्य आक्रामकता को रोकने के लिए मजबूत अंतरराष्ट्रीय गारंटी (Firm International Guarantees) की है। पेज़ेश्कियान ने स्पष्ट किया कि जब तक इन मूलभूत शर्तों पर सहमति नहीं बनती, तब तक कोई भी स्थायी शांति समझौता संभव नहीं होगा।

'न सरेंडर करेंगे, न शांति से पीछे हटेंगे': तेहरान की दोहरी रणनीति

ईरान के सरकारी प्रसारण चैनल पर बोलते हुए राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान ने अपनी सरकार और सशस्त्र बलों के बीच पूर्ण समन्वय का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि एक राष्ट्र के रूप में जीवित रहने और संप्रभुता बनाए रखने के लिए यह जानना जरूरी है कि "कब लड़ना है और कब शांति का रास्ता चुनना है"। पेज़ेश्कियान ने उन दावों को भी खारिज किया जिसमें ईरान के भीतर नेतृत्व स्तर पर मतभेद की बात कही जा रही थी। उन्होंने साफ किया कि कूटनीतिक समझौते की पहल देश के शीर्ष नेतृत्व की सहमति से की गई है। तेहरान का मानना है कि यदि अमेरिका समझौते से पीछे हटता है या अपनी प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन करता है, तो ईरान भी अपनी ओर से सैन्य जवाब देने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र रहेगा।

ग्लोबल एनर्जी मार्केट और वैश्विक राजनीति पर प्रभाव

अमेरिका और ईरान के बीच जारी इस तनातनी ने दुनिया भर के ऊर्जा बाजारों को झकझोर कर रख दिया है। रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) और मध्य पूर्व के समुद्री मार्गों पर तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में भारी अनिश्चितता बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पेज़ेश्कियान का यह बयान अमेरिका पर कूटनीतिक दबाव बनाने की एक सोची-समझी रणनीति है। अमेरिका जहां एक ओर सैन्य बल का प्रदर्शन कर रहा है, वहीं दूसरी ओर लंबे युद्ध से बचने के कूटनीतिक विकल्प भी तलाश रहा है। ऐसे में ईरान द्वारा रखी गई ये शर्तें आने वाले दिनों में होने वाली अंतरराष्ट्रीय वार्ताओं के रुख को तय करेंगी।

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