Monsoon Skincare Tips: मानसून में चिपचिपाहट और पिंपल्स को कहें बाय-बाय! चेहरे की खोई चमक लौटाएंगे ये 3 होममेड नेचुरल फेस स्क्रब, दमक उठेगी त्वचा

बारिश का मौसम प्रचंड गर्मी से राहत जरूर दिलाता है, लेकिन हवा में मौजूद अत्यधिक नमी हमारी त्वचा के लिए कई तरह की समस्याएं लेकर आती है। मानसून के दौरान वातावरण में ह्यूमिडिटी बढ़ने से चेहरे पर पसीना और तेल (सिबम) ज्यादा बनने लगता है। इसके कारण स्किन पोर्स यानी रोमछिद्र बंद हो जाते हैं, जिससे ब्लैकहेड्स, व्हाइटहेड्स, मुहासे और त्वचा में रूखापन या बेजानपन आने लगता है। बाजार में मिलने वाले केमिकल युक्त स्क्रब कई बार मानसून की संवेदनशील त्वचा को छील देते हैं या रेडनेस का कारण बन जाते हैं। ऐसे में घर पर बने प्राकृतिक फेस स्क्रब स्किन को बिना नुकसान पहुंचाए अंदर से साफ करते हैं और खोया हुआ प्राकृतिक ग्लो वापस लाते हैं।
मानसून में त्वचा को खास देखभाल और एक्सफोलिएशन की जरूरत क्यों होती है?
मानसून के दिनों में हवा में नमी का स्तर बहुत अधिक होता है, जिसके कारण धूल-मिट्टी और प्रदूषण के कण त्वचा की सतह पर आसानी से चिपक जाते हैं। अगर समय-समय पर डेड स्किन सेल्स यानी मृत त्वचा को न हटाया जाए, तो चेहरे पर बैक्टीरिया पनपने लगते हैं जो आगे चलकर मुंहासों का रूप ले लेते हैं। नेचुरल एक्सफोलिएशन त्वचा की ऊपरी परत से जमी गंदगी और एक्स्ट्रा ऑयल को हटाता है। जब पोर्स साफ रहते हैं, तो स्किन सांस ले पाती है और आप जो भी मॉइश्चराइजर या सिरम लगाते हैं, वह त्वचा में गहराई तक अवशोषित हो पाता है। रसोई में मौजूद प्राकृतिक सामग्रियां त्वचा के पीएच संतुलन को बिगाड़े बिना प्राकृतिक पोषण देती हैं।
1. कॉफी और दही का स्क्रब: ऑयली स्किन और टैनिंग से तुरंत राहत
कॉफी एक बेहतरीन नेचुरल एक्सफोलिएटर है जो डेड स्किन को हटाने में रामबाण की तरह काम करती है। इसमें मौजूद कैफीन और एंटी-ऑक्सीडेंट्स त्वचा के ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाते हैं, जिससे चेहरे पर तुरंत निखार आता है। दही में लैक्टिक एसिड पाया जाता है जो त्वचा को जेंटली साफ करता है और मानसून की वजह से हुए कालेपन (टैनिंग) को दूर करता है।
इस स्क्रब को बनाने के लिए एक चम्मच बारीक पिसी हुई कॉफी में एक चम्मच ताजा दही और कुछ बूंदें नींबू के रस की मिलाएं। इस मिश्रण को चेहरे और गर्दन पर लगाकर 2 से 3 मिनट तक हल्के हाथों से सर्कुलर मोशन में मसाज करें। इसके बाद इसे 5 मिनट के लिए छोड़ दें और फिर सादे पानी से धो लें। यह स्क्रब ऑयली स्किन वालों के लिए बेहद फायदेमंद है क्योंकि यह एक्स्ट्रा ऑयल को कंट्रोल करता है।
2. ओट्स और शहद का स्क्रब: सेंसिटिव त्वचा के लिए जेंटल क्लींजर
अगर आपकी स्किन मानसून के मौसम में बहुत ज्यादा संवेदनशील हो जाती है या उसमें जलन और रेडनेस की समस्या रहती है, तो ओट्स और शहद का स्क्रब आपके लिए सबसे बेस्ट विकल्प है। ओट्स में एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण होते हैं जो त्वचा की जलन को शांत करते हैं और अतिरिक्त तेल को सोख लेते हैं। वहीं शहद एक नेचुरल ह्यूमेक्टेंट है, जो त्वचा में नमी को लॉक करता है और इसमें मौजूद एंटी-बैक्टीरियल गुण पिंपल्स पैदा करने वाले बैक्टीरिया को खत्म करते हैं।
इसे बनाने के लिए दो चम्मच ओट्स को हल्का दरदरा पीस लें। अब इसमें एक चम्मच शुद्ध शहद और एक चम्मच गुलाब जल या कच्चा दूध मिलाकर गाढ़ा पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को चेहरे पर लगाकर हल्के हाथों से स्क्रब करें। यह मृत कोशिकाओं को धीरे से निकालता है और त्वचा को बिना रूखा किए एकदम सॉफ्ट और ग्लोइंग बनाता है। हफ्ते में दो बार इसका इस्तेमाल त्वचा की चमक बनाए रखता है।
3. चावल का आटा और नीम का स्क्रब: पिंपल्स और ब्लैकहेड्स का काल
मानसून में पिंपल्स और बंद रोमछिद्रों से निपटने के लिए चावल का आटा और नीम का कॉम्बिनेशन चमत्कारी माना जाता है। चावल का आटा कोरियाई ब्यूटी सीक्रेट्स में भी बेहद लोकप्रिय है। यह एक बेहतरीन एक्सफोलिएटर है जो जिद्दी ब्लैकहेड्स और व्हाइटहेड्स को जड़ से निकालता है। नीम में पावरफुल एंटी-फंगल और एंटी-बैक्टीरियल तत्व होते हैं जो बारिश के मौसम में होने वाले स्किन इंफेक्शन और मुंहासों को रोकते हैं।
इस स्क्रब को तैयार करने के लिए एक चम्मच चावल के आटे में आधा चम्मच नीम का पाउडर या नीम की ताजी पत्तियों का पेस्ट मिलाएं। इसमें पेस्ट बनाने के लिए आवश्यकतानुसार गुलाब जल मिलाएं। इस स्क्रब को नाक, ठुड्डी और माथे पर जहां ब्लैकहेड्स अधिक होते हैं, वहां ध्यानपूर्वक 2-3 मिनट मसाज करें। नीम त्वचा को इंफेक्शन से बचाएगा और चावल का आटा पोर्स को टाइट करने में मदद करेगा।
मानसून में फेस स्क्रब का इस्तेमाल करते समय बरतें ये जरूरी सावधानियां
प्राकृतिक स्क्रब पूरी तरह से सुरक्षित होते हैं, फिर भी मानसून के दौरान इनका इस्तेमाल करते समय कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। कभी भी चेहरे को जोर-जोर से न रगड़ें, क्योंकि इससे त्वचा पर सूक्ष्म खरोंचें (माइक्रो-टीयर्स) आ सकती हैं। स्क्रबिंग हमेशा हल्के हाथों से गोलाकार दिशा में ही करनी चाहिए। इसके अलावा, हफ्ते में 1 या 2 बार से ज्यादा एक्सफोलिएशन न करें, अति करने से त्वचा का प्राकृतिक तेल खत्म हो सकता है।