Restaurant Serve Bad Food Penalty: खराब खाना परोसने पर रेस्टोरेंट ओनर को कितनी हो सकती है सजा और कितना जुर्माना?

बाहर किसी रेस्टोरेंट, कैफे या होटल में खाना खाते समय यदि आपकी थाली में बासी, घटिया, कॉकरोच या कीड़े वाला खाना निकल आए, तो अक्सर लोग बहस करके या बिल कटवाकर शांत बैठ जाते हैं। लेकिन भारतीय कानून के तहत ग्राहकों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण भोजन पाने का पूरा वैधानिक अधिकार है। यदि कोई रेस्टोरेंट मालिक या फूड ऑपरेटर ग्राहक की सेहत के साथ खिलवाड़ करता है, तो उसे न केवल भारी-भरकम मुआवजा (Compensation) देना पड़ सकता है, बल्कि FSSAI नियमों के तहत जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है। हाल ही में बेंगलुरु कंज्यूमर फोरम (Consumer Forum Bengaluru) द्वारा दिए गए एक ऐतिहासिक फैसले ने इस पूरे कानूनी गणित को फिर से चर्चा में ला दिया है।
बेंगलुरु का चर्चित मामला: एक सूप और डोसे से कैसे फंस गया नामी रेस्टोरेंट?
बेंगलुरु के कंज्यूमर कोर्ट में पहुंचा यह मामला एक जागरूक ग्राहक की कानूनी लड़ाई की मिसाल है। पीड़ित ग्राहक ने बेंगलुरु के एक नामी रेस्टोरेंट में खाना ऑर्डर किया था, जिसमें उन्हें बासी और फंगस लगा हुआ खाना परोसा गया। जब ग्राहक ने इसकी शिकायत रेस्टोरेंट मैनेजर से की, तो कर्मचारियों ने गलती मानने के बजाय ग्राहक के साथ बदसलूकी की और पूरा बिल वसूल लिया। ग्राहक ने खाने की तस्वीर, बिल की रसीद और डॉक्टर की मेडिकल पर्ची (फूड पॉइजनिंग का प्रमाण) के साथ 'जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग' (District Consumer Commission) का दरवाजा खटखटाया।
बेंगलुरु कंज्यूमर फोरम ने मामले की सुनवाई करते हुए इसे सेवा में गंभीर लापरवाही (Deficiency of Service) और अनुचित व्यापार प्रथा (Unfair Trade Practice) माना। कोर्ट ने आदेश जारी करते हुए रेस्टोरेंट मालिक को आदेश दिया कि वह:
-
ग्राहक से लिया गया पूरा बिल ब्याज सहित वापस करे।
-
मानसिक प्रताड़ना और शारीरिक कष्ट के एवज में ₹50,000 का मुआवजा (Compensation) दे।
-
मुकदमे के खर्च (Litigation Cost) के रूप में ₹10,000 अलग से चुकाए।
कंज्यूमर फोरम ने स्पष्ट किया कि खाने-पीने की चीजों में लापरवाही किसी भी व्यक्ति के स्वास्थ्य के लिए जानलेवा साबित हो सकती है, इसलिए ऐसे मामलों में रेस्टोरेंट की ओर से कोई ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
FSSAI और खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2006 के तहत सजा व जुर्माने का प्रावधान
उपभोक्ता अदालत के मुआवजे के अलावा, 'खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006' (Food Safety and Standards Act, 2006) के तहत किसी भी फूड बिजनेस ऑपरेटर (FBO) पर आपराधिक व सिविल कार्रवाई की जा सकती है:
-
अमानक या घटिया खाना (Substandard Food): यदि परोसा गया खाना सेहत के लिए खराब या घटिया गुणवत्ता का पाया जाता है, तो धारा 51 के तहत रेस्टोरेंट पर ₹5 लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
-
असुरक्षित/मिलावटी भोजन (Unsafe Food): यदि भोजन में कीड़े, फंगस या विषैले तत्व मिलते हैं जिससे व्यक्ति बीमार पड़ सकता है, तो धारा 59 के तहत रेस्टोरेंट मालिक को 6 महीने से लेकर 6 साल तक की जेल और ₹1 लाख से ₹5 लाख तक की सजा का प्रावधान है।
-
भोजन से मृत्यु या गंभीर चोट होने पर: यदि खराब खाने (Severe Food Poisoning) के कारण किसी ग्राहक की मृत्यु हो जाती है या वह गंभीर रूप से बीमार हो जाता है, तो दोषी मालिक को 7 साल से लेकर आजीवन कारावास (Life Imprisonment) की सजा और ₹10 लाख तक का भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है।
कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट 2019: प्रोडक्ट लायबिलिटी (Product Liability) का नियम
नए 'उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019' के लागू होने के बाद ग्राहकों के अधिकार और मजबूत हो गए हैं। इसमें 'प्रोडक्ट लायबिलिटी' का प्रावधान जोड़ा गया है। इसके तहत यदि कोई रेस्टोरेंट, ई-कॉमर्स फूड डिलीवरी ऐप (जैसे Swiggy या Zomato) या क्लाउड किचन आपको खराब खाना सप्लाई करता है, तो आप केवल रिफंड ही नहीं, बल्कि उसके कारण हुए स्वास्थ्य नुकसान के लिए कंज्यूमर कोर्ट में मुआवजे का दावा ठोक सकते हैं।
यदि आपको मिले खराब खाना, तो तुरंत करें ये 4 कानूनी काम
यदि आपके साथ कभी किसी होटल या ऑनलाइन डिलीवरी में ऐसा वाकया होता है, तो घबराने के बजाय कानूनी प्रक्रिया अपनाएं:
-
सबूत जुटाएं: खराब या मिलावटी खाने की फोटो और वीडियो तुरंत अपने फोन में रिकॉर्ड करें।
-
बिल संभाल कर रखें: रेस्टोरेंट का पक्का बिल (Tax Invoice) या ऑनलाइन डिलीवरी का डिजिटल इनवॉइस सुरक्षित रखें।
-
डॉक्टर की रिपोर्ट: यदि खराब खाना खाने से तबीयत बिगड़ती है, तो डॉक्टर का पर्चा और दवाइयों का बिल संभालें (यह कोर्ट में सबसे बड़ा सबूत बनता है)।
-
शिकायत दर्ज कराएं: आप राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (National Consumer Helpline – NCH) के टोल-फ्री नंबर 1915 पर कॉल करके या 'NCH App' तथा FSSAI के 'FoSCoS' पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करवा सकते हैं।