उत्तर प्रदेश

तिलक, तराजू और तलवार…’ से लेकर ‘पंडित-पासी-पासवान…’ तक, जातीय नारों के चक्रव्यूह में फिर उलझने लगी यूपी की सियासत

उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर अपने पुराने और सबसे प्रभावशाली हथियार यानी 'जातीय समीकरणों और नारों' के दौर में लौटती हुई नजर आ रही है। राज्य में होने वाले आगामी चुनावों के मद्देनजर सभी राजनीतिक दलों ने अपनी कमर कस ली है और एक बार फिर से जातिगत भावनाओं को साधने के लिए नए-पुराने नारों का दौर शुरू हो गया है। नब्बे के दशक के उस दौर से लेकर जब उत्तर प्रदेश की राजनीति में सामाजिक न्याय के नाम पर तीखे नारे गूंजते थे, लेकर आज के आधुनिक राजनीतिक परिवेश तक, सियासत की बिसात पर मोहरें तेजी से बदली जा रही हैं ताकि सत्ता की चाबी हासिल की जा सके।

बहुजन समाज पार्टी का पुराना इतिहास और नारों की राजनीति

भारतीय राजनीतिक इतिहास में 1990 के दशक का वह दौर कोई नहीं भूल सकता जब बहुजन समाज पार्टी (BSP) के शुरुआती विस्तार के समय 'तिलक, तराजू और तलवार, इनको मारो जूते चार…' जैसा आक्रामक नारा बहुजन आंदोलन की पहचान बना था। इस नारे ने राज्य की सवर्ण जातियों और पिछड़ों-दलिलों के बीच एक गहरी राजनीतिक लकीर खींच दी थी। हालांकि, समय के साथ राजनीति ने करवट ली और मायावती ने 'सर्व समाज' को जोड़ने की रणनीति अपनाते हुए "हाथी नहीं गणेश है, ब्रह्मा विष्णु महेश है…" और "ब्राह्मण शंख बजाएगा, हाथी बढ़ता जाएगा" जैसे नारों के साथ अपनी वैचारिक धुरी में ऐतिहासिक बदलाव किया। यह बदलाव इस बात का प्रमाण था कि यूपी की सत्ता तक पहुंचने के लिए किसी एक वर्ग के विरोध से ज्यादा सभी जातियों का समीकरण साधना जरूरी है।

बदलते दौर में नए समीकरण: 'पंडित-पासी-पासवान' और क्षेत्रीय दलों की चाल

समय के पहिए के साथ अब उत्तर प्रदेश के चुनावी रण में नए क्षेत्रीय और उप-जाति आधारित समीकरण आकार ले रहे हैं। राजनीतिक दल अब दलितों और सवर्णों के साथ-साथ उप-जातियों (Sub-castes) को साधने के लिए माइक्रो-मैनेजमेंट (Micro-management) पर जोर दे रहे हैं। पासी और पासवान जैसे प्रभावी समुदायों के साथ अन्य जातियों के गठजोड़ को रिझाने के लिए नए राजनीतिक नारे गढ़े जा रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि राज्य की कुल विधानसभा सीटों पर हार-जीत तय करने में इन जातियों की निर्णायक भूमिका होती है, यही वजह है कि आज हर छोटा-बड़ा दल जातिगत लामबंदी के जरिए अपने पाले में वोट खींचने की जुगत में लगा हुआ है।

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