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वर्क फ्रॉम होम करें या छुट्टी पर जाएं कश्मीरी पंडित, स्वतंत्रता दिवस से पहले क्यों आया सरकार का यह बड़ा आदेश

देश एक तरफ जहां अपने 80वें स्वतंत्रता दिवस के जश्न की तैयारियों में पूरी तरह जुटा हुआ है, वहीं दूसरी तरफ जम्मू-कश्मीर से एक बेहद संवेदनशील और गंभीर खबर सामने आ रही है। घाटी में कार्यरत कश्मीरी पंडितों पर एक बार फिर लक्षित हत्याओं यानी 'टारगेटेड किलिंग' का बड़ा खतरा मंडराने लगा है। सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन के सामने इस वक्त सबसे बड़ी चुनौती अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की है। आइए जानते हैं कि आखिर सरकार को ऐसा कड़ा निर्देश क्यों जारी करना पड़ा है।

आतंकी संगठन की धमकी के बाद सरकार का एहतियाती कदम

रिपोर्ट्स के मुताबिक, आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के एक कथित मुखौटा संगठन 'यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल' की तरफ से कश्मीरी पंडितों को एक खुली धमकी मिली है। 7 अगस्त 2026 को जारी किए गए इस कथित धमकी भरे संदेश में कश्मीरी पंडित समुदाय के सदस्यों के नाम और उनके निजी टेलीफोन नंबरों का खुलेआम खुलासा किया गया है।

इस गंभीर खतरे के मद्देनजर प्रशासन ने एहतियात के तौर पर सैकड़ों कश्मीरी पंडित सरकारी कर्मचारियों को 25 अगस्त तक दफ्तर न आने और वर्क फ्रॉम होम करने या सीधे छुट्टी पर चले जाने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही उन्हें स्वतंत्रता दिवस के राजकीय कार्यक्रमों की ड्यूटी से भी तत्काल प्रभाव से छूट दे दी गई है। हालांकि, धमकी भरे इस पत्र की प्रामाणिकता की अभी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से प्रशासन कोई भी जोखिम उठाने के मूड में नहीं है।

लीक हुईं निजी जानकारियां और सुरक्षा बलों का बड़ा एक्शन

पनुन कश्मीर संगठन के अनुसार, इस बार धमकियों में विशिष्ट कर्मचारियों के नाम, उनके कार्यस्थल, फोन नंबर और यहां तक कि उनके परिवारों की सटीक जानकारियां भी ऑनलाइन लीक की गई हैं। इस खुलासे के बाद घाटी में दहशत का माहौल बन गया है और कई कर्मचारी अपनी जान बचाने के लिए पहले ही सुरक्षित ठिकाने यानी जम्मू की तरफ रवाना हो चुके हैं।

इस स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा बलों ने युद्धस्तर पर अभियान छेड़ दिया है। घाटी में 22 जुलाई से चलाए जा रहे एक विशाल सुरक्षा अभियान के तहत अब तक 3,000 से अधिक संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है। पुलिस का कहना है कि ये सभी 'ओवर ग्राउंड वर्कर्स' यानी ओजीडब्ल्यू हैं जो छिपे तौर पर आतंकवादियों की मदद कर रहे थे। इसके अलावा, अमरनाथ यात्रा को भी सुरक्षा और अन्य कारणों के चलते समय से पहले 9 अगस्त को ही समाप्त कर दिया गया है।

साल 2022 के डरावने जख्म और ताजा हालात

आपको बता दें कि साल 2010 में 'प्रधानमंत्री स्पेशल रोजगार पैकेज' के तहत करीब 6,000 कश्मीरी पंडितों को घाटी में सरकारी नौकरियां दी गई थीं ताकि उनका पुनर्वास किया जा सके। हालांकि, साल 2022 में भी आतंकवादियों ने इन कर्मचारियों को निशाना बनाया था, जिसमें 5 लोगों की जान चली गई थी। इसके विरोध में कश्मीरी पंडितों ने करीब 7 महीने तक लंबा धरना-प्रदर्शन किया था।

हाल ही में 22 जुलाई को अनंतनाग में एक पुलिसकर्मी की हत्या और कुलगाम में प्रवासी मजदूरों पर हुए हमलों ने इस डर को और ज्यादा गहरा कर दिया है। फिलहाल, जम्मू-कश्मीर पुलिस और तमाम सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही हैं और पंडित बस्तियों तथा अल्पसंख्यकों के रिहायशी इलाकों में गश्त को बेहद कड़ा कर दिया गया है।

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