टाटा ग्रुप के शेयरों में भूचाल, एक झटके में डूबे 44,000 करोड़ रुपये, टीसीएस को सबसे बड़ा फटका

भारतीय शेयर बाजार में टाटा ग्रुप (Tata Group) के निवेशकों के लिए बुधवार का दिन भारी उथल-पुथल भरा रहा। टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन (N Chandrasekaran) द्वारा अपने पद पर दोबारा पुनर्नियुक्ति नहीं चाहने के फैसले के बाद बाजार में बिकवाली हावी हो गई। इस बड़ी खबर का असर टाटा ग्रुप की कंपनियों पर तुरंत देखने को मिला और कारोबार के दौरान निवेशकों की तगड़ी वेल्थ स्वाहा हो गई।
कारोबारी सत्र के दौरान टाटा समूह की लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइज़ेशन (Market Capitalization) करीब 44,000 करोड़ रुपये से अधिक घट गया। इस अचानक आई गिरावट से निवेशकों में चिंता का माहौल है और बाजार के जानकार इस पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।
TCS को हुआ सबसे ज्यादा नुकसान
टाटा ग्रुप की इस भारी-भरकम गिरावट में देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज यानी टीसीएस (TCS) को सबसे ज्यादा चोट पहुंची है। कुल नुकसान का सबसे बड़ा हिस्सा अकेले टीसीएस का रहा है, जिसके शेयरों में करीब 4 प्रतिशत से ज्यादा की जोरदार गिरावट दर्ज की गई।
टीसीएस के अलावा टाटा मोटर्स, टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, टाटा स्टील, टाटा पावर और तेजस नेटवर्क्स जैसे दिग्गज शेयर भी लाल निशान के साथ बंद हुए। ग्रुप के लगभग सभी प्रमुख शेयरों में बिकवाली का दबाव साफ तौर पर देखा गया।
क्यों गिरे टाटा ग्रुप के शेयर?
बाजार जानकारों के अनुसार, एन. चंद्रशेखरन के टाटा संस के चेयरमैन पद पर आगे बने रहने को लेकर स्पष्टता की कमी और उनके आगामी उत्तराधिकार को लेकर असमंजस की स्थिति ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है। कारोबारी जगत में इस तरह के बड़े नेतृत्व संबंधी घटनाक्रमों का असर अक्सर शॉर्ट-टर्म में शेयरों की चाल पर देखने को मिलता है।
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मार्केट कैप में बड़ी गिरावट: दो सत्रों के भीतर टाटा समूह की कंपनियों को 44,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का चूना लगा है।
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निवेशकों की प्रतिक्रिया: अनिश्चितता के माहौल के चलते शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स ने मुनाफावसूली या बिकवाली करना बेहतर समझा।
आगे क्या रह सकती है बाजार की चाल?
हालांकि यह गिरावट मुख्य रूप से एक कारोबारी निर्णय और नेतृत्व से जुड़ी खबरों के कारण आई है, लेकिन लॉन्ग-टर्म निवेशकों के लिए टाटा ग्रुप के फंडामेंटल्स अब भी मजबूत माने जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि स्थिति सामान्य होने के बाद शेयर बाजार अपनी चाल मौलिक आधार पर तय करेगा, तब तक निवेशकों को पैनिक बिकवाली से बचना चाहिए।