धर्म

हनुमान जी के कितने भाई थे? रामचरितमानस में नहीं बल्कि इस प्राचीन पुराण में छिपा है यह बड़ा रहस्य

हिंदू धर्म और सनातन संस्कृति में संकटमोचन भगवान हनुमान को कलियुग के सबसे जागृत और पूजनीय देवताओं में से एक माना जाता है। उनकी महिमा और असीम पराक्रम के बारे में हर कोई जानता है, लेकिन उनके निजी जीवन और परिवार से जुड़े कई ऐसे रहस्य हैं जिनसे आज भी अधिकांश लोग पूरी तरह अनजान हैं। महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण और महाकवि तुलसीदास की पवित्र 'रामचरितमानस' में भगवान श्री राम के परम भक्त हनुमान जी के जीवन के कई प्रसंगों का विस्तार से वर्णन मिलता है, लेकिन क्या आपने कभी यह सोचा है कि पवनसुत हनुमान के कितने भाई थे? यदि आपके मन में भी यह सवाल है, तो इसका जवाब आपको मुख्य रामायण में नहीं बल्कि प्राचीन 'ब्रह्मांड पुराण' में मिलता है, जहां हनुमान जी के परिवार और उनके भाइयों का विस्तृत उल्लेख किया गया है।

कैसे हुआ था हनुमान जी का जन्म और क्या है पौराणिक मान्यता

पौराणिक कथाओं और वाल्मीकि रामायण के किष्किंधा कांड के अनुसार, संकटमोचन हनुमान जी का जन्म माता अंजना और वानरराज केसरी के घर हुआ था, जिसके कारण उन्हें 'अंजनी पुत्र' और 'केसरी नंदन' के नाम से भी पुकारा जाता है। इसके अलावा, 'शिव महापुराण' में हनुमान जी को सीधे तौर पर भगवान शिव का ग्यारहवां रुद्रावतार माना गया है। धर्म ग्रंथों के अनुसार, भगवान हनुमान का इस पृथ्वी पर अवतरण त्रेतायुग में भगवान विष्णु के अवतार प्रभु श्री राम के कार्यों में सहायता करने और धर्म की रक्षा के उद्देश्य से हुआ था। बालपन से ही हनुमान जी के पास असीम शक्तियां, अद्भुत बुद्धि और अखाद्य पराक्रम था, और उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी भगवान राम की अनन्य भक्ति में समर्पित कर दी थी।

ब्रह्मांड पुराण में मिलता है हनुमान जी के पांच भाइयों का उल्लेख

हिंदू धर्म के सबसे प्राचीन और प्रामाणिक ग्रंथों में गिने जाने वाले 'ब्रह्मांड पुराण' में वानर वंश की वंशावली का बेहद सूक्ष्म और विस्तृत वर्णन किया गया है। इसी प्राचीन पुराण में इस बात का भी खुलासा किया गया है कि भगवान हनुमान अकेले नहीं थे, बल्कि उनके पांच सगे भाई और भी थे। इन सभी भाइयों के नाम मतिमान, श्रुतिमान, केतुमान, गतिमान और धृतिमान बताए गए हैं। इन सभी भाइयों में हमारे बजरंगबली सबसे बड़े थे और माता अंजना के ज्येष्ठ पुत्र होने के नाते वे अत्यंत बलशाली और तेजवान भी थे। पुराणों के अनुसार, जहां हनुमान जी के अन्य पांचों भाइयों ने सामान्य वैवाहिक जीवन चुनते हुए गृहस्थ जीवन व्यतीत किया, वहीं महाबली हनुमान ने अपनी इच्छा से आजीवन अखंड बाल ब्रह्मचारी रहने का संकल्प लिया और पूरी सृष्टि के कल्याण में अपना जीवन बिता दिया।

रामचरितमानस में क्यों नहीं मिलता हनुमान जी के परिवार का जिक्र

अक्सर लोगों के मन में यह सवाल जरूर आता है कि जब हनुमान जी के इतने भाई थे, तो इसका जिक्र तुलसीदास जी की 'रामचरितमानस' या महर्षि वाल्मीकि की 'रामायण' में क्यों देखने को नहीं मिलता है। इसका मुख्य कारण यह है कि ये दोनों ही महाग्रंथ मुख्य रूप से मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के जीवन चरित्र, उनकी लीलाओं और उनके आदर्शों को समर्पित हैं। इन ग्रंथों का मुख्य उद्देश्य प्रभु श्री राम की कथा का बखान करना है, इसलिए इनमें केवल उन्हीं पात्रों और घटनाओं को प्रमुखता से स्थान दिया गया है जो सीधे तौर पर श्रीराम की कथा से जुड़े हुए थे। यही वजह है कि हनुमान जी के परिवार और भाइयों का वर्णन इन लोकप्रिय ग्रंथों में नहीं मिलता, बल्कि इसके प्रमाण हमें प्राचीन पुराणों की ऋचाओं में सुरक्षित मिलते हैं।

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