धर्म

सावन का दूसरा भौम प्रदोष व्रत कब? जानिए पूजा का सटीक शुभ मुहूर्त, सरल विधि और जमीन-जायदाद के विवाद से मुक्ति पाने के अचूक उपाय

देवों के देव महादेव की आराधना का महापर्व सावन (श्रावण) मास अपने चरम पर है। शिव भक्तों के लिए सावन का प्रत्येक दिन पुण्यदायी होता है, लेकिन प्रदोष व्रत का महत्व शास्त्रों में सबसे विशिष्ट माना गया है। सावन मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को पड़ने वाला दूसरा प्रदोष व्रत बेहद खास संयोग लेकर आ रहा है। जब प्रदोष व्रत मंगलवार के दिन पड़ता है, तो इसे 'भौम प्रदोष व्रत' कहा जाता है। हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, भौम प्रदोष व्रत भगवान शिव और मंगल देव की संयुक्त कृपा प्राप्त करने का सबसे दुर्लभ अवसर होता है। मान्यता है कि इस दिन पूरे विधि-विधान से शिव साधना करने पर व्यक्ति को भूमि, भवन, संपत्ति के विवादों और भारी से भारी कर्ज के बोझ से मुक्ति मिल जाती है।

सावन के दूसरे प्रदोष व्रत की तिथि और शुभ मुहूर्त

पंचांग गणना के अनुसार, सावन मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि का प्रारंभ और प्रदोष काल का विशेष संयोग शाम के समय निर्मित हो रहा है। प्रदोष व्रत में मुख्य पूजा सूर्यास्त के बाद के समय यानी 'प्रदोष काल' में की जाती है।

  • त्रयोदशी तिथि का समय: सावन शुक्ल त्रयोदशी तिथि का प्रभाव प्रदोष काल में रहेगा।

  • प्रदोष काल पूजा मुहूर्त: सायं 06:52 PM से रात्रि 09:08 PM तक (कुल अवधि लगभग 2 घंटे 16 मिनट)।

  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:58 AM से दोपहर 12:50 PM तक (दिन के समय संकल्प लेने के लिए उत्तम)।

  • अमृत काल मुहूर्त: शाम की पूजा से पूर्व संध्या काल में ध्यान और जप के लिए विशेष फलदायी।

भौम प्रदोष व्रत का धार्मिक एवं ज्योतिषीय महत्व

मंगलवार को पड़ने के कारण यह भौम प्रदोष कहलाता है। मंगल ग्रह को भूमि का कारक (भूमिपुत्र) माना गया है, जबकि भगवान शिव समस्त ब्रह्मांड के स्वामी और मंगल के अधिष्ठाता देव हैं। इसलिए जिन लोगों की कुंडली में मांगलिक दोष है, जिनका जमीन-जायदाद या पैतृक संपत्ति को लेकर कोई कानूनी विवाद चल रहा है, या जो लंबे समय से अपना घर बनाने का प्रयास कर रहे हैं, उनके लिए सावन का यह भौम प्रदोष व्रत किसी वरदान से कम नहीं है। इस दिन व्रत रखकर शाम के समय रुद्राभिषेक करने से मंगल के अशुभ प्रभाव शांत होते हैं और अचल संपत्ति के योग बनते हैं।

भूमि बाधा और कर्ज मुक्ति के अचूक उपाय

यदि आप जमीन-जायदाद की अड़चनों, फ्लैट की रजिस्ट्री में देरी या कोर्ट-कचहरी के विवादों से जूझ रहे हैं, तो भौम प्रदोष की शाम को ये विशेष उपाय जरूर करें:

  • शहद और लाल चंदन से अभिषेक: शिवलिंग पर तांबे के लोटे से गंगाजल मिश्रित जल अर्पित करें। इसके बाद शहद और लाल चंदन का लेप लगाएं। इससे मंगल दोष शांत होता है और भूमि विवाद सुलझते हैं।

  • 21 बेलपत्र और लाल कनेर के पुष्प: 21 साबुत बेलपत्रों पर ॐ नमः शिवाय लिखकर और लाल कनेर के फूलों के साथ शिवलिंग पर अर्पित करें।

  • ऋणमुक्तेश्वर शिव स्तोत्र का पाठ: यदि सिर पर भारी कर्ज है, तो प्रदोष काल में घी का चौमुखी दीपक जलाकर 'ऋणमुक्तेश्वर महादेव स्तोत्र' या 'मंगल कवच' का कम से कम तीन बार पाठ करें।

  • मसूर की दाल का दान: पूजा के पश्चात किसी जरूरतमंद या ब्राह्मण को लाल मसूर की दाल और गुड़ का दान करने से आर्थिक तंगी दूर होती है।

प्रदोष व्रत की संपूर्ण और प्रामाणिक पूजा विधि

व्रत के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि से निवृत्त हों और सफेद या हल्के लाल वस्त्र धारण करें। घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित कर हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर भौम प्रदोष व्रत का संकल्प लें। दिनभर निराहार रहें या आवश्यकतानुसार फलाहार ग्रहण करें।

शाम को प्रदोष काल शुरू होने से 15 मिनट पहले दोबारा स्वच्छ होकर पूजा स्थल पर बैठें। शिवलिंग को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल) से स्नान कराएं और फिर शुद्ध जल से अभिषेक करें। इसके बाद शिवलिंग पर भस्म, सफेद व लाल चंदन, अक्षत, धतूरा, भांग, जनेऊ, आंकड़े के फूल और बेलपत्र अर्पित करें। माता पार्वती को लाल चुनरी और सुहाग सामग्री चढ़ाएं। इसके उपरांत धूप-दीप जलाकर सावन प्रदोष व्रत की कथा सुनें या पढ़ें। अंत में 'ॐ नमः शिवाय' और 'महामृत्युंजय मंत्र' की कम से कम 108 बार माला जपें। भगवान शिव और माता गौरी की आरती उतारकर सभी में प्रसाद वितरित करें और अगले दिन सूर्योदय के बाद व्रत का पारण करें।

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