‘दुबले-पतले हैं तो न रहें बेफिक्र’: क्या बिना मोटापे और बिना बढ़े वजन के भी बढ़ सकता है बैड कोलेस्ट्रॉल? जानिए ‘स्किनी फैट’ का रहस्य

आमतौर पर समाज में यह धारणा बहुत गहराई से बैठी हुई है कि हाई कोलेस्ट्रॉल (High Cholesterol), हाई ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियां केवल उन्हीं लोगों को होती हैं जिनका वजन बहुत ज्यादा है या जो मोटापे (Obesity) के शिकार हैं। अक्सर जो लोग दुबले-पतले होते हैं या जिनका बॉडी मास इंडेक्स (BMI) बिल्कुल सामान्य होता है, वे यह मान बैठते हैं कि उनका शरीर अंदर से पूरी तरह स्वस्थ है और वे बेहिचक कुछ भी तला-भुना या मीठा खा सकते हैं। कार्डियोलॉजिस्ट्स और एंडोक्रिनोलॉजिस्ट्स के अनुसार, यह सोचना एक बेहद खतरनाक और जानलेवा भ्रम साबित हो सकता है। चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, पतले लोगों के खून में भी 'बैड कोलेस्ट्रॉल' (LDL) और ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर उतना ही खतरनाक रूप से बढ़ सकता है जितना कि किसी अत्यधिक वजन वाले व्यक्ति में। कई बार पतले लोग वजन न बढ़ने के कारण नियमित हेल्थ चेकअप से बचते हैं और यही लापरवाही उन्हें अचानक हार्ट अटैक या कार्डियक अरेस्ट के मुहाने पर लाकर खड़ा कर देती है।
कोलेस्ट्रॉल का शरीर में गणित: वजन नहीं, लिवर और मेटाबॉलिज्म तय करते हैं स्तर
कोलेस्ट्रॉल मोम जैसा एक चिपचिपा वसायुक्त पदार्थ (Lipid) होता है, जो हमारी कोशिकाओं की दीवारों के निर्माण, विटामिन डी के संश्लेषण और जरूरी हार्मोन्स के उत्पादन के लिए आवश्यक है।
अधिकांश लोग यह नहीं जानते कि हमारे शरीर में मौजूद कुल कोलेस्ट्रॉल का लगभग 75 से 80 प्रतिशत हिस्सा हमारा लिवर (Liver) खुद बनाता है, जबकि केवल 20 से 25 प्रतिशत कोलेस्ट्रॉल हमारे भोजन से आता है। इसका मतलब यह है कि कोलेस्ट्रॉल का स्तर सीधे तौर पर आपकी चमड़ी के नीचे दिखने वाली चर्बी (Subcutaneous Fat) से नहीं, बल्कि आपके आंतरिक मेटाबॉलिज्म, लिवर की कार्यप्रणाली और जेनेटिक्स से नियंत्रित होता है। यदि किसी पतले व्यक्ति का लिवर आवश्यकता से अधिक एलडीएल कोलेस्ट्रॉल बना रहा है या उसे खून से साफ करने में असमर्थ है, तो उसका कोलेस्ट्रॉल स्तर तेजी से बढ़ने लगेगा।
पतले लोगों में हाई कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के 5 सबसे बड़े और अनदेखे कारण
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, दुबले-पतले शरीर में कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के पीछे मुख्य रूप से निम्नलिखित वैज्ञानिक कारण जिम्मेदार होते हैं:
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1. जेनेटिक्स और 'फैमिलियल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया' (Familial Hypercholesterolemia): यह एक आनुवंशिक स्थिति है जो माता-पिता से बच्चों में स्थानांतरित होती है। इस विकार से पीड़ित व्यक्ति का लिवर जन्मजात रूप से खून में से एलडीएल (खराब कोलेस्ट्रॉल) को फिल्टर करने में अक्षम होता है। ऐसे लोग चाहे कितने भी पतले हों, कम खाते हों या रोजाना कसरत करते हों, उनके शरीर में एलडीएल का स्तर 200 से 300 mg/dL या उससे भी ऊपर पहुंच सकता है।
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2. 'स्किनी फैट' (Skinny Fat / TOFI) सिंड्रोम: मेडिकल भाषा में इसे TOFI (Thin Outside, Fat Inside) कहा जाता है। ऐसे लोग बाहर से तो बेहद पतले और छरहरे दिखते हैं, लेकिन उनकी मांसपेशियों (Muscle Mass) का घनत्व बहुत कम होता है और उनके आंतरिक अंगों—जैसे लिवर, दिल, आंतों और अग्न्याशय (Pancreas)—के चारों तरफ हानिकारक 'विसरल फैट' (Visceral Fat) जमा हो जाता है। यह आंतरिक वसा लगातार खून में ट्राइग्लिसराइड्स और खराब कोलेस्ट्रॉल छोड़ती रहती है।
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3. गलत खान-पान और ट्रांस फैट का अत्यधिक सेवन: पतले लोगों को अक्सर लगता है कि वे पिज्जा, बर्गर, समोसे, पेस्ट्री, फ्राइड स्नैक्स या पैकेज्ड फूड कितना भी खा लें, उनका वजन नहीं बढ़ेगा। वजन भले ही न बढ़े, लेकिन भोजन में मौजूद 'ट्रांस फैट' और 'सैचुरेटेड फैट' सीधे धमनियों में जाकर प्लाक (Plaque) के रूप में चिपकने लगते हैं।
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4. गतिहीन दिनचर्या और सिगरेट-शराब: जो पतले लोग दिन भर बैठे रहते हैं (Sedentary Lifestyle), व्यायाम नहीं करते या धूम्रपान (Smoking) करते हैं, उनके शरीर में 'गुड कोलेस्ट्रॉल' (HDL) का स्तर तेजी से गिर जाता है। सिगरेट में मौजूद निकोटीन धमनियों की भीतरी परत को नुकसान पहुंचाता है, जिससे कोलेस्ट्रॉल का जमना और आसान हो जाता है।
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5. थायरॉयड विकार और क्रोनिक स्ट्रेस: अंडरएक्टिव थायरॉयड (हाइपोथायरायडिज्म) की स्थिति में शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है, जिससे कोलेस्ट्रॉल का ब्रेकडाउन नहीं हो पाता। इसके अलावा, अत्यधिक तनाव के कारण निकलने वाला 'कोर्टिसोल हार्मोन' (Cortisol) भी लिवर को अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल बनाने के लिए उत्तेजित करता है।
'स्किनी फैट' सिंड्रोम और जेनेटिक्स का खतरा: जानिए पतले शरीर में कैसे जम जाता है नसों को ब्लॉक करने वाला मोम जैसा कोलेस्ट्रॉल
हाई कोलेस्ट्रॉल के छिपे हुए लक्षण: पतले लोग कैसे पहचानें खतरा?
कोलेस्ट्रॉल को मेडिकल की दुनिया में 'साइलेंट किलर' (Silent Killer) कहा जाता है, क्योंकि शुरुआती चरणों में इसके कोई स्पष्ट लक्षण महसूस नहीं होते। जब धमनियां 60 से 70 प्रतिशत तक ब्लॉक हो जाती हैं, तब जाकर कुछ शारीरिक संकेत दिखाई देते हैं:
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आंखों के पास पीले धब्बे (Xanthelasma): आंखों की पलकों के कोनों पर हल्के पीले रंग के मोम जैसे उभार या चकत्ते उभरना, जो त्वचा के नीचे लिपिड जमा होने का संकेत हैं।
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कॉर्निया के चारों तरफ सफेद घेरा (Arcus Senilis): आंखों की पुतली (Cornea) के बाहरी किनारे पर सफेद या भूरे रंग का गोल रिंग दिखाई देना।
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सीढ़ियां चढ़ने पर सांस फूलना और छाती में भारीपन: सामान्य कामकाज के दौरान अचानक अत्यधिक थकान होना, दिल की धड़कन तेज होना या सीने के बीच में खिंचाव महसूस होना।
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पैरों और तलवों में सुन्नता या दर्द (Peripheral Artery Disease): चलते समय पिंडलियों में दर्द होना या पैरों का बार-बार ठंडा पड़ना, जो पैरों की नसों में रक्त प्रवाह बाधित होने का संकेत है।
पतले लोगों को कब और कौन सी जांच करानी चाहिए?
डॉक्टरों की सलाह है कि 20 वर्ष की आयु के बाद हर वयस्क को, चाहे उसका वजन कम हो या ज्यादा, कम से कम हर 3 से 5 साल में एक बार 'लिपिड प्रोफाइल टेस्ट' (Lipid Profile Blood Test) जरूर कराना चाहिए।
यदि परिवार में किसी को कम उम्र में हार्ट अटैक या स्ट्रोक का इतिहास रहा हो, तो यह जांच हर साल 12 घंटे के उपवास (Fasting) के बाद कराई जानी चाहिए। एक सामान्य लिपिड प्रोफाइल रिपोर्ट में:
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टोटल कोलेस्ट्रॉल: 200 mg/dL से कम होना चाहिए।
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एलडीएल (खराब कोलेस्ट्रॉल): 100 mg/dL से कम (हार्ट पेशेंट्स के लिए 70 से कम)।
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एचडीएल (अच्छा कोलेस्ट्रॉल): पुरुषों में 40 mg/dL और महिलाओं में 50 mg/dL से अधिक।
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ट्राइग्लिसराइड्स: 150 mg/dL से कम होना चाहिए।
कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने के लिए 5 जरूरी उपाय
घुलनशील फाइबर (Soluble Fiber) को डाइट में बढ़ाएं: अपने भोजन में ओट्स, इसबगोल की भूसी, दालें, बीन्स, सेब, अलसी के बीज और हरी पत्तेदार सब्जियां शामिल करें। घुलनशील फाइबर आंतों में स्पंज की तरह काम करके कोलेस्ट्रॉल को सोख लेता है और शरीर से बाहर निकाल देता है।
स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और लीन मसल बिल्डिंग: पतले लोगों को केवल कार्डियो (दौड़ने) के बजाय वेट ट्रेनिंग और रेजिस्टेंस एक्सरसाइज पर ध्यान देना चाहिए। शरीर में मांसपेशियों का निर्माण होने से विसरल फैट खत्म होता है और मेटाबॉलिज्म मजबूत होता है।
स्वस्थ वसा (Healthy Fats) का चयन करें: रिफाइंड ऑयल और वनस्पति घी के बजाय सरसों का तेल, ऑलिव ऑयल, अखरोट, बादाम और चिया सीड्स का सीमित मात्रा में सेवन करें, जो एचडीएल (गुड कोलेस्ट्रॉल) को बढ़ाने में मदद करते हैं।
धूम्रपान और अल्कोहल से दूरी: सिगरेट छोड़ना एचडीएल कोलेस्ट्रॉल को तुरंत बढ़ाने का सबसे प्रभावी तरीका है।
डॉक्टरी सलाह से स्टेटिन्स (Statins) का नियमित सेवन: यदि जेनेटिक्स की वजह से कोलेस्ट्रॉल बहुत अधिक है और डाइट-कसरत से कम नहीं हो रहा, तो बिना किसी हिचकिचाहट के डॉक्टर द्वारा निर्धारित कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली दवाओं (Statins) का सेवन करें।
बाहरी रूप से दुबला या छरहरा होना आंतरिक स्वास्थ्य और मजबूत दिल की गारंटी नहीं है। अपने शरीर के बाहरी आकार पर भरोसा करने के बजाय रक्त रिपोर्ट पर भरोसा करें और समय-समय पर अपनी लिपिड प्रोफाइल जांच करवाकर अपने दिल को सुरक्षित रखें।