PSB Confluence 2026: युवाओं के लिए सरकारी बैंकिंग में बड़े बदलाव, 2 अक्टूबर से शुरू होगा राष्ट्रव्यापी विशेष अभियान

वित्तीय सेवा विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय पीएसबी कॉन्फ्लुएंस 2026 के समापन सत्र में देश के सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की कार्यप्रणाली को नए युग के अनुरूप ढालने के लिए एक ऐतिहासिक खाका पेश किया गया। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के शीर्ष नेतृत्व को संबोधित करते हुए स्पष्ट संदेश दिया कि आने वाला दशक भारत की युवा शक्ति का है। इसलिए पारंपरिक कार्यशैली से बाहर निकलकर सरकारी बैंकों को देश के युवाओं और जेन-जी पीढ़ी की वित्तीय आकांक्षाओं को पूरा करने का मुख्य केंद्र बनना होगा। बैंकों की वित्तीय स्थिति आज ऐतिहासिक रूप से बेहद मजबूत है और एनपीए निचले स्तर पर है, ऐसे में इस स्थिरता और मजबूती का सीधा लाभ देश के युवाओं को आधुनिक और निर्बाध सेवाएं देने में उठाया जाना चाहिए।
2 अक्टूबर से राष्ट्रव्यापी 'बैंकिंग फॉर यूथ' महाअभियान
वित्त मंत्री ने सभी सरकारी बैंकों को निर्देश दिया है कि 2 अक्टूबर 2026 यानी गांधी जयंती के अवसर पर पूरे देश में एक महीने का विशेष अभियान 'बैंकिंग फॉर यूथ' शुरू किया जाए। इस अभियान का मुख्य केंद्र 16 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग के युवा होंगे। वित्त मंत्री ने जोर देकर कहा कि बैंकों को अब युवाओं के शाखाओं तक आने का इंतजार करने की पुरानी परिपाटी को छोड़ना होगा। इसके स्थान पर बैंक अधिकारियों को सक्रिय रूप से कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, पॉलिटेक्निक और कौशल विकास केंद्रों में पहुंचकर कैंप लगाने होंगे। इस राष्ट्रव्यापी आउटरीच का उद्देश्य युवाओं को शुरुआती उम्र से ही औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ना, उनके शून्य-शेष बचत खाते खोलना और उन्हें जिम्मेदार वित्तीय नागरिक बनाना है।
पारंपरिक छवि से आगे: डिजिटल और 24×7 बैंकिंग अनुभव
संबोधन के दौरान इस बात को विशेष रूप से रेखांकित किया गया कि युवा पीढ़ी के बीच निजी बैंकों को उनकी आधुनिक तकनीक और यूजर-फ्रेंडली इंटरफेस के कारण अधिक आकर्षक माना जाता है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को इस धारणा को बदलना होगा और अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को पूरी तरह से अपग्रेड करना होगा। आज का युवा स्मार्टफोन पर तत्काल समाधान और 24 घंटे उपलब्ध सेवाओं की मांग करता है। इसलिए बैंकों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सहज मोबाइल ऐप्लिकेशन और तुरंत लोन स्वीकृति जैसी उन्नत तकनीकों को अपने सिस्टम का अभिन्न हिस्सा बनाना होगा ताकि सरकारी बैंकों की पहचान एक आधुनिक, गतिशील और विश्वसनीय संस्थान के रूप में स्थापित हो सके।
'कैंपस से करियर' तक आजीवन वित्तीय साझेदारी
बैंकों को अपने दृष्टिकोण में मूलभूत परिवर्तन लाते हुए 'कैंपस से करियर' के सिद्धांत को अपनाना होगा। इसका अर्थ यह है कि बैंक केवल एक सामान्य खाता खोलने तक सीमित न रहें, बल्कि छात्र जीवन से लेकर नौकरी, स्टार्टअप, घर की खरीद और सेवानिवृत्ति तक ग्राहक के जीवन के हर चरण में एक भरोसेमंद वित्तीय साझेदार की भूमिका निभाएं। छात्रों को उच्च शिक्षा और वोकेशनल ट्रेनिंग के लिए बिना किसी जटिल कागजी कार्रवाई के त्वरित शिक्षा ऋण उपलब्ध कराना बैंकों की शीर्ष प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके साथ ही युवाओं को करियर के शुरुआती दिनों में सही निवेश माध्यमों जैसे म्यूचुअल फंड, एसआईपी और पेंशन योजनाओं के प्रति जागरूक करना भी इस साझेदारी का हिस्सा होगा।
युवा कियोस्क और 'युवा बैंकिंग मित्र' की नई पहल
शाखा स्तर पर युवाओं को सहज अनुभव देने के लिए बैंकों को विशेष 'युवा कियोस्क' स्थापित करने का सुझाव दिया गया है। इन कियोस्क पर केवल युवाओं से संबंधित योजनाओं, डिजिटल सेवाओं, छात्रवृत्ति खातों और स्टूडेंट लोन की जानकारी एक ही जगह मिलेगी। इसके अतिरिक्त, शाखाओं में तकनीकी रूप से दक्ष 'युवा बैंकिंग मित्र' तैनात किए जाएंगे, जो कॉलेज के छात्रों और नए उद्यमियों को डिजिटल लेनदेन, सुरक्षा प्रोटोकॉल और बैंकिंग उत्पादों को समझने में व्यक्तिगत मार्गदर्शन प्रदान करेंगे। इस कदम से बैंकों में आने वाले युवा ग्राहकों को किसी भी प्रकार की झिझक या असुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा।
कॉमन डिजिटल पोर्टल और वित्तीय अनुशासन का निर्माण
इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (आईबीए) को सभी सरकारी बैंकों के सहयोग से एक समर्पित, युवा-अनुकूल वेब और मोबाइल पोर्टल तैयार करने का काम सौंपा गया है। यह पोर्टल एक साझा मंच के रूप में कार्य करेगा, जहाँ सरल भाषा में वित्तीय शिक्षा, सुरक्षित ऑनलाइन बैंकिंग के नियम, साइबर फ्रॉड से बचाव के उपाय और सरकारी क्रेडिट योजनाओं का पूरा विवरण उपलब्ध होगा। इसके साथ ही युवाओं को शुरुआती उम्र में ही क्रेडिट स्कोर के महत्व और ऋण अनुशासन के प्रति जागरूक किया जाएगा ताकि वे भविष्य में समय पर पुनर्भुगतान करने वाले जिम्मेदार नागरिक बन सकें और उन्हें उद्यमशीलता के लिए पूंजी जुटाने में कोई परेशानी न हो।
विकसित भारत 2047 के निर्माण में युवाओं की भागीदारी
भारत की कुल जनसंख्या का लगभग 29 प्रतिशत हिस्सा 15 से 29 वर्ष के आयु वर्ग में आता है, जो देश के आर्थिक विकास, उपभोग, बचत और नवाचार का सबसे बड़ा इंजन है। इस विशाल जनसांख्यिकीय लाभांश को सही दिशा देना और उन्हें मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़ना 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को हासिल करने के लिए अनिवार्य है। सरकारी बैंकों को अपनी शाखाओं और डिजिटल नेटवर्क का पूरा उपयोग करते हुए देश के हर जिले, कस्बे और ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं तक पहुंचना होगा ताकि कोई भी प्रतिभावान युवा वित्तीय संसाधनों के अभाव में अपने सपनों को पूरा करने से वंचित न रहे।