प्रसाद में ‘मटन बिरयानी’, ‘शराब’ और ‘नूडल्स’? भारत के इन 6 अनोखे मंदिरों की परंपराएं, जिन्हें जानकर उड़ जाएंगे आपके होश

भारत अपनी समृद्ध संस्कृति, प्राचीन इतिहास और विविध परंपराओं के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। देश के कोने-कोने में स्थित मंदिरों की मान्यताएं और पूजा-पद्धतियां भी उतनी ही अनोखी हैं। आमतौर पर किसी भी मंदिर में भगवान को भोग के रूप में फल, मिठाई, सूखे मेवे या पंचामृत अर्पित किया जाता है, लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि भगवान को प्रसाद में चॉकलेट, नूडल्स, शराब या फिर मटन-चिकन बिरयानी चढ़ाई जाती हो? सुनने में भले ही यह थोड़ा अजीब लगे, लेकिन यह बिल्कुल सच है। आइए जानते हैं भारत के ऐसे ही 6 अनोखे मंदिरों के बारे में जहां की भोग प्रथाएं दुनिया भर में चर्चा का विषय बनी रहती हैं।
1. चॉकलेट खाने वाले भगवान: सुब्रह्मण्य स्वामी मंदिर (केरल)
केरल के अलप्पुझा जिले में स्थित भगवान सुब्रह्मण्य स्वामी मंदिर को स्थानीय स्तर पर 'मंच मुरुगन' (Munch Murugan) के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां आने वाले श्रद्धालु भगवान को पारंपरिक प्रसाद की बजाय चॉकलेट (विशेषकर मंच चॉकलेट) अर्पित करते हैं। इस अनोखी परंपरा के पीछे बच्चों की गहरी आस्था और कई स्थानीय मान्यताएं जुड़ी हुई हैं, जिसके चलते यह मंदिर युवाओं और बच्चों के बीच खासी लोकप्रियता हासिल कर चुका है।
2. चाइनीज नूडल्स का प्रसाद: चीनी काली मंदिर (कोलकाता)
पश्चिम बंगाल की सांस्कृतिक राजधानी कोलकाता के टंगरा इलाके में स्थित मां काली का यह मंदिर बेहद अनूठा है। इसे 'चाइनीज काली मंदिर' (Chinese Kali Temple) कहा जाता है, जहां मां को प्रसाद के रूप में पारंपरिक मिठाइयों की जगह 'नूडल्स' और मंचूरियन का भोग लगाया जाता है। यह अनूठी परंपरा इस क्षेत्र में बसे स्थानीय चीनी परिवारों द्वारा शुरू की गई थी, जो अब इस मंदिर की पहचान बन चुकी है। यहां आने वाले भक्त भी इसी प्रसाद को श्रद्धा के साथ ग्रहण करते हैं।
3. शराब का भोग स्वीकार करते हैं भगवान: काल भैरव मंदिर (उज्जैन)
मध्य प्रदेश के धार्मिक शहर उज्जैन में स्थित भगवान काल भैरव का यह प्राचीन मंदिर अपनी तांत्रिक मान्यताओं और चमत्कारों के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां भगवान काल भैरव को प्रसाद के रूप में मदिरा यानी शराब का भोग चढ़ाया जाता है। भक्त अपने साथ शराब की बोतल लेकर पहुंचते हैं, जिसे मंदिर के पुजारी एक खास पात्र में निकालकर देवता के मुख के पास ले जाते हैं और देखते ही देखते शराब का वह प्रसाद गायब हो जाता है।
4. मटन-चिकन बिरयानी का भव्य भोग: मुनियांदी स्वामी मंदिर (तमिलनाडु)
तमिलनाडु के मदुरै जिले में स्थित मुनियांदी स्वामी मंदिर अपनी मांसाहारी भोग प्रथा के लिए बेहद प्रसिद्ध है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार भगवान मुनियांदी को भगवान शिव का ही एक रूप माना जाता है। इस मंदिर में हर साल एक भव्य तीन दिवसीय उत्सव का आयोजन किया जाता है, जिसमें मुख्य प्रसाद के रूप में हजारों भक्तों के लिए चिकन और 'मटन बिरयानी' बनाई जाती है और फिर इसे भगवान को भोग लगाकर प्रसाद के रूप में बांटा जाता है।
5. तांत्रिक साधना और मांसाहारी भोग: तारापीठ मंदिर (पश्चिम बंगाल)
पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में स्थित मां तारा का प्रसिद्ध 'तारापीठ मंदिर' देश के प्रमुख शक्तिपीठों में गिना जाता है। यह स्थल मुख्य रूप से तांत्रिक साधना और अघोरियों की गतिविधियों के लिए जाना जाता है। इस मंदिर में मां तारा को अर्पित किए जाने वाले पारंपरिक भोग में फल-फूल के साथ-साथ मांस और मछली को भी शामिल किया जाता है, जो यहां की शाक्त परंपरा और प्राचीन अनुष्ठानों का एक अहम हिस्सा है।
6. भुनी मछली और ताड़ी का प्रसाद: पराशिनी कडावु मुथप्पन मंदिर (केरल)
केरल के कन्नूर जिले में स्थित भगवान मुथप्पन का यह मंदिर अपनी समावेशी और अनूठी संस्कृति के लिए जाना जाता है। इस मंदिर में जाति, धर्म या लिंग का कोई भेदभाव नहीं किया जाता है और यह सभी के लिए खुला है। भगवान मुथप्पन को भोग के रूप में भुनी हुई मछलियां और पारंपरिक 'ताड़ी' (Palm Wine) अर्पित की जाती है। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को भी इसी प्रसाद का वितरण किया जाता है, जो इस स्थान की क्षेत्रीय परंपरा को दर्शाता है।