ITR में TCS क्लेम करना भूल गए? बिल्कुल न हों परेशान, अब भी वापस मिल सकता है पूरा टैक्स रिफंड; जानें स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस

आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करते समय कई बार करदाता अनजाने में या फॉर्म 26AS और एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) में डेटा मिसमैच होने के कारण टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स (TCS) का क्रेडिट क्लेम करना भूल जाते हैं। यदि आपने भी विदेश यात्रा के पैकेज, लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत भेजे गए पैसे या ₹10 लाख से अधिक मूल्य की कार खरीदने पर कटा TCS अपने ओरिजिनल रिटर्न में शामिल नहीं किया है, तो आपकी मेहनत की कमाई डूबने नहीं जा रही है। आयकर कानून के तहत करदाताओं को यह अधिकार प्राप्त है कि वे निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपने रिटर्न को संशोधित करके छूटा हुआ टैक्स क्रेडिट और रिफंड क्लेम कर सकते हैं।
TCS क्या है और यह कब कटता है?
टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स (TCS) वह कर है जो विक्रेता या सर्विस प्रोवाइडर द्वारा कुछ विशिष्ट उच्च-मूल्य के लेन-देन पर खरीदार से एकत्र करके सीधे केंद्र सरकार के पास जमा कराया जाता है। मुख्य रूप से विदेश यात्रा टूर पैकेज बुक करने, विदेश में पढ़ाई या इलाज के लिए पैसे भेजने, विदेशी मुद्रा खरीदने और ₹10 लाख से महंगी गाड़ी खरीदने पर 1% से लेकर 20% तक टीसीएस कटता है। यह कोई अतिरिक्त टैक्स या जुर्माना नहीं है, बल्कि आपके पैन (PAN) पर जमा हुआ एडवांस टैक्स क्रेडिट होता है, जिसे आप अपनी कुल टैक्स देनदारी से घटा सकते हैं या रिफंड के रूप में वापस ले सकते हैं।
छूटा हुआ TCS वापस पाने का सबसे कारगर तरीका: रिवाइज्ड रिटर्न (Section 139(5))
आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 139(5) के तहत यदि किसी करदाता से मूल रिटर्न में कोई जानकारी छूट गई है या गलत दर्ज हो गई है, तो वह 'रिवाइज्ड रिटर्न' (Revised Return) दाखिल कर सकता है।
-
समय-सीमा: असेसमेंट ईयर के 31 दिसंबर तक बिना किसी पेनाल्टी के रिवाइज्ड रिटर्न फाइल किया जा सकता है।
-
पात्रता: जिन करदाताओं ने 31 जुलाई की निर्धारित समय-सीमा के भीतर ओरिजिनल रिटर्न दाखिल किया था, वे आसानी से इसे संशोधित कर सकते हैं।
रिवाइज्ड ITR के जरिए TCS रिफंड क्लेम करने की स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया
-
Form 26AS और AIS की जांच करें: सबसे पहले ई-फाइलिंग पोर्टल (e-Filing Portal) पर लॉग इन करें और 'View Form 26AS' व 'AIS' में जाकर यह सुनिश्चित करें कि विक्रेता या बैंक द्वारा काटा गया TCS आपके पैन कार्ड पर सही तरीके से दिख रहा है।
-
e-File सेक्शन में जाएं: पोर्टल पर 'e-File' > 'Income Tax Returns' > 'File Income Tax Return' पर क्लिक करें।
-
Filing Type चुनें: संबंधित असेसमेंट ईयर का चयन करने के बाद फाइलिंग सेक्शन में 'Revised Return u/s 139(5)' विकल्प चुनें।
-
ओरिजिनल रिटर्न की डिटेल भरें: मूल रूप से दाखिल किए गए ITR का पावती नंबर (Acknowledgment Number) और ओरिजिनल फाइलिंग की तारीख दर्ज करें।
-
Schedule TCS में क्रेडिट जोड़ें: 'Taxes Paid' टैब में जाकर 'Details of Tax Collected at Source (TCS)' शेड्यूल खोलें। यहां फॉर्म 27D या 26AS में दर्ज टीसीएस राशि, कलेक्टर का TAN और कुल कटी रकम दर्ज करें।
-
टैक्स कैल्कुलेशन और रिफंड: सिस्टम आपकी कुल टैक्स देनदारी से TCS क्रेडिट को अपने आप घटा देगा। यदि आपकी कुल टैक्स देनदारी शून्य है या कम है, तो अतिरिक्त TCS की रकम रिफंड के रूप में स्क्रीन पर दिखने लगेगी।
-
ई-वेरिफिकेशन (e-Verify): संशोधित रिटर्न को आधार ओटीपी, नेट बैंकिंग या डीमैट खाते के जरिए तुरंत ई-वेरिफाई करें।
यदि ITR प्रोसेस हो चुका है और 143(1) का नोटिस आ गया है तो क्या करें?
यदि आयकर विभाग द्वारा आपके ओरिजिनल ITR को पहले ही प्रोसेस किया जा चुका है और आपको धारा 143(1) के तहत इंटिमेशन ऑर्डर मिल चुका है, तब भी आपके पास विकल्प मौजूद हैं। आप ई-फाइलिंग पोर्टल के 'Services' टैब में जाकर धारा 154 के तहत रेक्टिफिकेशन रिक्वेस्ट (Rectification Request) फाइल कर सकते हैं। इसमें 'Tax Credit Mismatch Correction' का विकल्प चुनकर छूटे हुए TCS का ब्योरा दोबारा प्रोसेस करने के लिए सबमिट किया जा सकता है।
बैंक खाता प्री-वैलिडेट होना बेहद जरूरी
रिफंड की राशि सीधे आपके बैंक खाते में ट्रांसफर की जाती है। इसलिए सुनिश्चित करें कि आयकर पोर्टल की प्रोफाइल में आपका बैंक खाता सक्रिय (Active), पैन-लिंक्ड और प्री-वैलिडेटेड (Pre-validated) हो। यदि बैंक खाते का नाम या विवरण पैन से मेल नहीं खाता है, तो रिफंड में अनावश्यक देरी हो सकती है।