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‘कश्मीर भारत का अहम हिस्सा’: अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के बयान से हिला पाकिस्तान, एक्सपर्ट्स बोले- भारत की ऐतिहासिक कूटनीतिक जीत!

भारत में नवनियुक्त अमेरिकी राजदूत और दक्षिण व मध्य एशिया के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत सर्जियो गोर ने जम्मू-कश्मीर को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिसने वैश्विक कूटनीति के गलियारों में हलचल मचा दी है। करीब 15 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद किसी सेवारत अमेरिकी राजदूत ने घाटी का आधिकारिक दौरा किया। श्रीनगर में जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से विस्तृत मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत में सर्जियो गोर ने दो-टूक शब्दों में कहा कि "जम्मू-कश्मीर भारत का एक बेहद अहम और अभिन्न हिस्सा है।" इस ऐतिहासिक घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी Times of India की रिपोर्ट में प्रकाशित की गई है।

गोर का यह स्पष्ट बयान केवल एक औपचारिक शिष्टाचार नहीं, बल्कि वाशिंगटन की दशकों पुरानी दक्षिण एशियाई नीति में आए बुनियादी बदलाव का प्रमाण माना जा रहा है। पिछले कई दशकों तक अमेरिका कश्मीर को लेकर 'तटस्थ' या 'द्विपक्षीय समाधान' की भाषा बोलता रहा था। लेकिन धारा 370 के निष्प्रभावी होने और घाटी में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं व स्थानीय सुरक्षा में सुधार के बाद अमेरिकी राजदूत का यह खुला रुख भारत के उस रुख पर अंतरराष्ट्रीय मुहर लगाता है कि जम्मू-कश्मीर पूरी तरह से भारत का आंतरिक मामला है।

ट्रैवल एडवाइजरी की समीक्षा के संकेत: पर्यटन व निवेश को मिलेगा पंख

सर्जियो गोर के इस दौरे का सबसे व्यावहारिक और सकारात्मक पहलू अमेरिकी नागरिकों के लिए जारी 'ट्रैवल एडवाइजरी' पर उनका रुख रहा। वर्तमान में अमेरिकी विदेश विभाग ने जम्मू-कश्मीर (पूर्वी लद्दाख को छोड़कर) को 'लेवल-4 (Do Not Travel)' श्रेणी में रखा हुआ है। गोर ने स्पष्ट संकेत दिए कि सुरक्षा हालात में आए उल्लेखनीय सुधारों को देखते हुए वाशिंगटन इस प्रतिबंधात्मक चेतावनी की समीक्षा करेगा और इसे डाउनग्रेड करने पर विचार किया जाएगा। Hindustan Times की खबर के अनुसार, अमेरिकी पर्यटकों के लिए रास्ते खुलने से घाटी की पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था को वैश्विक गति मिलेगी।

इस कदम का स्थानीय राजनीतिक नेतृत्व ने भी स्वागत किया। इससे पहले पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने भी अमेरिकी दूत से इस एडवाइजरी को हटाने का आग्रह किया था, जिसे उन्होंने "कश्मीर और दुनिया के बीच की दीवार" बताया था। यदि अमेरिकी यात्रा चेतावनी में ढील दी जाती है, तो न केवल यूरोप और अमेरिका के हाई-एंड टूरिस्ट्स का प्रवाह बढ़ेगा, बल्कि वैश्विक टेक और हॉस्पिटैलिटी कंपनियों के लिए जम्मू-कश्मीर में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के नए रास्ते भी खुलेंगे।

उमर अब्दुल्ला की परिपक्व कूटनीति: 'समस्या का समाधान दिल्ली में है'

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और अमेरिकी राजदूत के बीच हुई यह बैठक अत्यंत सौहार्दपूर्ण रही, जिसमें पर्यटन, बागवानी (हॉर्टिकल्चर), आधुनिक तकनीक और आर्थिक साझेदारी के विस्तार पर सार्थक चर्चा हुई। बैठक से पहले और बाद में उमर अब्दुल्ला के रुख की भी राजनीतिक विश्लेषकों ने जमकर सराहना की। अब्दुल्ला ने स्पष्ट रूप से कहा कि वह किसी विदेशी राजदूत के सामने अपने ही देश की शिकायतें दर्ज कराने की आदत नहीं रखते। उन्होंने दो-टूक कहा कि "जम्मू-कश्मीर के मसलों का समाधान वाशिंगटन से नहीं, बल्कि नई दिल्ली स्थित हमारी केंद्र सरकार के जरिए ही होगा।" मुख्यमंत्री का यह बयान दर्शाता है कि राज्य और केंद्र के बीच लोकतांत्रिक संवाद कितना मजबूत और परिपक्व हो चुका है।

पाकिस्तान में मची खलबली, इस्लामाबाद में अमेरिकी दूत तलब

सर्जियो गोर के बयान के तुरंत बाद पाकिस्तान की ओर से तीखी और हताशा भरी प्रतिक्रिया सामने आई। India Today का कवरेज बताता है कि पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय (Foreign Office) ने इस्लामाबाद में अमेरिकी उप-राजदूत (Chargé d'Affaires) को तलब कर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। पाकिस्तान ने इस बयान को गैर-जिम्मेदाराना बताते हुए दावा किया कि यह अमेरिका के पुराने रुख के विपरीत है।

हालांकि, कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) और गिलगित-बाल्टिस्तान में पाकिस्तानी सेना के खिलाफ चल रहे बड़े जनांदोलनों और बुनियादी अधिकारों के हनन के बीच अमेरिकी राजदूत के इस रुख ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान के प्रोपेगैंडा को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। ABP Live की रिपोर्ट के अनुसार, वाशिंगटन का यह नया रुख पाकिस्तान को वैश्विक स्तर पर अलग-थलग करने में एक निर्णायक कारक साबित होगा।

कूटनीतिक विशेषज्ञ क्या कहते हैं? भारत के लिए 4 बड़े रणनीतिक मायने

वैश्विक मामलों और रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी राजदूत के इस बयान और दौरे के दूरगामी सामरिक मायने हैं:

  • धारा 370 के बाद की स्थिति को वैश्विक मान्यता: अमेरिका का यह रुख साबित करता है कि अंतरराष्ट्रीय महाशक्तियां अब जम्मू-कश्मीर के पूर्ण एकीकरण को एक स्थायी और निर्विवाद यथार्थ मान चुकी हैं।

  • चीन और सीमांत क्षेत्रों को स्पष्ट संदेश: श्रीनगर के बाद राजदूत गोर का लद्दाख दौरा यह दर्शाता है कि अमेरिका रणनीतिक रूप से संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में भारत के संप्रभु अधिकारों और सुरक्षा चिंताओं के साथ पूरी तरह खड़ा है।

  • वैश्विक नैरेटिव पर भारत की विजय: पाकिस्तान द्वारा मानवाधिकारों के नाम पर फैलाए जाने वाले झूठे नैरेटिव को अमेरिकी राजदूत की जमीनी उपस्थिति और सुरक्षा पर संतोष ने पूरी तरह निष्प्रभावी कर दिया है।

  • आर्थिक व तकनीकी एकीकरण: कश्मीर अब वैश्विक कूटनीति में किसी 'विवाद' के रूप में नहीं, बल्कि आर्थिक विकास, पर्यटन और निवेश के एक सुरक्षित केंद्र के रूप में पहचाना जा रहा है।

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