विदेश

इसराइली मंत्री के “टारगेट किलिंग” वाले बयान पर अंतरराष्ट्रीय उबाल, फ्रांस और जर्मनी ने की कड़ी निंदा

मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच इस्राइल की सरकार के भीतर से आ रहे बयानों ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हलचल मचा दी है। गाजा पट्टी में फलस्तीनियों की 'लक्षित हत्याएं' (Targeted Killings) करने की वकालत करने वाले इस्राइल के धुर दक्षिणपंथी नेता और राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतमार बेन ग्विर (Itamar Ben-Gvir) के एक विवादित बयान पर यूरोपीय देशों में भारी उबाल देखने को मिल रहा है। जर्मनी और फ्रांस समेत कई प्रमुख देशों ने इस बयान की कड़ी निंदा की है।

क्या था मंत्री इतमार बेन ग्विर का विवादित बयान?

हाल ही में एक पॉडकास्ट के दौरान, हमास की कैद से छूटे एक पूर्व इसराइली बंधक के साथ बातचीत करते हुए मंत्री बेन ग्विर ने विवादित टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि इस्राइल को गाजा में हर रात "30 या 40 लोगों को निशाना बनाकर खत्म करना चाहिए।"

इस बयान के सार्वजनिक होते ही यूरोपीय राजनीति में तीखी प्रतिक्रियाएं शुरू हो गई हैं। जर्मनी के चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स ने इस बयान को "पूरी तरह से अस्वीकार्य और अमानवीय" करार दिया है। जर्मन सरकार के प्रवक्ता ने साफ शब्दों में कहा कि यह बयान अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन है। वहीं, फ्रांस के विदेश मंत्री जां-नोएल बारो और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेष ने भी इसे घृणित और खतरनाक बताया है।

यूरोपीय संघ स्तर पर प्रतिबंध लगाने की मांग तेज

इस बयान के बाद अब यूरोपीय देशों में बेन ग्विर के खिलाफ कड़े प्रतिबंध लगाने की मांग फिर से जोर पकड़ने लगी है। जर्मन सरकार पर भी घरेलू स्तर पर दबाव बढ़ रहा है। जर्मनी के उप चांसलर लार्स क्लिंगबाइल ने एक इंटरव्यू में कहा कि इस तरह के बयानों के गंभीर राजनीतिक नतीजे निकलने चाहिए और यूरोपीय स्तर पर इस पर विचार किया जा रहा है।

इससे पहले मई 2026 में भी बेन ग्विर द्वारा गाजा राहत सामग्री से जुड़े एक्टिविस्ट्स की हिरासत का मजाक उड़ाए जाने के बाद फ्रांस ने उनके देश में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया था।

पश्चिमी तट पर बस्तियों के विस्तार पर भी घिरी इस्राइल सरकार

इतमार बेन ग्विर के इस ताजा बयान के साथ-साथ जर्मनी ने पश्चिमी तट (West Bank) पर इसराइली बस्तियों के लगातार हो रहे विस्तार पर भी गहरी चिंता जताई है। अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अवैध मानी जाने वाली इन बस्तियों में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार के कार्यकाल के दौरान काफी तेजी आई है। वर्तमान में पूर्वी येरुशलम को छोड़कर पांच लाख से अधिक इस्राइली पश्चिमी तट पर बस चुके हैं, जो क्षेत्र में शांति प्रयासों के लिए एक बड़ी बाधा बनता जा रहा है।

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