विदेश

मौलाना फजलू रहमान ने शहबाज शरीफ सरकार को घेरा, पड़ोसी मुल्क में मचा सियासी हड़कंप

वैश्विक मंचों पर भारत की बढ़ती ताकत और चमकती अर्थव्यवस्था का लोहा आज पूरी दुनिया मान रही है, लेकिन इसके ठीक उलट हमारे पड़ोसी देश पाकिस्तान में हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। पाकिस्तान के जाने-माने और प्रभावशाली राजनीतिक-धार्मिक नेता मौलाना फजलू रहमान, जिन्हें अक्सर 'मौलाना डीजल' के नाम से भी जाना जाता है, ने अपनी ही देश की शहबाज शरीफ सरकार को आईना दिखाते हुए एक बेहद सनसनीखेज और कड़वा सच बयां किया है। मौलाना फजलू रहमान ने एक सार्वजनिक मंच से खुली तीखी आलोचना करते हुए कहा कि आज हमारा पड़ोसी देश भारत तरक्की की नई ऊंचाइयों को छूते हुए दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है, जबकि इसके विपरीत पाकिस्तान के आम नागरिक दो वक्त की रोटी और भुखमरी के गंभीर संकट से जूझ रहे हैं। उनके इस बयान के सामने आने के बाद से ही पाकिस्तानी हुक्मरानों और सत्ता के गलियारों में भारी खलबली मच गई है, क्योंकि एक पाकिस्तानी नेता द्वारा भारत की इस तरह खुली तारीफ करना और अपनी सरकार को घेरना वहां की राजनीति में एक बड़ा भूचाल लेकर आया है।

मौलाना फजलू रहमान का तीखा हमला और पड़ोसी देश की हकीकत

मौलाना फजलू रहमान ने अपनी पार्टी और समर्थकों को संबोधित करते हुए शहबाज शरीफ और आसिफ अली जरदारी के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार की नीतियों पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आज दुनिया के तमाम देश विकास, तकनीक, विज्ञान और मजबूत अर्थव्यवस्था के बल पर आगे बढ़ रहे हैं, जिसमें भारत ने अपनी रणनीतिक और आर्थिक नीतियों के दम पर वैश्विक पटल पर एक ऐसा मुकाम हासिल कर लिया है जहां आज वह दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में मजबूती से खड़ा है। इसके विपरीत, पाकिस्तान के हुक्मरान केवल आपसी कुर्सी की लड़ाई, महंगे कर्ज और विदेशी भीख पर अपनी सरकार चलाने में व्यस्त हैं। मौलाना ने दो टूक शब्दों में कहा कि देश की मौजूदा नीतियां ऐसी हैं जिनके कारण आम जनता महंगाई के दलदल में धंसती जा रही है और देश के कई हिस्सों में लोग भुखमरी और कुपोषण का शिकार होने को मजबूर हो चुके हैं।

पाकिस्तान की डूबती अर्थव्यवस्था और बिगड़ते अंदरूनी हालात

पाकिस्तान लंबे समय से गंभीर आर्थिक बदहाली, भारी-भरकम विदेशी कर्ज, चरमराती मुद्रा और आसमान छूती महंगाई की मार झेल रहा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की कड़ी शर्तों के आगे घुटने टेकने के बावजूद वहां की अवाम को कोई राहत नहीं मिल पा रही है। पेट्रोल, डीजल, बिजली और खाने-पीने की बुनियादी चीजों के दाम इतने बढ़ चुके हैं कि आम आदमी का जीना मुहाल हो गया है। मौलाना फजलू रहमान का यह बयान इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि अब पाकिस्तान के अंदरूनी नेता भी इस बात को खुले तौर पर स्वीकार करने लगे हैं कि उनकी नीतियां पूरी तरह विफल हो चुकी हैं। जब देश का नेतृत्व और शासन प्रणाली केवल भ्रष्टाचार और सत्ता बचाने में लगी रहती है, तो देश का विकास रुक जाता है, और आज पाकिस्तान ठीक इसी बदतर दौर से गुजर रहा है, जहाँ जनता का भरोसा अपनी ही सरकार पर से पूरी तरह उठ चुका है।

भारत की बढ़ती वैश्विक साख और पाकिस्तान की विफलता पर कूटनीतिक विश्लेषण

अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों और विश्लेषकों का मानना है कि भारत की आर्थिक और कूटनीतिक सफलता आज पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल बन चुकी है। स्थिर सरकार, मजबूत सुधारों, डिजिटल क्रांति और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में हो रहे विकास के कारण भारत ने ग्लोबल इकोनॉमी में अपनी मजबूत जगह बनाई है। दूसरी ओर, पाकिस्तान जैसे देश जो आतंकवाद को पालने-पोसने और अपनी आंतरिक प्राथमिकताओं को ताक पर रखने में लगे रहे, आज वे अपने ही बुने हुए जाल में फंस चुके हैं। मौलाना फजलू रहमान जैसे वरिष्ठ नेता का भारत की तरक्की का उदाहरण देकर अपनी सरकार को घेरना यह दिखाता है कि पाकिस्तान के भीतर भी अब यह आवाज उठने लगी है कि जब तक देश अपनी गलत नीतियों, कट्टरपंथ और प्राथमिकताहीन रवैये को नहीं बदलेगा, तब तक उसका पतन रोकना असंभव है। यह बयान पाकिस्तान के राजनीतिक भविष्य और वहां की चरमराती व्यवस्था पर एक बहुत बड़ा तमाचा है, जिसका असर आने वाले दिनों में वहां की सियासत पर पड़ना तय है।

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