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उम्र 60 के पार माता-पिता के लिए हेल्थ इंश्योरेंस चुनते समय इन 5 अहम बातों का रखें ध्यान, वरना उठानी पड़ सकती है बड़ी आर्थिक परेशानी

बढ़ती उम्र के साथ माता-पिता की सेहत से जुड़ी जरूरतें भी बदल जाती हैं और ऐसे में एक मजबूत हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी उनका सबसे बड़ा सहारा बनती है। आधुनिक जीवनशैली और बढ़ती चिकित्सा महंगाई के इस दौर में वरिष्ठ नागरिकों के लिए मेडिक्लेम होना बेहद जरूरी हो गया है। लेकिन अक्सर लोग बिना पूरी जानकारी के जल्दबाजी में कोई भी पॉलिसी खरीद लेते हैं, जिससे मेडिकल इमरजेंसी के वक्त भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यदि आपके माता-पिता की उम्र भी 60 वर्ष से अधिक हो चुकी है और आप उनके लिए बीमा पॉलिसी लेने की सोच रहे हैं, तो कुछ खास बातों का ध्यान रखना बेहद आवश्यक है ताकि जरूरत के वक्त आपको पूरा वित्तीय कवर मिल सके।

सही सम इंश्योर्ड और मेडिकल इतिहास की पारदर्शिता

माता-पिता के लिए हेल्थ पॉलिसी लेते समय सबसे पहली और अहम बात यह है कि सम इंश्योर्ड यानी बीमा कवरेज की राशि पर्याप्त होनी चाहिए। आज के समय में महानगरों और बड़े अस्पतालों में इलाज का खर्च काफी ज्यादा है, इसलिए कम राशि का कवर नाकाफी साबित हो सकता है। इसके अलावा, पॉलिसी फॉर्म भरते समय माता-पिता की पुरानी बीमारियों जैसे डायबिटीज, ब्लड प्रेशर या हृदय रोग से जुड़ी जानकारी को कभी भी छिपाना नहीं चाहिए। कई लोग प्रीमियम कम करवाने के चक्कर में मेडिकल हिस्ट्री छुपा लेते हैं, लेकिन क्लेम के वक्त बीमा कंपनियां दस्तावेजों की जांच करती हैं और जानकारी छिपाने पर पूरा क्लेम रद्द भी कर सकती हैं। इसलिए हमेशा पारदर्शी रहें और सही जानकारी ही दर्ज करें।

वेटिंग पीरियड और को-पेमेंट क्लॉज को समझें

वरिष्ठ नागरिकों के लिए बीमा लेते वक्त प्रतीक्षा अवधि यानी वेटिंग पीरियड की शर्तों को गहराई से पढ़ना बहुत जरूरी है। अधिकांश पॉलिसियों में पहले से मौजूद यानी प्री-एग्जिस्टिंग बीमारियों को कवर करने के लिए एक तय समय सीमा (जैसे 1 से 4 साल) होती है। ऐसे प्लान का चुनाव करें जिसमें यह अवधि कम हो या फिर इसे घटाने का विकल्प मौजूद हो। इसके साथ ही, पॉलिसी में दिए गए को-पेमेंट क्लॉज को भी अच्छी तरह जांच लें। को-पेमेंट वह नियम है जिसके तहत अस्पताल के कुल बिल का एक निश्चित हिस्सा (जैसे 10 से 20 प्रतिशत) पॉलिसीधारक को खुद अपनी जेब से चुकाना होता है। अधिक को-पेमेंट वाली पॉलिसी बुजुर्गों के इलाज के वक्त बड़ा आर्थिक बोझ बन सकती है।

रूम रेंट कैपिंग और नेटवर्क हॉस्पिटल्स की सूची

अस्पताल में भर्ती होने के दौरान मिलने वाले कमरे के किराए पर बीमा कंपनियों द्वारा एक सीमा तय की जाती है, जिसे रूम रेंट कैपिंग कहते हैं। यदि आपका चुनी गई पॉलिसी में रूम रेंट की लिमिट कम है और मरीज उससे महंगे कमरे में भर्ती होता है, तो अस्पताल के अन्य खर्चों पर भी आनुपातिक कटौती (Proportional Deduction) लागू हो जाती है। इसलिए हमेशा ऐसी पॉलिसी चुनें जिसमें रूम रेंट की कोई पाबंदी न हो या फिर वास्तविक खर्च (Actuals) कवर होता हो। इसके साथ ही यह भी जांच लें कि आपके घर के आसपास या शहर के बेहतरीन अस्पताल उस बीमा कंपनी के नेटवर्क हॉस्पिटल्स में शामिल हैं या नहीं, ताकि आपातकालीन स्थिति में आपको तुरंत कैशलेस इलाज की सुविधा मिल सके।

फैमिली फ्लोटर में बुजुर्गों को शामिल करने से बचें

अक्सर लोग एक ही फैमिली फ्लोटर पॉलिसी में अपने पूरे परिवार के साथ-साथ बुजुर्ग माता-पिता को भी शामिल कर लेते हैं, जो कि एक बड़ी वित्तीय भूल साबित हो सकती है। बीमा कंपनियों में प्रीमियम की गणना हमेशा परिवार के सबसे बुजुर्ग सदस्य की उम्र के आधार पर की जाती है, जिससे पूरी पॉलिसी का प्रीमियम काफी महंगा हो जाता है। इसके अलावा, माता-पिता के लगातार आने वाले मेडिकल क्लेम की वजह से उस पॉलिसी का लाभ परिवार के अन्य सदस्यों के लिए भी कई बार जोखिम भरा हो जाता है। समझदारी इसी में है कि माता-पिता के लिए हमेशा एक अलग और स्वतंत्र इंडिविजुअल हेल्थ इंश्योरेंस प्लान ही खरीदें, ताकि उनकी चिकित्सा जरूरतें और आपकी फैमिली सेविंग दोनों सुरक्षित बनी रहें।

माता-पिता के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए केवल टैक्स बचाने या कम प्रीमियम के चक्कर में बिना सोचे-समझे पॉलिसी खरीदने से बचना चाहिए। हर साल मिलने वाले फ्री एनुअल हेल्थ चेक-अप के फायदों का पूरा लाभ उठाएं और अपनी जरूरत के अनुसार सही राइडर्स या टॉप-अप प्लान का चुनाव करें, ताकि रिटायरमेंट के बाद का यह पड़ाव बिना किसी चिकित्सीय और आर्थिक तनाव के आसानी से गुजर सके।

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