विदेश

चीन ने GJ-21 स्टील्थ ड्रोन और दुनिया के पहले ड्रोन कैरियर ‘सिचुआन’ का किया परीक्षण

वैश्विक भू-राजनीति और सामरिक गलियारों से इस समय एशिया के मोर्चे पर एक बेहद बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। ताइवान जलडमरूमध्य और दक्षिण चीन सागर (South China Sea) के तनावपूर्ण माहौल के बीच ड्रैगन यानी चीन ने अपनी नौसैनिक और वायु शक्ति को एक कदम और आगे बढ़ाते हुए अपनी आधुनिक सैन्य क्षमताओं का खुलकर प्रदर्शन किया है। चीन ने अपने सबसे महत्वाकांक्षी और दुनिया के पहले समर्पित ड्रोन वाहक युद्धपोत 'सिचुआन' (Sichuan) के अंतिम समुद्री परीक्षणों (Sea Trials) के बीच अपने अत्याधुनिक 'GJ-21 स्टील्थ अटैक ड्रोन' का इस महीने एक सफल उड़ान परीक्षण किया है। इस परीक्षण ने एक बार फिर पश्चिमी देशों और भारत समेत दुनिया के तमाम रक्षा विश्लेषकों की नींद उड़ा दी है, क्योंकि यह तकनीक भविष्य के नौसैनिक युद्धों की दिशा को पूरी तरह से बदलने की क्षमता रखती है।

दक्षिण चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो

दुनिया भर के रक्षा मामलों पर नजर रखने वाले प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान 'दक्षिण चाइना मॉर्निंग पोस्ट' (SCMP) की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस अत्याधुनिक स्टील्थ ड्रोन के परीक्षण से जुड़े कुछ वीडियो और विजुअल्स सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। इन फुटेज और रिपोर्टों से यह पता चलता है कि GJ-21 ड्रोन ने चीन के लियानिंग प्रांत के हुलुदाओ (Huludao) शहर के ऊपर उड़ान भरी है। यह क्षेत्र चीनी नौसेना के विमानन और तकनीकी परीक्षणों का एक प्रमुख केंद्र माना जाता है। जैसे ही इस स्टील्थ ड्रोन की परीक्षण उड़ान से जुड़ी तस्वीरें सार्वजनिक हुईं, वैसे ही वैश्विक रक्षा जगत में इस बात की चर्चा तेज हो गई कि चीन मानवरहित युद्धक विमानों (UAVs) और विमान वाहक पोतों के संयोजन में कितनी तेजी से आगे बढ़ रहा है।

'सिचुआन': दुनिया का पहला इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कैटापल्ट से लैस ड्रोन कैरियर

इस पूरी सैन्य प्रगति के केंद्र में चीन का वह नया युद्धपोत है जिसे दुनिया का पहला आधिकारिक 'ड्रोन कैरियर' कहा जा रहा है। टाइप 076 वर्ग का यह जहाज, जिसे 'सिचुआन' नाम दिया गया है, लगभग 40,000 टन से अधिक वजन वाला एक विशालकाय और बेहद एडवांस्ड उभयचर हमलावर पोत (Amphibious Assault Ship) है। इस युद्धपोत की सबसे बड़ी और क्रांतिकारी तकनीकी विशेषता यह है कि यह दुनिया का पहला ऐसा नौसैनिक पोत है जो आधुनिक 'इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कैटापल्ट सिस्टम' (Electromagnetic Catapult System) से लैस है।

पारंपरिक युद्धपोतों की तुलना में इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तकनीक विमानों और ड्रोन्स को बहुत कम दूरी में और बेहद कम समय में तेजी से लॉन्च करने में मदद करती है। इस युद्धपोत की सामरिक क्षमता का दायरा बहुत व्यापक है; इस पर पारंपरिक हेलीकॉप्टरों के साथ-साथ विभिन्न प्रकार के मानवरहित (Unmanned) और मानवयुक्त (Manned) फिक्स्ड-विंग एयरक्राफ्ट को आसानी से तैनात किया जा सकता है। विशेष रूप से, यह पोत GJ-21 जैसे भारी और अत्याधुनिक स्टील्थ ड्रोन को समुद्र के बीचों-बीच से संचालित करने के लिए पूरी तरह से डिजाइन किया गया है।

अंतिम परीक्षण के दौर में है 'सिचुआन', इस साल के अंत तक हो सकता है शामिल

चीनी सरकारी मीडिया चैनल 'सीसीटीवी' (CCTV) द्वारा पिछले कुछ महीनों में जारी की गई कंप्यूटर-जेनरेटेड फुटेज और हाल ही में किंगदाओ (Qingdao) नौसेना बेस के पास से ली गई उपग्रह (Satellite) तस्वीरों से यह पुष्टि हुई है कि 'सिचुआन' अपने निर्माण और परीक्षण के बिल्कुल अंतिम दौर से गुजर रहा है। सैटेलाइट तस्वीरों में इस विशाल युद्धपोत को अन्य सहायक नौसैनिक जहाजों के साथ अभ्यास करते हुए देखा गया है। रक्षा विशेषज्ञों का अनुमान है कि साल 2026 के अंत तक या आगामी महीनों में चीनी पीपल्स लिबरेशन आर्मी नेवी (PLAN) इसे आधिकारिक तौर पर अपने मुख्य नौसैनिक बेड़े में शामिल कर लेगी। इसके शामिल होने से चीनी नौसेना की समुद्र के भीतर शक्ति प्रदर्शन करने की क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।

GJ-21 स्टील्थ अटैक ड्रोन की तकनीकी विशेषताएं और खासियतें

इस नए ड्रोन परीक्षण को लेकर रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि GJ-21 स्टील्थ अटैक ड्रोन वास्तव में चीन के पहले से चर्चित 'GJ-11' ड्रोन का ही एक उन्नत और विशेष रूप से नौसैनिक संस्करण (Naval Variant) है। इसे सबसे पहले पिछले साल सितंबर महीने में आयोजित चीन की 'विक्ट्री डे परेड' के दौरान दुनिया के सामने आंशिक रूप से प्रदर्शित किया गया था, जिसके बाद से इसके सार्वजनिक तौर पर दिखने या परीक्षण किए जाने के बहुत कम अवसर आए थे।

इस ड्रोन की स्टील्थ तकनीक (Radar-Evading Stealth Technology) इसे दुश्मन के रडार की पकड़ से कोसों दूर रखती है, जिससे यह बिना किसी पूर्व चेतावनी के दुश्मन के ठिकानों पर सटीक हमले करने में सक्षम है। जब इस तरह के रडार-माਤ देने वाले स्टील्थ ड्रोन्स को 'सिचुआन' जैसे ड्रोन कैरियर से समुद्र के बीच से लॉन्च किया जाता है, तो यह किसी भी देश की तटीय सुरक्षा और एयर डिफेंस सिस्टम के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती बन जाता है।

ताइवान जलडमरूमध्य और संभावित क्षेत्रीय तनावों पर इसका प्रभाव

गौरतलब है कि सिचुआन युद्धपोत और GJ-21 स्टील्थ ड्रोन का यह घातक संयोजन ऐसे समय में सामने आया है जब इंडो-पैसिफिक क्षेत्र, विशेषकर ताइवान जलडमरूमध्य और दक्षिण चीन सागर में भू-राजनीतिक तनाव चरम पर है। बीजिंग लगातार ताइवान के आसपास अपनी सैन्य उपस्थिति को मजबूत कर रहा है। 'सिचुआन' केवल ड्रोन्स और विमानों को ही नहीं ले जा सकता, बल्कि यह युद्धपोत बड़ी संख्या में युद्धक सैनिकों, भारी बख्तरबंद गाड़ियों और उभयचर वाहनों को भी एक स्थान से दूसरे स्थान तक तेजी से ले जाने की क्षमता रखता है। भविष्य के किसी भी संभावित संघर्ष या समुद्री नौसैनिक युद्ध की स्थिति में यह प्लेटफॉर्म चीन को एक सामरिक बढ़त देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। भारत और अन्य पड़ोसी देशों के रक्षा रणनीतिकार बीजिंग की इन उभरती हुई तकनीकी और नौसैनिक सफलताओं पर बेहद बारीकी से नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र के सुरक्षा समीकरणों को दीर्घकालिक रूप से प्रभावित कर सकती है।

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