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47 की उम्र में भी मैदान पर डटे हैं 70299 गेंदें फेंकने वाले ये धाकड़ क्रिकेटर, बोले- बेटा संन्यास नहीं लेने दे रहा

क्रिकेट की दुनिया में कई ऐसे खिलाड़ी होते हैं जो अपनी उम्र को महज एक आंकड़ा साबित करते हुए मैदान पर लंबे समय तक टिके रहते हैं और अपने खेल के दम पर नई मिसाल कायम करते हैं। ऐसा ही एक हैरान कर देने वाला और दिल को छू लेने वाला मामला सामने आया है जहाँ क्रिकेट इतिहास में अपनी गेंदबाजी के बल पर हड़कंप मचाने वाले एक दिग्गज खिलाड़ी ने अपने संन्यास को लेकर एक बहुत बड़ा और मजेदार खुलासा किया है। खेल के मैदान पर सत्तर हजार से ज्यादा गेंदें फेंकने वाले इस महान गेंदबाज ने खुद यह बात खुलकर कही है कि वह अब खुद खेल से दूर होना चाहते हैं और अपने जीवन का नया अध्याय शुरू करना चाहते हैं, लेकिन उनके घर का छोटा सदस्य यानी उनका बेटा उन्हें अभी बुत से हटने नहीं दे रहा है। उम्र के इस पड़ाव पर भी जब शरीर और फिटनेस जवाब देने लगती है, तब भी मैदान पर पसीना बहाने की यह मजबूरी और जुनून वाकई हर किसी को सोचने पर मजबूर कर देता है कि क्रिकेट का नशा इंसान के सिर से किस हद तक सवार रहता है।

मैदान पर अनगिनत संघर्ष और रिकॉर्डों का बेमिसाल सफर

जिस खिलाड़ी की हम यहां बात कर रहे हैं, उसने अपने लंबे और शानदार करियर के दौरान दुनिया के बड़े-बड़े बल्लेबाजों के पसीने छुड़ाए हैं और अपनी गेंदबाजी से कई ऐतिहासिक मुकाबलों का रुख मोड़ा है। क्रिकेट के लंबे फॉर्मेट में लगातार गेंदबाजी करना, अपने शरीर को चुस्त-दुरुस्त रखना और हर मैच में अपनी टीम के लिए सौ फीसदी देना कोई आसान काम नहीं होता, लेकिन इस खिलाड़ी ने दशकों तक यह जिम्मेदारी बेहद शिद्दत के साथ निभाई है। जब आंकड़ों की किताब खोली जाती है और यह देखा जाता है कि उसने अपने करियर में कितनी ज्यादा गेंदें फेंकी हैं, तो उसके अथक परिश्रम और सहनशक्ति का सही अंदाजा लगता है। इस लंबे सफर के दौरान कई उतार-चढ़ाव आए, चोटें लगीं और शरीर की क्षमता कम हुई, लेकिन उस खिलाड़ी का जज्बा कभी कम नहीं हुआ, जिसके चलते आज भी दुनिया भर के क्रिकेट प्रेमी उनके खेल के कायल बने हुए हैं।

बेटे की जिद के आगे मजबूर हुए दिग्गज खिलाड़ी

सैंतालीस साल की उम्र एक ऐसा पड़ाव होती है जहां आमतौर पर खिलाड़ी कोचिंग, कमेंट्री या फिर अपने परिवार के साथ शांत जीवन बिताना पसंद करते हैं, लेकिन इस खिलाड़ी के साथ मामला बिल्कुल उलट है। जब उनसे हाल ही में उनके भविष्य और रिटायरमेंट के बारे में पूछा गया तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि वे तो खुद खेल को अलविदा कहना चाहते हैं, लेकिन उनका बेटा ऐसा बिल्कुल नहीं चाहता है। उनके बेटे की दीवानगी और जिद इस हद तक है कि वह अपने पिता को अभी और लंबे समय तक मैदान पर गेंदबाजी करते देखना चाहता है, और यही वजह है कि वे अपने बेटे की खातिर अपने संन्यास के फैसले को बार-बार टालते आ रहे हैं। यह पिता और पुत्र के बीच का एक बेहद खूबसूरत और प्यारा रिश्ता है जहाँ बेटा अपने पिता को अपना सबसे बड़ा हीरो मानता है और नहीं चाहता कि वह क्रिकेट की पिच से दूर हों, भले ही इसके लिए पिता को अपनी बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान से ही क्यों न मुकाबला करना पड़े।

उम्र के इस पड़ाव पर फिटनेस बनाए रखने की कड़ी चुनौती

सैंतालीस की उम्र में पेशेवर क्रिकेट खेलना किसी लोहे के चने चबाने से कम नहीं है क्योंकि इस उम्र में मांसपेशियों की रिकवरी धीमी हो जाती है और शरीर तेजी से थकने लगता है। इसके बावजूद इस धाकड़ क्रिकेटर ने अपनी फिटनेस का स्तर इस तरह से बनाए रखा है कि आज के युवा खिलाड़ी भी उनकी चुस्ती को देखकर हैरान रह जाते हैं। रोज घंटों जिम में पसीना बहाना, सख्त डाइट प्लान का पालन करना और मैदान पर पसीना बहाना उनकी डेली रूटीन का हिस्सा बन चुका है, जिसे वे केवल अपने खेल के प्रति वफादारी और अपने बेटे की भावनाओं के खातिर निभा रहे हैं। खेल विशेषज्ञों का भी यह मानना है कि इतनी उम्र में इस स्तर की प्रतिस्पर्धा में टिके रहना किसी चमत्कार से कम नहीं है और यह केवल असीम इच्छाशक्ति के बल पर ही संभव हो सकता है, जो इस खिलाड़ी ने पूरी दुनिया के सामने साबित करके दिखाया है।

खेल प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बना यह अनोखा कारण

क्रिकेट के गलियारों में जब से इस खिलाड़ी ने अपने संन्यास न लेने के पीछे की इस दिलचस्प वजह का खुलासा किया है, तब से सोशल मीडिया पर हर तरफ इसी बात की चर्चा हो रही है। फैंस इस बात पर अपनी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं कि एक तरफ जहां खिलाड़ी उम्र होने पर खुद ही मैदान छोड़ना चाहते हैं, वहीं उनके घर का छोटा राजकुमार उन्हें देश और दुनिया के लिए अभी और खेलते देखना चाहता है। यह कहानी न केवल खेल प्रेमियों को प्रेरित करती है बल्कि यह भी सिखाती है कि पारिवारिक प्रेरणा और अपनों का प्यार किस तरह से इंसान को असंभव दिखने वाले काम को भी आसानी से करने की ताकत दे देता है। आने वाले समय में यह देखना वाकई बहुत दिलचस्प होगा कि यह महान खिलाड़ी अपने बेटे की जिद के आगे झुकते हुए कब तक मैदान पर सक्रिय रहते हैं और क्रिकेट के रिकॉर्ड बुक में और कितने नए पन्ने जोड़ते हैं।

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