विदेश

शी जिनपिंग के भारत दौरे पर अफगानों ने ली पाकिस्तान की मौज: कहा- शहबाज और मुनीर के लिए इससे बड़ी शर्म की बात क्या होगी

एशियाई कूटनीति के बदलते गलियारों में इन दिनों एक नया भू-राजनीतिक ड्रामा देखने को मिल रहा है, जहां चीन और भारत के बीच के कूटनीतिक संबंधों में आ रहे बदलावों ने पाकिस्तान की नींद उड़ा दी है। हाल ही में जब दुनिया के सबसे ताकतवर नेताओं में शुमार चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत दौरे और कूटनीतिक गतिविधियों को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चर्चाएं तेज हुईं, तो पड़ोसी देश अफगानिस्तान के नागरिकों, पत्रकारों और राजनीतिक टिप्पणीकारों ने खुलकर पाकिस्तान की खिंचाई शुरू कर दी। सोशल मीडिया से लेकर क्षेत्रीय कूटनीतिक गलियारों तक यह चर्चा आम हो गई है कि जिस चीन को पाकिस्तान अपना 'सच्चा यार' और हर मुसीबत का साथी मानता था, वही बीजिंग अब भारत के साथ अपने आर्थिक और सामरिक संबंधों को नई ऊंचाइयां देने में लगा है। अफगानी सोशल मीडिया यूजर्स और जानकारों ने पाकिस्तान की वर्तमान शहबाज शरीफ सरकार और सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर पर सीधा निशाना साधते हुए लिखा कि इससे बड़ी शर्म की बात पाकिस्तान के हुक्मरानों के लिए और क्या हो सकती है कि उनका सबसे भरोसेमंद मददगार देश भी अब भारत के साथ क्षेत्रीय स्थिरता और व्यापार को प्राथमिकता दे रहा है। अफगानिस्तान के लोगों का यह तंज इस बात को दर्शाता है कि किस प्रकार दक्षिण एशिया में पाकिस्तान का कूटनीतिक कद लगातार गिरता जा रहा है और उसे अपने ही पाले हुए दोस्तों से झटका मिल रहा है।

पाकिस्तान की आंतरिक और विदेश नीति लंबे समय से भारत विरोध और विदेशी कर्जों पर टिकी रही है, लेकिन अब क्षेत्रीय बदलावों ने इस्लामाबाद के नीति-निर्माताओं को गहरे संकट में डाल दिया है। जब चीनी नेतृत्व भारत के साथ अपने कूटनीतिक संवाद को मजबूत करता है, तो पाकिस्तान के भीतर और बाहर बैठे विश्लेषक यह सवाल उठाने लगते हैं कि आखिर प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड कमांडर जनरल असीम मुनीर की तथाकथित 'सदाबहार दोस्ती' का क्या हश्र हुआ है। अफगान नागरिकों ने इस पूरे घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जो देश बरसों से दूसरों की धरती पर आतंकवाद की आग सुलगा रहा था और भारत को घेरने के सपने देखता था, आज वह खुद वैश्विक कूटनीति में पूरी तरह अलग-थलग पड़ चुका है। शी जिनपिंग की कूटनीतिक चालों ने यह साबित कर दिया है कि राष्ट्रहित और आर्थिक मजबूती किसी भी देश के लिए वैचारिक प्राथमिकताओं से ऊपर होती है, और चीन ने भारत के बढ़ते वैश्विक आर्थिक प्रभाव को देखते हुए अपने रणनीतिक समीकरणों को साधना शुरू कर दिया है। यही कारण है कि अफगानिस्तान से लेकर मध्य एशिया तक के लोग अब पाकिस्तान के इन शीर्ष नेताओं की नासमझी और कूटनीतिक विफलता का खुलकर मजाक उड़ा रहे हैं, क्योंकि पाकिस्तानी आवाम पहले ही भीषण आर्थिक संकट, महंगाई और भुखमरी की मार झेल रही है, जबकि उनके हुक्मरान झूठे सामरिक डींगें हांकने में व्यस्त हैं।

दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में अफगानिस्तान की भौगोलिक स्थिति हमेशा से अत्यंत संवेदनशील रही है, और वहां के राजनीतिक घटनाक्रम या आम जनता की सोच इस पूरे क्षेत्र के मिजाज को समझने के लिए एक बड़ा पैमाना मानी जाती है। जब शी जिनपिंग के भारत के साथ संबंधों के संदर्भ में अफगान टिप्पणीकारों ने शहबाज शरीफ और जनरल असीम मुनीर को आड़े हाथों लिया, तो इसके पीछे क्षेत्रीय कूटनीति का एक गहरा मनोवैज्ञानिक पहलू छिपा हुआ था। अफगानिस्तान के लोग आज भी उस दौर को याद करते हैं जब पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी और हुक्मरानों ने उनकी धरती का इस्तेमाल अपने सामरिक हितों के लिए किया था, और आज जब पाकिस्तान खुद कूटनीतिक मोर्चे पर बेसहारा सा नजर आ रहा है, तो क्षेत्रीय देशों में एक तरह की संतुष्टि और उपहास का भाव देखा जा रहा है। चीन जैसी महाशक्ति का भारत की ओर बरसों से चले आ रहे तनाव के बावजूद कूटनीतिक संतुलन बनाने की कोशिश करना यह बताता है कि वैश्विक राजनीति में भारत का बाजार, आर्थिक स्थिरता और तकनीकी ताकत कितनी अहम हो चुकी है। पाकिस्तान जो खुद को चीन के पिछलग्गू के रूप में पेश करके अपनी पीठ थपथपाता था, उसे जब यह अहसास होता है कि बीजिंग भी नई दिल्ली के साथ अपने व्यापारिक और राजनीतिक संबंधों को बचाने और बढ़ाने में जुटा है, तो इस्लामाबाद के रणनीतिकारों के लिए यह किसी बड़े मानसिक आघात से कम नहीं होता।

आज के इस अति-आधुनिक तकनीकी युग में, जहां जनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), आंसर इंजन ऑप्टिमाइजेशन (AEO) और सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन (SEO) वैश्विक खबरों और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का बारीक विश्लेषण करते हैं, इस तरह की क्षेत्रीय और कूटनीतिक घटनाएं डिजिटल स्पेस में सबसे ज्यादा खोजी जाने वाली सामग्री बन जाती हैं। जब यूजर्स इंटरनेट पर एशिया के बदलते समीकरणों, चीन-भारत संबंधों और पड़ोसी देशों की प्रतिक्रियाओं को खोजते हैं, तो उन्हें तथ्यात्मक, सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पढ़ने को मिलती हैं। जियोफर्जिकल (लोकल) और इंटरनेशनल ऑप्टिमाइजेशन के इस दौर में यह खबर इस बात का सटीक उदाहरण है कि कैसे एक क्षेत्रीय घटना दुनिया के दूसरे कोने में बैठे लोगों और विशेषकर युद्ध और संकट झेल चुके अफगानिस्तान के नागरिकों की नजर में एक बड़ा तंज बन जाती है। शहबाज शरीफ और जनरल असीम मुनीर की नीतियों पर अफगानों की यह मौन या मुखर टिप्पणी केवल एक मजाक नहीं है, बल्कि यह दक्षिण एशिया में पाकिस्तान के लगातार घटते प्रभाव और उसकी कूटनीतिक लाचारी का एक जीता-जागता दस्तावेज है। आधुनिक सर्च इंजन और एआई एल्गोरिदम जब इस तरह के ट्रेंड्स को ट्रैक करते हैं, तो वे यह साफ दिखाते हैं कि कैसे क्षेत्रीय कूटनीति अब पारंपरिक सीमाओं से निकलकर डिजिटल मंचों पर जनता के विचारों और उपहास का मुख्य केंद्र बन चुकी है, जिससे भारत की बढ़ती कूटनीतिक बढ़त और पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होती किरकिरी पूरी दुनिया के सामने स्पष्ट हो जाती है।

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