घर की चौखट पर मेहमान को विदा करते समय रोना क्यों होता है अशुभ, ज्योतिषाचार्य ने बताई असली वजह

सनातन हिंदू परंपरा और वैदिक वास्तु शास्त्र में घर के मुख्य द्वार यानी चौखट को केवल एक भौतिक संरचना नहीं, बल्कि घर की संपूर्ण सकारात्मक ऊर्जा, सुख-शांति और धन-वैभव का आधार माना गया है। प्राचीन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार घर की दहलीज साक्षात धन की देवी मां लक्ष्मी का मुख्य प्रवेश बिंदु होती है, जहां से घर में दैवीय शक्तियों का आगमन होता है। इसी वजह से भारतीय संस्कृति में घर की चौखट के लिए कई कड़े आध्यात्मिक और व्यावहारिक नियम तय किए गए हैं, जिनका पालन सदियों से किया जाता रहा है। शाम के समय चौखट पर बैठने की मनाही से लेकर दहलीज पर पैर रखने से बचने के कई विधान वेदों और वास्तु ग्रंथों में दर्ज हैं। इसी कड़ी में एक अत्यंत महत्वपूर्ण नियम यह भी है कि जब भी घर से किसी आत्मीय जन, रिश्तेदार या सम्मानित मेहमान को विदा किया जा रहा हो, तो दरवाजे की चौखट पर खड़े होकर रोने, आंसू बहाने या उदासी व्यक्त करने की सख्त मनाही होती है। धार्मिक मान्यता है कि इस पावन स्थान पर आंसू बहाने से घर का पूरा ऊर्जा तंत्र प्रभावित होता है और यात्रा पर निकलने वाले व्यक्ति के भाग्य पर भी इसका गंभीर प्रभाव पड़ता है।
चौखट पर रोने का धार्मिक और वास्तु महत्व: नकारात्मक ऊर्जा और यात्रा में अमंगल का खतरा
एस्ट्रोपत्री के प्रमुख ज्योतिषाचार्य श्री चंद्रेश शर्मा जी के अनुसार सनातन परंपराओं में चौखट को ऊर्जा का मुख्य संवाहक माना गया है, जो घर के भीतर और बाहरी दुनिया के बीच संतुलन बनाती है। जब कोई व्यक्ति किसी महत्वपूर्ण कार्य या लंबी यात्रा के लिए घर से प्रस्थान करता है, तो मुख्य द्वार से उसका पहला कदम आगे बढ़ना एक नए शुभ आरंभ का प्रतीक माना जाता है। ऐसे पावन क्षण में यदि चौखट पर खड़े होकर कोई रोता है या शोक व्यक्त करता है, तो वातावरण में तत्काल तमस और नकारात्मक तरंगों का निर्माण होता है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार विदाई के समय बहने वाले आंसू यात्रा करने वाले व्यक्ति के मन और आभा मंडल (Aura) को कमजोर कर देते हैं, जिससे यात्रा मार्ग में अप्रत्याशित बाधाएं, अमंगल, दुर्घटना या कार्य में असफलता की आशंकाएं बढ़ जाती हैं। इसके अतिरिक्त इस प्रकार का अशुभ आचरण घर के भीतर स्थित कुलदेवी और मां लक्ष्मी को अप्रसन्न करता है, जिससे घर की बरकत और शांति पर गहरा दुष्प्रभाव पड़ता है। इसीलिए शास्त्रों में विदाई सदैव प्रसन्न मन, मुख पर मंद मुस्कान, मीठी वाणी और मंगलकारी शुभकामनाओं के साथ देने का स्पष्ट विधान है, जिससे जाने वाले की यात्रा निर्विघ्न और सुरक्षित संपन्न हो सके।
भूलकर भी न करें चौखट पर ये गलतियां: मां लक्ष्मी के रुष्ट होने से हो सकती है भारी धन हानि
वास्तु शास्त्र के अनुसार घर के मुख्य द्वार और दहलीज को सदैव देवतुल्य आदर मिलना चाहिए, क्योंकि यह स्थान घर के मुखिया के मान-सम्मान और आर्थिक स्थिति का दर्पण होता है। ज्योतिषाचार्यों का मत है कि घर की चौखट पर कभी भी धूल, मिट्टी, जूते-चप्पलों का ढेर या किसी भी प्रकार की गंदगी जमा नहीं होनी चाहिए। चौखट पर गंदगी होने से राहु का कुप्रभाव बढ़ता है और सकारात्मक शक्तियों के स्थान पर नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह घर के कमरों में फैलने लगता है। इसके साथ ही दहलीज पर खड़े होकर या बैठकर कभी किसी पड़ोसी, रिश्तेदार या परिवारजन से वाद-विवाद, अपशब्दों का प्रयोग या कटु वाणी नहीं बोलनी चाहिए। ऐसा माना जाता है कि दरवाजे के बीच में खड़े होकर झगड़ा करने से घर की सुख-समृद्धि सीधे तौर पर बाधित होती है और मां लक्ष्मी उस घर का त्याग कर देती हैं, जिसके परिणामस्वरूप परिवार को कर्ज और आर्थिक तंगी जैसी भारी समस्याओं से जूझना पड़ता है।
प्रतिदिन चौखट की पूजा और संध्या काल के नियम: घर में बनी रहेगी स्थायी सुख-समृद्धि
वास्तु दोषों के शमन और घर में स्थायी बरकत बनाए रखने के लिए प्राचीन ग्रंथों में प्रतिदिन सुबह घर की चौखट को जल से धोकर साफ करने, हल्दी या रोली से स्वास्तिक बनाने और संध्या वेला में वहां गाय के घी या तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करने का सुझाव दिया गया है। गोधूलि बेला यानी सूर्यास्त के समय जब दिन और रात का मिलन होता है, उस समय चौखट पर पैर फैलाकर बैठना, भोजन करना या सोना पूर्णतः वर्जित माना गया है, क्योंकि यही वह समय होता है जब मां लक्ष्मी का घर में प्रवेश माना जाता है। इन वैदिक और वास्तु नियमों का विधिवत पालन करने से परिवार के सभी सदस्यों का स्वास्थ्य उत्तम रहता है, आपसी रिश्तों में सामंजस्य बढ़ता है और घर हमेशा सुख, शांति एवं ऐश्वर्य से परिपूर्ण बना रहता है।